CJP प्रदर्शन: सीमा पार से रची जा रही थी साजिश, 500 से अधिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर महाराष्ट्र साइबर की नजर

कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान महाराष्ट्र साइबर ने सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं और डीपफेक कंटेंट के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ा है। जांच में सामने आया है कि इस सुनियोजित दुष्प्रचार के पीछे पाकिस्तान और मध्य-पूर्वी देशों के असामाजिक तत्वों का हाथ था।

डिजिटल निगरानी और फोरेंसिक जांच का अभियान

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान उपजी स्थितियों को देखते हुए महाराष्ट्र साइबर ने एक विशेष तकनीकी निगरानी अभियान शुरू किया था। इस अभियान के तहत ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। साथ ही मेटाडेटा की गहन जांच, ऑनलाइन व्यवहार का विश्लेषण और सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे एआई-जनरेटेड और डीपफेक कंटेंट की फोरेंसिक पड़ताल की गई ताकि गलत सूचनाओं के तंत्र को तोड़ा जा सके।

भ्रामक नैरेटिव और एआई का गलत इस्तेमाल

जांच के दौरान महाराष्ट्र साइबर ने सोशल मीडिया अकाउंट्स के एक ऐसे बड़े और सुनियोजित नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसका एकमात्र उद्देश्य गलत और भ्रामक जानकारी फैलाना था। ये अकाउंट्स मुख्य रूप से एआई-जनरेटेड सामग्री का उपयोग कर रहे थे। इनका मकसद आम लोगों की राय को गलत दिशा देना, समाज में भ्रम फैलाना और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़कर अशांति पैदा करना था। तकनीकी विश्लेषण से यह गंभीर बात सामने आई है कि इस दुष्प्रचार में भारत की सीमा के बाहर से, खासकर पाकिस्तान और कुछ मध्य-पूर्वी देशों से काम कर रहे असामाजिक तत्व सक्रिय रूप से जुड़े थे। ये तत्व भारतीय दर्शकों को विशेष रूप से अपना निशाना बना रहे थे।

429 आपत्तिजनक पोस्ट और हैंडल की पहचान

महाराष्ट्र साइबर ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। सोशल मीडिया मध्यस्थों के साथ समन्वय करके आपत्तिजनक सामग्री को हटाने का काम भी जारी है। निगरानी अभियान के दायरे में इंस्टाग्राम, X, Facebook और YouTube जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म आए हैं, जहाँ से कुल 429 आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट और हैंडल की पहचान की गई है।

विदेशों से संचालित हो रहे थे 100 अकाउंट्स

इस पूरे ऑपरेशन की तकनीकी जांच के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। करीब 100 अकाउंट्स ऐसे पाए गए हैं जो सीधे तौर पर भारत की सीमाओं के बाहर से संचालित हो रहे थे। इसके अलावा, महाराष्ट्र साइबर के अत्याधुनिक ऑडियो-वीडियो फोरेंसिक टूल का उपयोग करके यह पुष्टि की गई कि 140 से अधिक पोस्ट और प्रोफाइल में एआई-जनरेटेड या एआई-सहायता प्राप्त सामग्री का इस्तेमाल किया गया था।

हेरफेर किए गए वीडियो और सिंथेटिक मीडिया

तकनीकी जांच से यह खुलासा हुआ है कि एआई का उपयोग भीड़ के दृश्यों को डिजिटल रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए किया गया। इसके अलावा, सिंथेटिक आवाजें बनाने, ऑडियो को क्लोन करने और सार्वजनिक हस्तियों के वीडियो से छेड़छाड़ करके उन्हें गलत संदर्भ में पेश करने का काम भी किया गया।

नागरिकों से सतर्क रहने की अपील

महाराष्ट्र साइबर ने सभी नागरिकों से विशेष अपील की है कि वे किसी भी संवेदनशील घटना से जुड़ी जानकारी साझा करने से पहले पूरी सावधानी बरतें। विभाग ने 'रुकें, जांचें और जिम्मेदारी से साझा करें' का मंत्र दिया है। किसी भी मैसेज, फोटो या वीडियो को फॉरवर्ड करने से पहले सरकारी स्रोतों या भरोसेमंद समाचार माध्यमों से उसकी सत्यता की जांच जरूर करें ताकि सार्वजनिक शांति और सद्भाव बना रहे।

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