अमेरिकी टैरिफ की परवाह नहीं, रूस में आर्मी चीफ धीरज सेठ का बड़ा दांव और चीन-पाकिस्तान की बढ़ी बेचैनी

एक तरफ अमेरिकी संसद में भारत के खिलाफ सख्त टैरिफ बिल की चर्चाएं हैं, तो दूसरी तरफ भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की रूस यात्रा ने भू-राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। इस महत्वपूर्ण दौरे ने चीन और पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ा दी हैं क्योंकि भारत ने अपनी रक्षा प्राथमिकताओं को सर्वोपरि रखा है।

रूस में भारतीय सेना प्रमुख की मौजूदगी और नया भू-राजनीतिक मोड़

इस वक्त अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बेहद दिलचस्प और आक्रामक दौर चल रहा है। एक तरफ दुनिया की महाशक्ति अमेरिका के गलियारों में भारत पर दबाव बनाने की कोशिशें हो रही हैं, तो दूसरी ओर भारत इन तमाम दबावों को दरकिनार करते हुए अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूती से थामे हुए है। भारतीय सेना के प्रमुख जनरल धीरज सेठ की रूस यात्रा इसी 'नो फियर' यानी निडर रुख का सबसे बड़ा प्रमाण है। बीते 8 वर्षों में यह पहली बार है जब भारतीय सेना का कोई सेवारत प्रमुख रूस के दौरे पर गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

अमेरिका का टैरिफ का दांव और भारत का कड़ा रुख

हाल के दिनों में अमेरिकी संसद यानी यूएस कांग्रेस में रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत के खिलाफ एक सख्त बिल पर चर्चा और उसे लेकर दबाव बनाने की कवायद तेज हुई है। अमेरिकी प्रशासन का प्रयास है कि भारत को आर्थिक प्रतिबंधों या टैरिफ के जरिए अपनी नीतियों में बदलाव करने के लिए मजबूर किया जाए। लेकिन भारत की नई कूटनीति अब पुरानी नहीं रही। भारतीय नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि देश की रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकताएं किसी दूसरे देश के एजेंडे से नहीं, बल्कि भारत के अपने राष्ट्रीय हितों से तय होंगी। अमेरिका की इन चालों को भारत ने पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर चलना जारी रखा है।

मॉस्को यात्रा के मुख्य बिंदु और रक्षा समझौते

जनरल धीरज सेठ की मॉस्को यात्रा केवल एक औपचारिक दौरा नहीं है, बल्कि यह भविष्य की रक्षा तैयारियों का एक मजबूत खाका है। इस उच्च-स्तरीय यात्रा में जिन प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा की गई है, वे भारत की सैन्य क्षमता को कई गुना बढ़ाने वाले हैं:

  • स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति: रूस से पहले से खरीदे गए टैंकों, एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य बख्तरबंद वाहनों की सप्लाई चेन को निर्बाध रखना, ताकि देश की सीमाओं की सुरक्षा में कोई कमी न आए।
  • पेंटसिर-S1M एयर डिफेंस सिस्टम: रूस का यह अत्याधुनिक शॉर्ट-रेंज मोबाइल एयर-डिफेंस सिस्टम भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है। यह सिस्टम ड्रोन और क्रूज मिसाइलों के हमलों से निपटने में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
  • भविष्य के टैंक और इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स: भारत अपने फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल प्रोग्राम और इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स जैसे बीएमपी-3 को लेकर रूस के साथ मिलकर काम करने की योजना बना रहा है। इससे भारत की जमीनी फायरपावर को नई मजबूती मिलेगी।

यह यात्रा केवल उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रूस के साथ मिलकर डिफेंस कोऑपरेशन का एक नया ब्लू प्रिंट तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम है।

चीन और पाकिस्तान के लिए यह बड़ा झटका

जब भारत और रूस रक्षा क्षेत्र में इस तरह की गहरी साझेदारी करते हैं, तो उसका सीधा असर हमारे पड़ोसी देशों, चीन और पाकिस्तान पर पड़ता है। भारत की यह रणनीति ड्रैगन और पाकिस्तान के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। उन्हें यह साफ समझ आ गया है कि अमेरिकी टैरिफ का दबाव भारत को अपने रक्षा तंत्र को आधुनिक बनाने से रोकने में नाकाम साबित हुआ है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्णयों और वहां की संसद के बिलों की परवाह किए बिना मॉस्को के साथ नई साझेदारी को आगे बढ़ाना यह साबित करता है कि भारत अब वैश्विक मंच पर अपनी शर्तों पर खेलने वाला राष्ट्र बन चुका है।

निष्कर्ष: भारत एक उभरती हुई सैन्य ताकत

कुल मिलाकर, जनरल धीरज सेठ का मॉस्को का यह दौरा भारत की उस नई रणनीति को दर्शाता है जिसमें दबाव में झुकने के बजाय अपने हितों के लिए दुनिया के किसी भी देश के साथ सामरिक संतुलन बनाने की क्षमता है। चीन और पाकिस्तान, जो लंबे समय से भारत के बढ़ते रक्षा बजट और रूस के साथ उसके पुराने सैन्य संबंधों से असहज थे, अब इस नई साझेदारी के बाद अधिक सतर्क हो गए हैं। भारत का यह मास्टरस्ट्रोक वैश्विक रक्षा बाजार में एक बड़ा संदेश है कि देश अपनी सुरक्षा जरूरतों के मामले में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप या आर्थिक धमकी को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।

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