छत्तीसगढ़: मोबाइल की तरह अब सरकारी दफ्तरों में होगा बिजली रिचार्ज, 1 अगस्त से लागू होगी नई व्यवस्था

छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने विभागों पर बिजली बिल के बढ़ते बोझ को नियंत्रित करने के लिए प्रीपेड बिजली मीटर सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया है, जिससे करीब डेढ़ लाख सरकारी कनेक्शन जुड़ेंगे।

सरकारी दफ्तरों में बिजली के लिए अब प्रीपेड मॉडल

छत्तीसगढ़ में सरकारी कामकाज की कार्यप्रणाली में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब सरकारी दफ्तरों में बिजली का उपयोग ठीक उसी तरह होगा जैसे हम अपने मोबाइल फोन को रिचार्ज करके कॉलिंग या डेटा का इस्तेमाल करते हैं। राज्य के सरकारी दफ्तरों पर बिजली बिल के भारी-भरकम बकाये को खत्म करने के उद्देश्य से सरकार ने 1 अगस्त से पूरे प्रदेश में प्रीपेड बिजली सिस्टम लागू करने का फैसला किया है। इस नई नीति के तहत, अब दफ्तरों में लाइट तभी जलेगी जब बिजली का मीटर पहले से रिचार्ज किया जाएगा।

क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत

पिछले कुछ समय से राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा बिजली बिलों का समय पर भुगतान न करने की समस्या लगातार बनी हुई थी। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि सरकारी कार्यालयों पर बिजली बिलों का बकाया आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मई माह तक सरकारी विभागों पर लगभग 3,500 करोड़ रुपये का बकाया था। इसमें जून और जुलाई के महीनों के बिलों को जोड़ दिया जाए, तो यह राशि बढ़कर करीब 4,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाने का अनुमान है। इस बढ़ते आर्थिक संकट को देखते हुए बिजली कंपनी ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रीपेड मोड को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है।

तीन महीने का एडवांस भुगतान अनिवार्य

नई व्यवस्था के तहत विभागों को बिजली आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए एडवांस भुगतान करना होगा। बिजली कंपनी के नियमों के अनुसार, प्रत्येक विभाग को अपने तीन महीने के औसत बिजली बिल के बराबर की राशि का अग्रिम भुगतान जुलाई के अंत तक जमा करना होगा। यदि खाते में जमा राशि खत्म हो जाती है, तो बिजली की आपूर्ति स्वतः बंद हो जाएगी। इसके बाद बिजली की निरंतर सप्लाई पूरी तरह से एडवांस रिचार्ज पर ही निर्भर करेगी।

पुराने बकाया और योजना का विस्तार

बिजली कंपनी ने स्पष्ट किया है कि 1 अगस्त से शुरू होने वाली यह व्यवस्था केवल भविष्य के उपभोग पर लागू होगी। जुलाई महीने तक के पुराने बकाये को नई व्यवस्था से अलग रखा गया है। सरकार ने यह आश्वासन दिया है कि पुराने बकाये का भुगतान किस्तों में चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि शुरुआत में इस योजना को केवल ब्लॉक स्तर के 45,000 कनेक्शनों तक ही सीमित रखने की योजना थी, लेकिन बाद में इसकी व्यापकता को बढ़ाते हुए प्रदेश भर के लगभग डेढ़ लाख सरकारी बिजली कनेक्शनों को इसमें शामिल कर लिया गया है।

प्रबंधन के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति

इस नई तकनीकी व्यवस्था को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए बिजली कंपनी ने विशेष तैयारियां की हैं। हर विभाग के लिए अलग-अलग समूह बनाए गए हैं और प्रत्येक विभाग को एक विशेष कोड दिया गया है ताकि भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। इसके अलावा, समन्वय और भुगतान की देखरेख के लिए नोडल अधिकारी भी तैनात किए गए हैं। जिला स्तर पर हर विभाग के पिछले बिजली उपभोग का विश्लेषण कर उनकी एडवांस राशि तय की जा रही है। CSPDCL के प्रबंध निदेशक भीम सिंह कंवर ने बताया कि सभी विभागों को आवश्यक कोड उपलब्ध करा दिए गए हैं। तय समय सीमा के भीतर एडवांस राशि जमा होते ही 1 अगस्त से ये सभी कनेक्शन प्रीपेड मोड में सक्रिय हो जाएंगे।

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