बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में हाल ही में हुए छात्र आंदोलन के दौरान जमकर हंगामा और तोड़फोड़ देखने को मिली थी। इस उग्र प्रदर्शन के बाद अब मुजफ्फरपुर पुलिस पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रही है। पुलिस प्रशासन केवल जमीन पर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर भी पैनी नजर रख रहा है। इस हिंसक विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई तोड़फोड़ और भड़काऊ पोस्ट साझा करने वालों के खिलाफ पुलिस ने अपनी जांच की रफ्तार तेज कर दी है। इसी कड़ी में मुजफ्फरपुर की साइबर थाना पुलिस ने अब तक कुल 9 ऐसे ब्लॉगर और यूट्यूबर को चिह्नित किया है, जो सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को भड़काने और अशांति फैलाने का काम कर रहे थे।
साइबर पुलिस के निशाने पर आए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर
मुजफ्फरपुर पुलिस के अनुसार, गुरुवार को बंद समर्थकों के प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर हंगामा हुआ था। इस दौरान सोशल मीडिया पर कई तरह के आपत्तिजनक और माहौल बिगाड़ने वाले वीडियो और संदेश तेजी से साझा किए जा रहे थे। इस गंभीर मामले को देखते हुए साइबर थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने अब तक ऐसे 9 ब्लॉगर और यूट्यूबर को चिन्हित किया है, जिनके अकाउंट्स से प्रदर्शन से जुड़े भड़काऊ संदेश, अभद्र भाषा और शांति भंग करने वाली सामग्री प्रसारित की गई थी। इन सोशल मीडिया अकाउंट्स की गतिविधियों की गहनता से जांच की जा रही है और पुलिस द्वारा तमाम डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित किया जा रहा है। इसके साथ ही इन संदिग्ध वीडियो और पोस्ट का बारीकी से तकनीकी विश्लेषण भी किया जा रहा है।
सिटी एसपी ने दी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
इस पूरे मामले पर मुजफ्फरपुर के सिटी एसपी मोहिल्बुला अंसारी ने विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर नजर रखने के लिए पुलिस की विशेष टीम काम कर रही है। सिटी एसपी मोहिल्बुला अंसारी ने स्पष्ट किया कि सभी संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट्स और उनके द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो की गहन डिजिटल जांच की जा रही है। जांच टीम इस मामले में सभी आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस जांच में किसी भी व्यक्ति की भूमिका कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने या लोगों को हिंसा के लिए भड़काने में पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत बेहद सख्त और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस किसी भी दोषी को बख्शने के मूड में नहीं है।
CCTV और वीडियो फुटेज से हो रही उपद्रवियों की पहचान
छात्र आंदोलन के दौरान केवल सोशल मीडिया पर ही नहीं, बल्कि सड़कों पर भी भारी अराजकता फैलाई गई थी। इस हिंसक प्रदर्शन के दौरान सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया गया था और कई जगह तोड़फोड़ की घटनाएं हुई थीं। इस मामले को लेकर पुलिस ने पहले ही कड़ा रुख अपना रखा है। नगर थाना में इस तोड़फोड़ और उपद्रव के मामले में 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी पहले ही दर्ज की जा चुकी है। अब पुलिस प्रशासन इन अज्ञात उपद्रवियों की पहचान स्थापित करने के लिए आधुनिक डिजिटल माध्यमों का सहारा ले रहा है। शहर के विभिन्न हिस्सों में लगे CCTV कैमरों के फुटेज, प्रदर्शन के दौरान की गई वीडियो रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रही तस्वीरों के जरिए दंगाइयों और पत्थरबाजों को चिह्नित करने का काम तेजी से किया जा रहा है।
अफवाहबाजों को पुलिस की सख्त चेतावनी
मुजफ्फरपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने आम जनता और युवाओं से सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग करने की अपील की है। पुलिस ने लोगों से आग्रह किया है कि वे इंटरनेट पर किसी भी प्रकार की अपुष्ट, भ्रामक या भड़काऊ सामग्री को आगे न बढ़ाएं और न ही साझा करें। सोशल मीडिया पर फैलाई जाने वाली अफवाहें समाज की शांति को भंग कर सकती हैं। पुलिस ने चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश करेगा या सोशल मीडिया के जरिए किसी भी तरह की अफवाह फैलाएगा, उसके खिलाफ साइबर कानून और अन्य धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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