राम मंदिर चंदा चोरी विवाद: पप्पू यादव के नाटक पर भड़के सपा सांसद रामगोपाल यादव, कहा - संत समाज का इससे कोई लेना-देना नहीं

संसद परिसर में निर्दलीय सांसद पप्पू यादव द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन पर समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर चढ़ावे के विवाद में संतों को घसीटना पूरी तरह गलत है।

अयोध्या के ऐतिहासिक राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर संसद परिसर में हुए हंगामेदार प्रदर्शन पर अब विपक्षी खेमे के भीतर से ही असहमति के सुर उठने लगे हैं। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद रामगोपाल यादव ने इस पूरे मामले में निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के प्रदर्शन के तरीके को पूरी तरह गलत करार दिया है। संसद भवन के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के प्रदर्शनों में पूजनीय संतों को घसीटना अनुचित है।

संसद परिसर में हुए नाटक पर सपा सांसद की आपत्ति

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद रामगोपाल यादव ने पप्पू यादव द्वारा किए गए नाटक पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि संसद परिसर में जो कुछ भी हुआ, वह पूरी तरह से गलत था। रामगोपाल यादव के अनुसार, राम मंदिर में चंदे की कथित चोरी के मामले से संत समाज का कोई सरोकार नहीं है, इसलिए प्रदर्शन के दौरान संतों का रूप धरकर ऐसा स्वांग नहीं रचा जाना चाहिए था। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि उनकी पार्टी राम मंदिर के चढ़ावे में हुई गड़बड़ी के मुद्दे को संसद के भीतर मजबूती से उठाएगी क्योंकि यह बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला है।

क्या था पूरा मामला और मकर द्वार पर क्या हुआ था?

उल्लेखनीय है कि बीते 31 जुलाई, शुक्रवार को संसद भवन परिसर में विपक्षी दलों के कई सांसदों ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मुद्दे पर अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन का नेतृत्व बिहार के पूर्णिया संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव कर रहे थे। पप्पू यादव संसद भवन के ऐतिहासिक 'मकर द्वार' के ठीक सामने एक पुजारी की वेशभूषा धारण करके बैठ गए थे और अपने हाथ में एक बड़ी 'दान पेटी' थाम रखी थी।

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान एक नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ विपक्षी नेता उस दान पेटी में पैसे डालने पहुंचे, तो पप्पू यादव ने उन रुपयों को अपनी जेब में रख लिया। इस प्रतीकात्मक नाटक के जरिए विपक्षी सांसद यह दिखाना चाहते थे कि राम मंदिर में आने वाले दान का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस दौरान वहां मौजूद कई विपक्षी सांसदों ने 'चोर-चोर' और 'चढ़ावा चोर' के नारे भी लगाए थे, जिसके दृश्य सोशल मीडिया पर काफी प्रसारित हुए थे।

मामला पहुंचा थाने, राहुल गांधी और पप्पू यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज

इस विवादित प्रदर्शन के बाद राजनीतिक गलियारों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। नई दिल्ली से भारतीय जनता पार्टी की सांसद बांसुरी स्वराज ने अपनी पार्टी के अन्य विधायकों के साथ मिलकर दिल्ली के संसद मार्ग थाने में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी इस मामले को लेकर गंभीर कानूनी कार्रवाई की गई है।

वाराणसी के पुलिस उपायुक्त गौरव बंसवाल ने इस संबंध में बताया कि स्थानीय संतों की लिखित शिकायत के आधार पर कोतवाली थाने में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पप्पू यादव और समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ सनातन धर्म का अपमान करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोपों में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं ने इस प्रदर्शन की आड़ में पूरी सनातन संस्कृति का उपहास उड़ाया है। उन्होंने कहा कि यह कोई साधारण विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह हमारी समृद्ध सनातन परंपराओं, पूजनीय संत समाज और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का खुला अपमान था।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पप्पू यादव पर चप्पल फेंकने की घटना

इस पूरे घटनाक्रम के बाद रविवार को पप्पू यादव ने अपने निजी आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी। इस पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने संसद परिसर में किए गए अपने नाटक का पुरजोर बचाव किया और उसे बिल्कुल सही ठहराया। लेकिन इसी दौरान वहां एक अप्रिय घटना घट गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच ही एक अज्ञात व्यक्ति ने पप्पू यादव पर चप्पल फेंक दी। इस अप्रत्याशित हमले के तुरंत बाद वहां मौजूद पप्पू यादव के समर्थकों और उस हमलावर के बीच तीखी हाथापाई शुरू हो गई।

इस घटना के बाद मीडिया से बात करते हुए पप्पू यादव ने कहा कि वह इस तरह के कायराना हमलों या अपनी जान लेने की कोशिशों से डरने वाले नहीं हैं और वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, हमला करने वाले व्यक्ति की पहचान 34 वर्षीय सुमित के रूप में हुई है। सुमित मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का निवासी है और वर्तमान में गाजियाबाद में लोहे के बर्तन और सामान बनाने का काम करता है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी सुमित का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं है।

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