शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर कांग्रेस का तीखा प्रहार
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने नवनियुक्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी ने प्रल्हाद जोशी को सीधे तौर पर बलात्कारियों का बचाव करने वाला व्यक्ति करार दिया है। उन्होंने अपने कड़े शब्दों में प्रल्हाद जोशी को सबसे घिनौना आदमी तक कह दिया है। इससे पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी प्रल्हाद जोशी की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला था। प्रियंका गांधी का आरोप था कि प्रधानमंत्री ने ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी है, जिसने अतीत में एक गर्भवती महिला के साथ बलात्कार करने वाले दोषियों की रिहाई का समर्थन किया था और इस पर खुशी भी जाहिर की थी।
शिक्षा व्यवस्था की नैतिकता पर उठाए सवाल
संसद परिसर में मीडिया से मुखातिब होते हुए राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवा शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन इसके जवाब में भारतीय जनता पार्टी ने शिक्षा मंत्री के पद पर ऐसे व्यक्ति को बैठा दिया जो बलात्कारियों को सुरक्षा प्रदान करता है। राहुल गांधी ने कहा कि इस स्थिति से अधिक शर्मनाक और कुछ भी नहीं हो सकता कि जिस व्यक्ति का काम देश के युवाओं का भविष्य संवारना हो, वह बलात्कारियों के पक्ष में वकालत करता रहा हो। उन्होंने इसे देश की शिक्षा प्रणाली के लिए एक बड़ा संकट बताया।
संसद में प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर बवाल
लोकसभा के भीतर प्रियंका गांधी द्वारा प्रल्हाद जोशी के संबंध में दी गई टिप्पणियों पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रियंका गांधी पर संसद की गरिमा के खिलाफ जाकर अपमानजनक बयान देने का आरोप लगाया है। रिजिजू का कहना है कि ये टिप्पणियां किसी के चरित्र हनन के बराबर हैं। उन्होंने स्पीकर से मांग की कि इन शब्दों को संसद की कार्यवाही के आधिकारिक रिकॉर्ड से हटा दिया जाना चाहिए। किरेन रिजिजू ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि हम इस प्रकार की भाषा की उम्मीद किसी भी सांसद से नहीं करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रियंका गांधी को सदन में इस तरह की बयानबाजी के लिए माफी मांगनी चाहिए क्योंकि यह संसदीय मर्यादा के प्रतिकूल है।
छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सरकार से सवाल
प्रियंका गांधी ने संसद के दौरान 20 जुलाई को दिल्ली में हुए पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले और पेलेट गन का इस्तेमाल क्यों किया? प्रियंका ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि देश के युवाओं पर एके-47 और पेलेट गन चलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या वे सभी आतंकवादी थे? उन्होंने सरकार से जवाब मांगा कि आखिर पेलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था? क्या यह आदेश प्रधानमंत्री कार्यालय से आया था या फिर गृह मंत्री ने इसे मंजूरी दी थी? उन्होंने कहा कि यह केवल कांग्रेस की चिंता नहीं है, बल्कि पूरा देश इस पर जवाब चाहता है।
शिक्षा तंत्र की विफलता पर गंभीर आरोप
प्रियंका गांधी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भारत की संपूर्ण परीक्षा और शिक्षा प्रणाली पूरी तरह से विफल हो चुकी है। लगातार हो रहे पेपर लीक की घटनाओं ने छात्रों का भरोसा पूरी तरह से तोड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा प्रणाली में गंभीर खामियां पैदा हो गई हैं और परीक्षा तंत्र ने काम करना बंद कर दिया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा में धांधली और माफियाओं के खिलाफ कोई भी ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है। अब देखना यह है कि सरकार इन तीखे आरोपों और छात्रों से जुड़ी मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
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