वकालत का पेशा छोड़कर बने IAS अधिकारी, बालाघाट से छतरपुर ट्रांसफर के बाद मृणाल मीना ने साझा की सफलता की कहानी

राजस्थान के रहने वाले 2015 बैच के आईएएस अधिकारी मृणाल मीना ने अपनी तैयारी के दौरान के अनुभवों को साझा किया है। लॉ की पढ़ाई से प्रशासनिक सेवा तक का उनका सफर आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।

प्रशासनिक बदलाव और नई जिम्मेदारी

मध्य प्रदेश में हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल के दौरान बालाघाट के कलेक्टर रहे मृणाल मीना का स्थानांतरण छतरपुर कर दिया गया है। अपनी नई जिम्मेदारी को संभालते हुए वह अब छतरपुर जिले के कलेक्टर के रूप में कार्यभार ग्रहण करेंगे। उनके स्थान पर बालाघाट में 2017 बैच के आईएएस अधिकारी कुमार सत्यम पदस्थ होंगे। अपने कार्यकाल के दौरान मृणाल मीना ने न केवल प्रशासनिक कार्यकुशलता दिखाई, बल्कि वे युवाओं के बीच एक मार्गदर्शक के रूप में भी उभरे हैं।

कानून की पढ़ाई से सिविल सेवा का सफर

मूल रूप से राजस्थान के भरतपुर के निवासी मृणाल मीना का जीवन सफर काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए हैदराबाद का रुख किया और वहां के नालसार विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की। वकालत के क्षेत्र में इंटर्नशिप करने के दौरान भी उनका मन प्रशासनिक सेवा में जाने का था। उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी परीक्षा को पास किया और 2015 बैच के आईएएस अधिकारी बने। उन्होंने इस परीक्षा में 174वीं रैंक हासिल की थी।

तैयारी का कोई निश्चित पैमाना नहीं

जब यूपीएससी की तैयारी की बात आती है, तो मृणाल मीना कहते हैं कि उन्होंने कभी भी किताबी दबाव को खुद पर हावी नहीं होने दिया। उनका मानना है कि पढ़ाई घंटों गिनकर नहीं बल्कि विषय की समझ के आधार पर की जानी चाहिए। वह किसी दिन 11 घंटे तक पढ़ते थे तो कभी काम या व्यस्तता के कारण सिर्फ 4 घंटे ही मिल पाते थे। औसत निकाला जाए तो रोजाना 7 घंटे की एकाग्रता के साथ की गई पढ़ाई उनके लिए सफल रही। उन्होंने दिल्ली जाकर अपनी तैयारी को अंतिम रूप दिया था, जो कि उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।

ऑप्शनल विषय का चुनाव व्यक्तिगत पसंद है

यूपीएससी मेंस परीक्षा में वैकल्पिक विषय का चुनाव सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती है। मृणाल मीना के अनुसार, अभ्यर्थियों को वही विषय चुनना चाहिए जिसमें उनकी गहरी रुचि हो। उन्होंने स्वयं लॉ की पढ़ाई की थी, इसलिए उन्होंने विधि को ही अपना विकल्प बनाया और उसमें बेहतर परिणाम हासिल किए। कई अभ्यर्थी इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि होने के बावजूद कला के विषयों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं। उनका साफ मानना है कि यह पूरी तरह से अभ्यर्थी की व्यक्तिगत पसंद और उसकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि पर निर्भर करता है।

मॉक इंटरव्यू और समूह चर्चा की भूमिका

आज के दौर में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर मॉक इंटरव्यू की भरमार है, लेकिन मृणाल मीना इसे काफी पुराना चलन मानते हैं। उनका कहना है कि पुराने समय में भी दिल्ली की कोचिंग संस्थाएं मेंस क्लियर करने के बाद मॉक इंटरव्यू के लिए रजिस्ट्रेशन करती थीं। यह प्रक्रिया तैयारी के लिए अत्यंत लाभकारी है। अभ्यर्थी जरूरी नहीं कि किसी महंगे संस्थान में ही जाएं, बल्कि आपस में मिलकर भी समूह चर्चा और मॉक इंटरव्यू का अभ्यास कर सकते हैं। इससे न केवल झिझक दूर होती है बल्कि किसी भी मुद्दे पर सोचने का नजरिया भी विकसित होता है।

इंटरव्यू के अतरंगी सवालों का सच

सोशल मीडिया पर अक्सर यह चर्चा होती है कि इंटरव्यू बोर्ड बेहद अजीब और कठिन सवाल पूछता है। हालांकि, मृणाल मीना का अनुभव इससे काफी अलग रहा। उन्होंने बताया कि इंटरव्यू में सवाल मुख्य रूप से उम्मीदवार की हॉबी, पिछले कार्यक्षेत्र और उनके गृह जिले से जुड़े होते हैं। चूंकि उनके पिता भी प्रशासनिक सेवा में रहे हैं, इसलिए उनसे भी संबंधित विषय पूछे गए थे। फुटबॉलर से जुड़े एक पुराने सवाल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि पहले उनकी राय अलग थी, लेकिन अब लियोनल मेसी उनके पसंदीदा खिलाड़ी हैं।

फिटनेस और हॉबी का महत्व

प्रशासनिक दबाव के बावजूद मृणाल मीना ने अपनी रुचियों को कभी कम नहीं होने दिया। उन्हें संगीत का शौक है और उन्होंने कई वाद्य यंत्रों को बजाना स्वयं सीखा है। वह इस बात पर जोर देते हैं कि मानसिक और शारीरिक फिटनेस के लिए हर दिन कम से कम 45 मिनट का वर्कआउट अनिवार्य है। उनका मानना है कि एक स्वस्थ शरीर ही चुनौतीपूर्ण प्रशासनिक दायित्वों को निभाने में सक्षम होता है।

Gen-Z एस्पिरेंट्स के लिए खास टिप्स

नई पीढ़ी के उम्मीदवारों के लिए उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं। उनका कहना है कि यूपीएससी का पैटर्न और सिलेबस हर साल बदलता है, इसलिए रटने के बजाय सीखने की प्रक्रिया को विस्तृत रखना चाहिए। अभ्यर्थियों में आलोचनात्मक सोच यानी क्रिटिकल थिंकिंग होनी चाहिए। हर सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दे पर उनकी अपनी संतुलित और स्पष्ट राय होनी चाहिए। वर्तमान घटनाओं पर नजर रखना और उनके सभी पहलुओं का विश्लेषण करना सफलता की कुंजी है।

एक नजर करियर की ऊंचाइयों पर

आईएएस अधिकारी बनने के बाद मृणाल मीना ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दी हैं। उनकी पहली पोस्टिंग रीवा जिले में सहायक कलेक्टर के रूप में हुई थी। इसके बाद उन्होंने सबलगढ़ में एसडीएम और नगर निगम कमिश्नर जैसे पदों पर कार्य किया। उज्जैन में जिला पंचायत सीईओ और महाकाल मंदिर प्रशासक के रूप में उनका कार्यकाल काफी उल्लेखनीय रहा। बालाघाट में दो साल तक सेवा देने के बाद अब वह छतरपुर की जनता के लिए काम करने हेतु तैयार हैं।

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