बकरियों का अनोखा स्वभाव और ऊंचाई से लगाव
बिहार जैसे राज्यों में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। गाय और भैंस के साथ-साथ अब बड़ी संख्या में लोग बकरी पालन की ओर रुख कर रहे हैं। बकरी पालन का व्यवसाय अब तेजी से विस्तार ले रहा है और सरकार भी नई योजनाओं के माध्यम से इसे बढ़ावा दे रही है। हालांकि, जो लोग इस क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, उन्हें बकरियों के व्यवहार और उनकी जरूरतों को बारीकी से समझना होगा। आपने अक्सर देखा होगा कि बकरियां हमेशा किसी ऊंची जगह या टीले पर बैठना पसंद करती हैं। क्या आपने कभी गौर किया है कि इसके पीछे का वास्तविक कारण क्या है? जहानाबाद जिला पशुपालन कार्यालय में तैनात सहायक कुक्कुट पदाधिकारी डॉ. प्रकाश चंद्र हिमांशु ने इस संबंध में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारियां साझा की हैं।
शिकारियों से सुरक्षा और ऊंचाई का महत्व
बकरियों के ऊंचाई पर बैठने की मुख्य वजह उनकी प्राकृतिक प्रवृत्ति है। डॉ. प्रकाश चंद्र हिमांशु बताते हैं कि बकरी हमेशा ऐसी जगह चुनती है जहां से उसे चारों तरफ का नज़ारा साफ दिखाई दे। यह ऊंचाई उसे उसके संभावित शिकारियों को दूर से ही पहचानने में मदद करती है। ऊंचे स्थान पर रहने से बकरी को खुद को सुरक्षित महसूस करने में आसानी होती है। इसके अलावा, एक शाकाहारी जीव होने के नाते, ऊंचाई पर होने से उन्हें आसपास की झाड़ियों और पेड़ों की पत्तियां खाने में भी अधिक सुविधा होती है। अपनी सुरक्षा और भोजन की सुगमता के कारण ही बकरियां मैदानी या गीले इलाकों के बजाय ऊंचाई वाले स्थानों पर डेरा डालना पसंद करती हैं।
बरसात के मौसम में विशेष सावधानी की आवश्यकता
मौजूदा बरसात का मौसम बकरियों की सेहत के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है। इस मौसम में नमी और कीचड़ के कारण बकरियों को गीली जगहों से बचाना अनिवार्य है। यदि बकरियां लगातार गीले वातावरण में रहती हैं या भीगती हैं, तो उनमें फंगल संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। डॉ. हिमांशु के अनुसार, पशुपालकों को बकरियों के रहने के लिए हमेशा सूखी और साफ जगह का प्रबंध करना चाहिए। उन्हें गीली जमीन पर बैठने से रोकने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना आवश्यक है। बरसात के दौरान बकरियों में निमोनिया, फंगल इन्फेक्शन और अन्य मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने की संभावना बनी रहती है।
खान-पान और स्वास्थ्य का ध्यान
बरसात के दिनों में बकरियों के आहार में भी बदलाव करना जरूरी है। केवल हरा चारा देना उनकी सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है, क्योंकि इसमें कीड़े या परजीवी हो सकते हैं। डॉ. हिमांशु की सलाह है कि बकरियों को हमेशा हरा चारा देने के साथ-साथ कुछ सूखा चारा भी खिलाना चाहिए, ताकि कीड़ों से होने वाले जोखिम को कम किया जा सके। इसके अलावा, पानी की शुद्धता पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। साफ और स्वच्छ पानी न मिलने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर पशुपालक न केवल बकरियों को बीमारियों से बचा सकते हैं, बल्कि अपने व्यवसाय को भी सुरक्षित और लाभदायक बना सकते हैं। मौसम के बदलते मिजाज के साथ बकरियों की देखभाल की तकनीक में बदलाव लाना ही एक सफल पशुपालक की पहचान है।
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