दिल्ली के श्रीराम कॉलेज में नहीं मिला था दाखिला, अब बिहार के निखिल को लंदन में मिला 75 लाख रुपये का पैकेज

बिहार के भोजपुर के रहने वाले निखिल सिंह को लंदन में 75 लाख रुपये का सालाना पैकेज मिला है। तीन साल पहले दिल्ली के प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज में दाखिला न मिलने के बाद उन्होंने विदेश जाकर पढ़ाई करने का फैसला किया था।

कहते हैं कि अगर एक रास्ता बंद हो जाए, तो किस्मत कई नए और बेहतर रास्ते खोल देती है। बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले निखिल सिंह की कहानी इस बात का सबसे बड़ा और ताजा उदाहरण है। महज तीन साल पहले जिस छात्र को दिल्ली के मशहूर श्रीराम कॉलेज में दाखिला नहीं मिल पाया था, आज उसी छात्र ने विदेशी धरती पर अपनी कामयाबी का परचम लहरा दिया है। निखिल सिंह को लंदन में 75 लाख रुपये का सालाना जॉब पैकेज मिला है। इस बड़ी कामयाबी के बाद न सिर्फ उनके परिवार में बल्कि पूरे इलाके में खुशी का माहौल है।

रॉयल हॉलोवे, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से की पढ़ाई

बिहार के जाने-माने व्यवसायी अजय सिंह के बेटे निखिल सिंह ने लंदन की प्रतिष्ठित रॉयल हॉलोवे, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से अपनी पढ़ाई पूरी की है। उन्होंने वहां से बिजनेस और कंप्यूटर साइंस विषय में स्नातक (ग्रेजुएशन) की डिग्री हासिल की है। पढ़ाई पूरी होते ही उन्हें एक बड़ी कंपनी की तरफ से 75 लाख रुपये के सालाना वेतन का शानदार जॉब ऑफर मिला है।

निखिल की इस बड़ी सफलता पर उनके पिता अजय सिंह की खुशी का ठिकाना नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक बेहद भावुक पोस्ट लिखकर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि उनका बेटा बहुत अच्छे अंकों के साथ पास हुआ है और उसे लंदन में ही नौकरी मिल गई है। अजय सिंह के मुताबिक, यह सिर्फ निखिल की सफलता नहीं है, बल्कि यह उनके पूरे परिवार के वर्षों के कड़े संघर्ष, त्याग और मेहनत का नतीजा है।

श्रीराम कॉलेज में नहीं मिला था दाखिला, आंसू बहाकर लौटे थे पिता

अजय सिंह ने अपनी पोस्ट में उस दौर को भी याद किया जब वे अपने बेटे के बेहतर भविष्य के लिए परेशान थे। उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले वे निखिल का एडमिशन दिल्ली के बेहद प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज में कराने की पूरी कोशिश कर रहे थे। लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी निखिल को वहां दाखिला नहीं मिल सका। इस असफलता से निराश होने के बजाय उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया और बेटे को आगे की पढ़ाई के लिए लंदन भेजने का मन बना लिया।

पिता ने उस भावुक पल को याद करते हुए लिखा कि नवंबर 2023 में जब वे अपने बेटे को लंदन के हॉस्टल में अकेले छोड़कर वापस भारत लौट रहे थे, तो उनकी आंखों में आंसू थे। एक अनजान और नए देश में अपने बेटे को अकेला छोड़ते हुए उनका मन तरह-तरह की चिंताओं से घिरा हुआ था। उन्हें डर था कि उनका बेटा वहां कैसे तालमेल बिठा पाएगा। लेकिन आज निखिल ने अपनी मेहनत से उनके सारे डरों को दूर कर दिया है और पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

'लंदन से पढ़ के आइल बाड़ का?' - ताने को सच में बदला

अजय सिंह ने अपने बीते दिनों को याद करते हुए बिहार की ग्रामीण संस्कृति और संघर्षों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वे मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के एक बेहद छोटे से गांव बखोरापुर के रहने वाले हैं। उनके बचपन के दिन काफी तंगी में गुजरे थे। उन्होंने खुद गांव के स्कूल में जमीन पर बोरा बिछाकर पढ़ाई की थी।

उन्होंने बताया कि उनके गांव में एक पुरानी कहावत या ताना हुआ करता था। अगर गांव का कोई व्यक्ति थोड़ी बहुत अंग्रेजी या अच्छी हिंदी बोल लेता था, तो लोग उसका मजाक उड़ाते हुए भोजपुरी में कहते थे, 'लंदन से पढ़ के आइल बाड़ का?' यानी क्या लंदन से पढ़कर आए हो? अजय सिंह ने कहा कि आज वे बेहद गर्व के साथ दुनिया के सामने यह कह सकते हैं कि हां, उनका बेटा लंदन से ही पढ़कर आया है। उन्होंने उस पुराने तानें को अपनी मेहनत की बदौलत हकीकत में बदल दिया है।

40 रुपये की मजदूरी से तय किया कामयाबी का सफर

अजय सिंह ने अपने खुद के जीवन के संघर्ष को साझा करते हुए बताया कि वे एक साधारण किसान के बेटे हैं। उनके जीवन की शुरुआत बेहद कठिन परिस्थितियों में हुई थी, जहां उन्होंने महज 40 रुपये की दैनिक मजदूरी पर काम करना शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने लगभग 20 वर्षों तक कड़ा संघर्ष किया, दिन-रात ईमानदारी से मेहनत की और धीरे-धीरे व्यवसाय के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।

उन्होंने कहा कि उनकी इसी ईमानदारी की कमाई और लगातार किए गए संघर्ष का परिणाम है कि आज उन्हें अपने बेटे को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक में पढ़ाने का मौका मिला। अजय सिंह का मानना है कि किसी भी माता-पिता के लिए इससे बड़ी खुशी और कोई नहीं हो सकती। अपने बच्चों को एक बेहतर और अच्छी शिक्षा देना ही किसी भी माता-पिता की जीवन की सबसे बड़ी सफलता और उनका सबसे बड़ा निवेश है।

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