मामले का खुलासा और पुलिस की कार्रवाई
बिहार के औरंगाबाद जिले के बारुण थाना क्षेत्र में डेहरी नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार की नृशंस हत्या के मामले ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया था। इस सनसनीखेज घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने बेहद तेजी से कदम उठाए और महज कुछ ही घंटों के भीतर इस हत्याकांड का पर्दाफाश कर दिया है। मगध रेंज के आईजी विकास वैभव ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि इस पूरे अपराध के पीछे कोई बाहरी हमलावर नहीं, बल्कि मृतक पदाधिकारी का अपना सरकारी ड्राइवर मिथलेश कुमार शामिल था।
घटनास्थल का निरीक्षण और जांच
कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार की हत्या की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। घटना की संवेदनशीलता को भांपते हुए मगध प्रक्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने तत्काल औरंगाबाद की ओर रुख किया और वहां पहुंचकर औरंगाबाद के एसपी उपेंद्र नाथ के साथ घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया। जांच के दौरान पुलिस के आला अधिकारियों ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण फॉरेंसिक साक्ष्य एकत्रित किए और आसपास के लोगों से घटना के संबंध में बारीकी से पूछताछ की।
शुरुआती दौर में पुलिस इस मामले को लूटपाट की वारदात या फिर किसी पुरानी आपसी रंजिश के नजरिए से देख रही थी। हालांकि, जब जांच दल ने तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल इनपुट्स और चश्मदीदों के बयानों का मिलान किया, तो मामला पूरी तरह बदल गया। पुलिस की शक की सुई धीरे धीरे उन लोगों की ओर घूमने लगी जो मृतक पदाधिकारी के बेहद करीबी थे।
ड्राइवर की गिरफ्तारी और पूछताछ
इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस टीम ने वैज्ञानिक तरीकों का सहारा लिया। पूछताछ के दौरान सबसे अधिक संदेह सरकारी ड्राइवर पर गया, क्योंकि घटना के समय वह पदाधिकारी के साथ मौजूद था। जब पुलिस ने ड्राइवर से कड़ाई से पूछताछ शुरू की, तो उसके बयानों में काफी विरोधाभास देखने को मिला। आईजी विकास वैभव के स्पष्ट निर्देशों पर बारुण थाना पुलिस ने ड्राइवर को हिरासत में लेकर जब सख्ती बरती, तो वह ज्यादा देर तक अपने झूठ को छिपा नहीं सका।
ड्राइवर ने स्वीकार कर लिया है कि उसने पूरी योजना बनाकर इस वारदात को अंजाम दिया था। हालांकि, पुलिस अभी भी इस बात की तहकीकात कर रही है कि आखिर उसने यह कदम क्यों उठाया। क्या यह कोई व्यक्तिगत विवाद था, पैसों का कोई बड़ा लेनदेन या फिर कोई गुप्त रंजिश, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस अभी आधिकारिक तौर पर घटना के सटीक उद्देश्य को सार्वजनिक करने से बच रही है ताकि जांच प्रभावित न हो।
हत्या में प्रयुक्त हथियार की तलाश
आईजी विकास वैभव ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि ड्राइवर ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया में केवल इकबालिया बयान ही पर्याप्त नहीं होता। इस केस को अदालत में पूरी मजबूती के साथ पेश करने के लिए पुलिस को ठोस और वैज्ञानिक सबूतों की जरूरत है। फिलहाल, औरंगाबाद पुलिस की एक विशेष टीम उस लोहे की भारी रॉड की तलाश में जुटी हुई है, जिसका उपयोग कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार की बेरहमी से हत्या करने में किया गया था। इस हथियार की बरामदगी के लिए आरोपी द्वारा बताए गए विभिन्न ठिकानों पर पुलिस की छापेमारी लगातार जारी है।
कानून व्यवस्था और पुलिस का कड़ा रुख
सम्राट सरकार के शासनकाल में प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस मुख्यालय बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। इस हाई प्रोफाइल हत्याकांड को चंद घंटों में सुलझाना औरंगाबाद पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। आईजी विकास वैभव ने यह भी साफ कर दिया है कि मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बावजूद जांच का सिलसिला यहीं खत्म नहीं होगा। पुलिस इस बात की गहराई से पड़ताल करेगी कि क्या इस हत्याकांड के पीछे कोई अन्य साजिशकर्ता भी शामिल थे। पुलिस सभी कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है ताकि सभी दोषियों को कानून के तहत सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके और भविष्य में ऐसी वारदातों पर अंकुश लगाया जा सके।
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