ऊर्जा के क्षेत्र में चीन की बड़ी उपलब्धि
दुनिया भर में बढ़ते ईंधन संकट और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच चीन ने एक ऐसी वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। चीन अपने आर्टिफिशियल सन यानी कृत्रिम सूरज प्रोजेक्ट पर पूरी गति से काम कर रहा है। हेफेई शहर में संचालित हो रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य न्यूक्लियर फ्यूजन के जरिए असीमित और स्वच्छ ऊर्जा पैदा करना है। यह तकनीक सौर ऊर्जा के सिद्धांत पर आधारित है जो आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा जरूरतों को पूरी तरह बदल सकती है।
मैग्नेट का सफल परीक्षण और तकनीक
चीन ने हाल ही में दुनिया के सबसे बड़े सुपरकंडक्टिंग फ्यूजन मैग्नेट का सफल परीक्षण पूरा करने का दावा किया है। इस शक्तिशाली मैग्नेट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह करोड़ों डिग्री तापमान वाले प्लाज्मा को नियंत्रित रखने में सक्षम है। इसी प्रक्रिया के माध्यम से सूरज के भीतर होने वाली नाभिकीय क्रिया को पृथ्वी पर दोहराने का प्रयास किया जा रहा है। यदि यह प्रयोग पूरी तरह सफल साबित होता है, तो दुनिया की कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी।
अमेरिका की बढ़ी चिंता
चीन की इस तेजी से हो रही वैज्ञानिक प्रगति ने अमेरिका और अन्य विकसित देशों की नींद उड़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि यह प्रोजेक्ट अभी भी अनुसंधान के चरणों में है और इसे व्यावसायिक स्तर पर लागू होने में अभी कई साल का लंबा समय लग सकता है, लेकिन इसकी सफलता की संभावना ने वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। अब तकनीक और ऊर्जा के क्षेत्र में चल रही यह दौड़ केवल आर्थिक वर्चस्व की नहीं, बल्कि भविष्य की वैज्ञानिक शक्ति की प्रतिस्पर्धा भी बन गई है।
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