छात्र आंदोलन के नाम पर हिंसा का अंत
छात्र आंदोलन की आड़ में हुई हालिया हिंसा और उपद्रव के बाद अब स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि कानून व्यवस्था को अपने हाथ में लेने वालों पर कार्रवाई किसी भी कीमत पर नहीं रुकेगी। जिन लोगों ने इस आंदोलन को ढाल बनाकर अराजकता फैलाई और पुलिस के साथ मारपीट की, उनका कानूनी तौर पर हिसाब किया जाएगा। यह स्पष्ट हो चुका है कि दंगा करने वालों और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ ठोस कानूनी कार्रवाई तय है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और उपद्रवियों के लिए झटका
पिछले कुछ दिनों से एक वर्ग द्वारा यह भ्रामक माहौल बनाया जा रहा था कि सरकार उपद्रवियों के सामने झुक गई है और उन पर कोई केस दर्ज नहीं होगा। असम, बिहार, बंगाल और महाराष्ट्र के उदाहरण देकर यह दावा किया गया कि केस वापस ले लिए जाएंगे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेशों ने इन दावों की हवा निकाल दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं नाबालिगों को फौरन रिहा किया जा सकता है, जिनका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। इसके अलावा, प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
डिजिटल सबूतों के आधार पर होगी सख्त कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस और जांच एजेंसियों को प्रदर्शन स्थल पर मौजूद सभी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज, ड्रोन फुटेज और अन्य डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने का कड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर पुलिस ने कहीं बल का अनुचित प्रयोग किया है तो उसकी भी जांच होगी, लेकिन प्रदर्शनकारियों द्वारा की गई ज्यादती पर भी कानून सख्त रहेगा। उपद्रवियों की पहचान के लिए फेस रिकगनिशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिस पर कुछ नेताओं ने निजता के हनन का आरोप लगाया है, लेकिन जब पीएम को गालियां दी जा रही थीं, तब निजता का कोई प्रश्न नहीं उठाया गया था।
कॉकरोच पार्टी का दोहरा चरित्र और फेक न्यूज का जाल
आंदोलन की आड़ में काम करने वाली एक विशेष पार्टी जिसे आम बोलचाल में लोग 'कॉकरोच पार्टी' कह रहे हैं, उसका असली चेहरा जनता के सामने आ गया है। इस पार्टी ने न केवल छात्रों को भड़काया बल्कि झूठ का सहारा लेकर माहौल खराब करने की कोशिश की। सोशल मीडिया पर एआई (AI) की मदद से बनाए गए फेक वीडियो फैलाए गए। इसमें वड़ा पाव गर्ल के नाम से चर्चित लड़की द्वारा केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का एक भ्रामक वीडियो साझा किया गया, जिसके बाद अब वह माफी मांग रही है।
पुलिस और सेना को गाली देने वाले अब मांग रहे माफी
आंदोलन के दौरान जेन जी (Gen-Z) के कई युवाओं ने अपना आपा खोकर पुलिस और भारतीय सेना के जवानों के लिए बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था। अब जब उन वीडियो के आधार पर कार्रवाई का दबाव बन रहा है, तो वही युवा कैमरे के सामने हाथ जोड़कर माफी मांगते दिख रहे हैं। दिल्ली पुलिस के जंतर मंतर वाले मामले में कई ऐसे अपराधी भी पाए गए हैं जिन पर हत्या, डकैती और पोक्सो (POCSO) जैसे गंभीर मामले पहले से दर्ज हैं। इन अपराधियों का छात्र आंदोलन से कोई सरोवार नहीं था।
केस वापसी की लंबी कानूनी प्रक्रिया
पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को वापस लेने की प्रक्रिया इतनी आसान नहीं है। जंतर मंतर हिंसा के संबंध में दर्ज बीस मामलों में से चौदह सीधे तौर पर हिंसा से जुड़े हैं। केस वापसी की प्रक्रिया में पुलिस पहले एक औपचारिक आदेश तैयार करती है, फिर इसे एलजी (LG) के पास भेजा जाता है, जिसके बाद ही कोर्ट में इसे बंद करने की अनुमति मांगी जाती है। हालांकि, पत्रकारों पर हुए हमलों के मामले किसी भी हाल में वापस नहीं लिए जाएंगे।
रिटायर्ड पुलिसकर्मियों में भारी आक्रोश
दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी इस पूरी हिंसा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वे 31 जुलाई को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं। रिटायर्ड गजटेड और नॉन गजटेड अधिकारी इस बात से बेहद नाराज हैं कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के सिर फोड़े गए और सरकारी गाड़ियां तोड़ी गईं। उन्होंने मांग की है कि उपद्रवियों पर किसी भी तरह की नरमी न बरती जाए और उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
निष्कर्ष: राजनीति और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़
यह आंदोलन अंततः राजनीति का एक खेल बनकर रह गया है। एक तरफ कॉकरोच पार्टी के लोग मीडिया के सामने लाइव इंटरव्यू देकर अपनी राजनीति चमकाने में लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ वे छात्र जिन्होंने इस बहकावे में आकर अपनी गरिमा खोई और कानून तोड़ा, वे अब पछता रहे हैं। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से शुरू हुआ यह खेल अब छात्रों के भविष्य की चिंता से कोसों दूर एक राजनीतिक तमाशा बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून किसी के दबाव या प्रोपेगेंडा के आगे नहीं झुकेगा।
https://hindi.news18.com/news/nation/sushant-sinha-desh-ki-paathshala-supreme-court-decision-student-protest-violence-gen-z-apology-cockroach-party-exposed-10698688.html