साइबर अपराध का बड़ा नेटवर्क ध्वस्त
मुंबई पुलिस के डीबी मार्ग थाने ने एक बेहद शातिर अपराधी को गिरफ्तार किया है, जो साइबर ठगों के लिए तकनीकी हथियार यानी फर्जी APK फाइलें तैयार करता था। पुलिस की गिरफ्त में आए इस आरोपी का काम साइबर अपराधियों को ऐसी फाइलें उपलब्ध कराना था, जिनके जरिए वे आम लोगों के बैंक खातों में सेंध लगा सकें। पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने हैरान कर देने वाले खुलासे किए हैं। उसने अब तक कुल 92 APK फाइलें साइबर जालसाजों को बेची हैं और 967 फाइलें बनाकर बिक्री के लिए तैयार रखी थीं। इन तैयार फाइलों के लिए वह नए खरीदारों की तलाश कर रहा था।
63 करोड़ की धोखाधड़ी का सच
डीसीपी राजसुधा आर. के अनुसार, आरोपी द्वारा बेची गई 92 APK फाइलों का इस्तेमाल करके साइबर अपराधियों ने देश भर में करीब 63 करोड़ रुपये की चपत लगाई है। इन फाइलों के माध्यम से हुए अपराधों को लेकर देशभर के विभिन्न थानों में कुल 2,993 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 512 शिकायतें केवल मुंबई और महाराष्ट्र राज्य से संबंधित हैं। पुलिस का मानना है कि यदि आरोपी अपने बाकी स्टॉक यानी 967 APK फाइलों को बेचने में सफल हो जाता, तो यह आंकड़ा 100 करोड़ रुपये के पार जा सकता था।
डेटा की तस्करी और बिक्री का खेल
जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के पास से 37,200 लोगों का निजी और बैंकिंग डेटा भी मिला है। यह डेटा वह उन साइबर ठगों को बेचता था, जो इसके जरिए लोगों को अपना शिकार बनाते थे। आरोपी हर एक APK फाइल को 15,000 से 20,000 रुपये में बेचता था। सुरक्षा के नाम पर वह हर फाइल का पूरा कंट्रोल खरीदार को देता था ताकि उस फाइल का दुरुपयोग कोई दूसरा न कर सके। साथ ही, प्रत्येक फाइल की कार्यक्षमता या वैधता 40 से 45 दिनों तक सीमित रखी जाती थी।
कैसे काम करता था यह जाल
ये ठग लोग आम जनता को निशाना बनाने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन और डर का सहारा लेते थे। पीड़ित को फर्जी लिंक भेजकर गैस बिल बकाया होने, आरटीओ चालान लंबित होने या बिजली बिल जैसी समस्याओं का बहाना बनाया जाता था। जैसे ही यूजर उस लिंक पर क्लिक कर APK फाइल डाउनलोड करता था, उसका मोबाइल फोन और बैंकिंग ऐप सीधे साइबर ठगों के नियंत्रण में आ जाते थे। दक्षिण मुंबई में एक व्यक्ति के साथ इसी तरह 70,000 रुपये की ठगी हुई थी, जिसकी जांच ने पुलिस को इस तकनीकी अपराधी तक पहुँचा दिया।
गिरिडीह से बंगाल तक का सफर
पुलिस ने इस मामले में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया। मूल रूप से झारखंड के गिरिडीह का रहने वाला यह आरोपी काफी शिक्षित है और उसने विज्ञान विषय में स्नातक की पढ़ाई की है। आईटी के क्षेत्र में गहरी समझ रखने के कारण उसने अपराध का यह काला रास्ता चुना। फिलहाल पुलिस उन साइबर अपराधियों की पहचान करने में जुटी है, जिन्होंने इस आरोपी से फाइलें खरीदी थीं। देशभर में APK फाइल के जरिए बढ़ती ठगी के मामलों में यह गिरफ्तारी मुंबई पुलिस की एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
https://www.indiatv.in/maharashtra/man-arrested-for-creating-and-selling-apk-files-to-scammers-from-west-bengal-by-mumbai-police-2026-07-29-1234164