पाली: होटल में जूठे बर्तन धोने को मजबूर लाचार लाभूराम की बदली किस्मत, दिव्यांग सेवा संस्थान ने अपनाया

पाली के हाईवे पर बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रहे मंदबुद्धि लाभूराम देवासी को एक समाजसेवी संस्था ने नया जीवन दिया है। अब उन्हें न केवल रहने का ठिकाना मिला है, बल्कि उन्हें परिवार जैसा अपनापन भी मिल रहा है।

सड़कों पर लाचारी का जीवन जी रहे थे लाभूराम

राजस्थान के पाली जिले से एक बेहद भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है। हाईवे किनारे स्थित होटलों पर दूसरों के जूठे बर्तन धोने और बचा-खुचा खाना खाकर अपनी भूख मिटाने वाले मंदबुद्धि लाभूराम देवासी का जीवन अब पूरी तरह से बदल गया है। जो इंसान वर्षों तक बेसहारा सड़कों पर ठोकर खाने को मजबूर था, उसे अब एक सुरक्षित छत और अपनों जैसा सहारा मिल गया है। यह बदलाव पाली स्थित दिव्यांग सेवा संस्थान की मदद से संभव हुआ है, जिसने एक लाचार व्यक्ति की सुध ली है।

संस्थान के अध्यक्ष ने की मदद

इस पूरी घटना की शुरुआत तब हुई जब दिव्यांग सेवा संस्थान के अध्यक्ष झालाराम देवासी जोयला एक हाईवे होटल पर रुके थे। वहीं पर उनकी नजर लाभूराम पर पड़ी, जो बेहद दयनीय हालत में होटल के जूठे बर्तन साफ करने में जुटे थे। झालाराम देवासी ने जब उस व्यक्ति के पास जाकर उनका हाल जानना चाहा, तो लाभूराम ने जो आपबीती सुनाई, वह किसी का भी दिल पसीजने के लिए काफी थी। रोते हुए लाभूराम ने बताया कि वह पाली जिले के खोड़ गांव के मूल निवासी हैं और कई साल पहले अपने परिवार से बिछड़ गए थे। तब से वह सड़क पर भटकने और लावारिस जीवन जीने को अभिशप्त थे।

नई जिंदगी की नई शुरुआत

लाभूराम की दर्द भरी दास्तान सुनकर झालाराम देवासी ने तुरंत उन्हें अपने साथ ले जाने का निर्णय लिया। वे उन्हें अपनी गाड़ी में बिठाकर सीधा दिव्यांग सेवा संस्थान ले आए। संस्थान में पहुंचते ही लाभूराम के जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। वहां के माहौल में कदम रखते ही लाभूराम को बरसों बाद सुरक्षा और सुकून का अहसास हुआ। संस्थान के लोगों ने उन्हें पराया नहीं समझा, बल्कि परिवार के एक सदस्य की तरह उनका स्वागत किया। उन्हें सबसे पहले भरपेट पौष्टिक भोजन खिलाया गया, जिसके लिए वह लंबे समय से तरस रहे थे।

स्वच्छता और सम्मान के साथ बदलाव

संस्थान में केवल भोजन ही नहीं दिया गया, बल्कि उनकी साफ-सफाई और स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखा गया। झालाराम देवासी ने खुद अपने हाथों से लाभूराम को नहलाया, उनके बाल काटे और शेविंग बनाकर उन्हें बिल्कुल नया रूप दिया। स्वच्छता के बाद लाभूराम के चेहरे पर एक ऐसी नई चमक नजर आई, जो यह साबित कर रही थी कि इंसानियत के सहारे किसी की खोई हुई मुस्कान वापस लाई जा सकती है। अब लाभूराम को संस्थान में न केवल सुरक्षित आश्रय मिला है, बल्कि उन्हें बेहतर उपचार और अपनों जैसा प्यार भी मिल रहा है।

समाज सेवा में मिसाल बना संस्थान

दिव्यांग सेवा संस्थान के अध्यक्ष झालाराम देवासी लंबे समय से ऐसे बेसहारा, लाचार और अपनों से बिछड़े लोगों की सेवा में जुटे हैं। उनके इस नेक काम की बदौलत समाज के कई ऐसे लोग जो अंधेरे में खो चुके थे, उन्हें फिर से एक नई जिंदगी मिली है। लाभूराम के मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अगर समाज में सहानुभूति और सेवा भाव हो, तो किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति की जिंदगी बदली जा सकती है। लाभूराम अब सम्मान के साथ एक बेहतर जीवन जीने के लिए तैयार हैं और उन्हें इस बात की खुशी है कि अब वह अकेले नहीं हैं।

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