स्मार्ट मीटर का भारी झटका: छत्तीसगढ़ में बिजली बिल में तीन से चार गुना उछाल, लोगों में आक्रोश

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्मार्ट मीटर लगने के बाद आम लोगों के बिजली बिल में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे मध्यम और गरीब परिवारों का बजट बिगड़ गया है। उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर हटाने की मांग करते हुए प्रशासन पर जबरन मीटर लगाने के आरोप लगाए हैं।

स्मार्ट मीटर ने बिगाड़ा परिवारों का बजट

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में इन दिनों स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों में गहरा असंतोष है। मध्यम वर्गीय और गरीब परिवारों के लिए बिजली बिल का भुगतान करना एक बड़ी चुनौती बन गया है क्योंकि मीटर बदलने के बाद से बिल में दोगुना से लेकर चार गुना तक का भारी उछाल आया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नए मीटर लगने से उनकी आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ रहा है, जिसके चलते वे अब इन स्मार्ट मीटरों को हटाकर पुरानी व्यवस्था लागू करने की पुरजोर मांग कर रहे हैं।

बिल में बेतहाशा बढ़ोतरी का दर्द

पहले के सामान्य मीटरों के मुकाबले नए स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ रहे हैं। जिन घरों में पहले बिजली का बिल 300 से 400 रुपये या अधिकतम 600 रुपये तक आता था, वहीं अब वही उपभोक्ता 1500 रुपये, 1800 रुपये और कुछ मामलों में तो 3000 रुपये तक का बिल भरने को मजबूर हैं। एक स्थानीय मैकेनिक ने बताया कि उनकी सीमित आमदनी में बिजली का इतना बड़ा बिल भर पाना लगभग असंभव सा हो गया है। इस अप्रत्याशित वृद्धि ने उनके पूरे महीने के बजट को असंतुलित कर दिया है।

बिना सहमति के मीटर लगाने का आरोप

उपभोक्ताओं ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। इंद्रजीत सिंह धंजल नामक एक ग्रामीण ने आरोप लगाया कि विभाग ने स्मार्ट मीटर लगाने से पहले उपभोक्ताओं से किसी भी प्रकार की कोई सहमति नहीं ली। उन्होंने बताया कि जिन घरों का बिल पहले लगभग 1000 रुपये आता था, अब वहां सीधे 2500 से 3000 रुपये तक का बिल भेजा जा रहा है। लोगों का यह भी कहना है कि यदि कोई उपभोक्ता स्मार्ट मीटर का विरोध करता है, तो उन पर दबाव बनाया जाता है। कई स्थानों पर ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि मीटर लगाने के दौरान पुलिस बल का सहारा लिया गया ताकि विरोध को शांत किया जा सके।

पुरानी मीटर व्यवस्था की मांग

क्षेत्रीय निवासियों का स्पष्ट मानना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद से न केवल बिजली की दरों में बल्कि कुल बिलिंग प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी हुई है। एक अन्य ग्रामीण ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि उनके घर का बिल पहले 900 से 1000 रुपये के बीच आता था, लेकिन अब यह राशि बढ़कर 3800 से 4200 रुपये के स्तर तक पहुंच गई है। ग्रामीणों का तर्क है कि पुरानी मीटर व्यवस्था में उन्हें कभी ऐसी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा था। उन्होंने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें, स्मार्ट मीटरों को हटाकर पुरानी व्यवस्था को बहाल करें और आम जनता को इस बढ़ते आर्थिक बोझ से राहत दिलाएं।

निष्पक्ष जांच की उठी मांग

सरगुजा के लोगों का कहना है कि बिजली बिलों में हुई इस भारी वृद्धि की तत्काल निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। यदि मीटर की रीडिंग में या बिलिंग सॉफ्टवेयर में किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी या गड़बड़ी है, तो उसे तत्काल सुधारा जाए। फिलहाल, स्मार्ट मीटर का यह मुद्दा मध्यम और गरीब परिवारों के लिए एक बड़ा संकट बन चुका है और जनता जल्द से जल्द सरकार से ठोस निर्णय लेने की उम्मीद कर रही है ताकि उनकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ने से बच सके।

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