कठोर कानून की राष्ट्रपति से मिली मुहर
परीक्षाओं में धांधली और प्रश्नपत्र लीक करने वाले माफियाओं के खिलाफ भारत सरकार ने अपनी कमर कस ली है। पेपर लीक विरोधी कानून में संशोधन से संबंधित विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपनी औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण कदम के साथ ही देश में एक कड़े कानूनी ढांचे का उदय हुआ है, जिसका उद्देश्य भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। यह संशोधन विधेयक हाल ही में राज्यसभा से पारित होने के बाद कानून का रूप ले चुका है।
शिक्षा मंत्री का बड़ा बयान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस कानून की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा है कि यह विधेयक केवल एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि पेपर लीक के पूरे नेटवर्क को जड़ से मिटाने का एक ठोस प्रयास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल से परीक्षा प्रणाली में विश्वसनीयता और निष्पक्षता फिर से बहाल होगी। इससे पहले लोकसभा में भारी हंगामे के बीच इस बिल को मंजूरी मिली थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि अब परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों से निपटने के लिए एक अत्यधिक सख्त कानूनी ढांचा तैयार है, जो त्वरित अदालती कार्यवाही और बेहतर जांच तंत्र के माध्यम से काम करेगा।
नए कानून की प्रमुख विशेषताएं
सरकार द्वारा लाए गए इस संशोधित कानून में कई कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं, जो पेपर लीक करने वालों की कमर तोड़ देंगे। इसके मुख्य बिंदुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है:
- फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन: हर राज्य में अब विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का निर्माण होगा। इन अदालतों में रोजाना सुनवाई होगी और किसी भी मामले का ट्रायल 90 दिन के भीतर पूरा करके सजा का ऐलान करना अनिवार्य होगा।
- बढ़ी हुई सजा: साल 2024 के कानून में जहां 3 से 5 साल तक की सजा का प्रावधान था, उसे अब संशोधित कर 5 से 10 साल तक की कठोर कारावास की सजा में बदल दिया गया है।
- जुर्माने में भारी बढ़ोतरी: आर्थिक दंड को भी कई गुना बढ़ा दिया गया है। पहले जहां पेपर लीक के मामलों में 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगता था, अब वह राशि बढ़कर 10 करोड़ रुपये तक कर दी गई है।
- जांच में तेजी: अब तक पेपर लीक की जांच में कोई निश्चित समय सीमा नहीं थी, लेकिन नए संशोधन में यह अनिवार्य कर दिया गया है कि जांच एजेंसी को अधिकतम 2 महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करनी होगी।
- स्पेशल टास्क फोर्स का गठन: पहले इन संवेदनशील मामलों की जांच केंद्रीय जांच एजेंसियों के भरोसे थी, लेकिन अब मामले की गंभीरता को देखते हुए इसके लिए एक समर्पित स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा, जो विशेष रूप से पेपर लीक से जुड़ी साजिशों की तह तक जाएगी।
यह कानून परीक्षा देने वाले लाखों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि भविष्य में किसी भी स्तर पर परीक्षा की पवित्रता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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