समुद्र में भारत की बढ़ती ताकत से पाकिस्तान परेशान
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती सैन्य सामर्थ्य ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की धड़कनें बढ़ा दी हैं। भारतीय नौसेना के बेड़े में अत्याधुनिक राफेल-M यानी राफेल मरीन लड़ाकू विमानों को शामिल करने की प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, पाकिस्तान के रक्षा गलियारों में बेचैनी साफ देखी जा सकती है। पाकिस्तानी विश्लेषक अब खुलकर इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि भविष्य के समुद्री युद्ध में भारत का मुकाबला करना उनके लिए पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण होगा। भारतीय विमानवाहक पोत INS विक्रांत पर इन विमानों की तैनाती के बाद समुद्र में भारत की मारक क्षमता में भारी इजाफा होने की उम्मीद है।
चीनी J-10CE पर भारी पड़ेगा राफेल-M
पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में बड़े तामझाम के साथ चीन से 36 J-10CE मल्टीरोल लड़ाकू विमानों का सौदा किया था। अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान वायुसेना के पास फिलहाल 36 ऐसे विमान मौजूद हैं। हालांकि, भारत द्वारा फ्रांस से नौसेना के लिए अधिग्रहित किए जा रहे 26 राफेल-M विमानों ने इस समीकरण को बदल दिया है। राफेल-M विशेष रूप से एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भरने और नौसैनिक युद्ध की जटिल चुनौतियों को हल करने के लिए डिजाइन किया गया है। पाकिस्तानी रक्षा विशेषज्ञों का यह स्पष्ट मानना है कि तकनीकी श्रेष्ठता, हथियारों की रेंज और नेटवर्क पर आधारित युद्ध क्षमता में राफेल-M, चीन के J-10CE विमानों को पीछे छोड़ देगा। यद्यपि युद्ध के परिणाम केवल हथियारों पर निर्भर नहीं करते, लेकिन राफेल की क्षमताओं को देखते हुए पाकिस्तान में डर का माहौल व्याप्त है।
कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की बहुस्तरीय मारक क्षमता
भारत की असली सामरिक शक्ति केवल 4.5 जेनरेशन के राफेल-M विमान नहीं हैं, बल्कि उनके साथ चलने वाला पूरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (CSG) है। एक भारतीय CSG में विमानवाहक पोत के अतिरिक्त अत्याधुनिक विध्वंसक जहाज, फ्रिगेट, घातक पनडुब्बियां और बेड़े को सहायता देने वाले अन्य जहाज शामिल होते हैं। इसमें लंबी दूरी के रडार, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और बहुस्तरीय वायु रक्षा नेटवर्क का अभेद्य कवच होता है। विशाखापत्तनम क्लास और कोलकाता क्लास के विध्वंसक जहाज इस युद्धक समूह को दुश्मनों की नजरों और हमलों से बचाते हैं। इनके एयर डिफेंस सिस्टम दुश्मन के लड़ाकू विमानों, ड्रोन और एंटी-शिप मिसाइलों को मीलों दूर से पहचानने और नष्ट करने में सक्षम हैं।
Meteor मिसाइल की घातक मार
राफेल-M की सबसे बड़ी ताकत उसकी Meteor बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) एयर-टू-एयर मिसाइल है। इस मिसाइल की तकनीक दुश्मन के लड़ाकू विमानों को उनकी दृश्य सीमा में आने से पहले ही ढेर करने की क्षमता रखती है। युद्ध जैसी स्थिति में राफेल-M विमान वाहक पोत के इर्द-गिर्द सुरक्षा की पहली परत के रूप में तैनात होंगे, जबकि उसके नीचे मौजूद युद्धपोत दूसरी और तीसरी सुरक्षा कवच बनाएंगे। यही कारण है कि भारतीय कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को हिंद महासागर में एक अभेद्य किला माना जाता है।
स्वदेशी दिशा में भारत का भविष्य
भारत की रणनीतिक सोच सिर्फ विदेशी विमानों पर निर्भर रहने की नहीं है। नौसेना के लिए स्वदेशी ट्विन इंजन डेक आधारित फाइटर (TEDBF) कार्यक्रम पर भी युद्धस्तर पर काम चल रहा है। भविष्य में ये विमान मौजूदा MiG-29K बेड़े का स्थान लेंगे और आत्मनिर्भर भारत की मिसाल बनेंगे। साथ ही, भारत तीसरे और पहले से अधिक विशाल विमानवाहक पोत के निर्माण की योजनाओं पर भी विचार कर रहा है। यदि यह परियोजना धरातल पर उतरती है, तो हिंद महासागर में भारत का दबदबा और अधिक सुनिश्चित हो जाएगा।
पाकिस्तान की चिंता के मुख्य कारण
पाकिस्तानी रक्षा जानकारों का कहना है कि भारतीय नौसेना अब केवल तटों की रक्षा तक सीमित नहीं है। आधुनिक युद्धपोतों, विमान वाहकों, लंबी दूरी की मिसाइलों और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर की बदौलत भारतीय नौसेना तेजी से एक ब्लू वॉटर नेवी के रूप में अपनी धाक जमा रही है। यही कारण है कि पाकिस्तान में इस बात पर बहस छिड़ी है कि हिंद महासागर का शक्ति संतुलन अब पूरी तरह से भारत के पक्ष में झुक गया है। INS विक्रांत पर राफेल-M की तैनाती को इसी दिशा में एक निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिससे पाकिस्तान को अपनी समुद्री सुरक्षा और भविष्य की युद्ध योजनाओं पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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