मध्य प्रदेश के सागर जिले में पारंपरिक फसलों के प्रति किसानों का नजरिया तेजी से बदल रहा है। पिछले चार-पांच सालों का आंकड़ा देखें तो यहां के किसानों का रुझान मक्का की खेती की तरफ बहुत तेजी से बढ़ा है। इस साल जिले में एक बड़े पैमाने पर यानी 2,80,000 एकड़ से भी अधिक भूमि पर मक्के की बुवाई की जा रही है। किसानों के इस बदलाव के पीछे एक बड़ी वजह सोयाबीन की फसल में लगातार हो रहा नुकसान है। सोयाबीन की खेती में बढ़ते घाटे और अनिश्चितता के कारण अब किसान इस महंगी फसल के विकल्प के रूप में मक्के को अपना रहे हैं।
सागर जिले में ज्यादातर किसानों ने लगभग 20 से 25 दिन पहले ही मक्के की बुवाई का काम पूरा कर लिया है। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बुवाई कर देने भर से अच्छी फसल और बड़ा मुनाफा हासिल नहीं किया जा सकता। मक्के की खेती से भरपूर उत्पादन लेने के लिए समय पर खाद देना, खरपतवार पर नियंत्रण रखना और जंगली जानवरों से फसल की सुरक्षा करना बेहद जरूरी कदम हैं।
कृषि विशेषज्ञ की सलाह: जानिए कब और कितनी मात्रा में देना है यूरिया
फसल की इस महत्वपूर्ण अवस्था को देखते हुए सागर कृषि विभाग के उपसंचालक डॉक्टर राजेश त्रिपाठी ने किसानों के लिए कुछ बेहद उपयोगी और जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। डॉक्टर राजेश त्रिपाठी के अनुसार, जिन किसानों ने करीब तीन सप्ताह पहले बुवाई की थी, उनकी मक्के की फसल अब लगभग 20 से 25 दिन की हो चुकी है। यह पौधों के विकास का वह समय होता है जब उन्हें सबसे ज्यादा पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है।
यही कारण है कि किसानों ने अब अपनी खेतों में टॉप ड्रेसिंग यानी खड़ी फसल में खाद देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। डॉक्टर त्रिपाठी ने बताया कि इस समय फसल को पोषण देने के लिए किसानों को प्रति एकड़ के हिसाब से सही मात्रा का ध्यान रखना चाहिए। उनके अनुसार:
- किसानों को एक एकड़ मक्के की फसल में लगभग 40 किलो यूरिया का इस्तेमाल करना चाहिए।
- यह मात्रा पौधों की शुरुआती वृद्धि के लिए बेहद संतुलित और असरदार मानी जाती है।
- समय पर यूरिया मिलने से पौधों की वृद्धि तेजी से होती है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है।
यूरिया के छिड़काव का वैज्ञानिक तरीका और जरूरी सावधानियां
अक्सर देखा जाता है कि किसान अनजाने में यूरिया का छिड़काव पूरे खेत में एक समान रूप से कर देते हैं, जिससे खाद का एक बड़ा हिस्सा बर्बाद हो जाता है और पौधों को पूरा पोषण नहीं मिल पाता। इस समस्या से बचने के लिए डॉक्टर राजेश त्रिपाठी ने यूरिया देने का एक बेहद सटीक और वैज्ञानिक तरीका साझा किया है।
किसान भाइयों को यूरिया का छिड़काव करते समय निम्नलिखित विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- जड़ों के पास दें यूरिया: यूरिया को हमेशा मक्के के पौधे की जड़ के बिल्कुल करीब डालना चाहिए। चूंकि यह खाद पानी में अत्यधिक घुलनशील होती है, इसलिए जड़ें इसे आसानी से और पूरी तरह से सोख लेती हैं।
- पत्तियों पर न गिरने दें: यूरिया डालते समय इस बात की पूरी सावधानी बरतें कि खाद के दाने पौधे की नाजुक पत्तियों पर न गिरें। इसके साथ ही, पौधे के ठीक बीच वाले हिस्से यानी कोपल में भी यूरिया नहीं जाना चाहिए, अन्यथा पत्तियां जल सकती हैं और पौधे को नुकसान पहुंच सकता है।
- पौधे के अनुसार रखें ध्यान: प्रत्येक पौधे के पास जाकर सीमित मात्रा में यूरिया रखना सबसे उत्तम तरीका है। इससे खाद की बर्बादी रुकती है, मिट्टी के स्वास्थ्य पर भी कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता और पौधा भी अपनी जरूरत के मुताबिक पूरा पोषण आसानी से ग्रहण कर लेता है।
टॉप ड्रेसिंग का सही चक्र: कब करें दूसरी बार छिड़काव?
मक्के की फसल में पोषक तत्वों की कमी न हो, इसके लिए खाद देने के चक्र को सही ढंग से समझना आवश्यक है। डॉक्टर त्रिपाठी के अनुसार, यूरिया की पहली टॉप ड्रेसिंग जहां बुवाई के 20 से 25 दिन के भीतर की जाती है, वहीं इसके बाद अगला चरण भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
पहली टॉप ड्रेसिंग पूरी होने के बाद, किसानों को एक महीने के भीतर इसी वैज्ञानिक विधि को अपनाते हुए दूसरी बार यूरिया का छिड़काव करना चाहिए। इस दोहरे चरण की खुराक से मक्के के भुट्टों का आकार बड़ा होता है, दानों में चमक आती है और अंततः किसानों को अपनी मेहनत का पूरा फल बंपर पैदावार के रूप में मिलता है।
https://hindi.news18.com/news/agriculture/when-and-how-much-urea-to-apply-to-maize-experts-reveal-the-secret-formula-for-a-bumper-harvest-local18-10710782.html