दीपक प्रकाश ने भविष्य को लेकर क्या कहा
बिहार सरकार में पंचायती राज विभाग संभाल रहे मंत्री दीपक प्रकाश इस समय खासी चर्चा में हैं। हाल ही में आयोजित 'डायमंड स्टेट्स समिट बिहार' कार्यक्रम के दौरान जब उनसे यह सवाल किया गया कि वह कब तक मंत्री पद पर बने रहेंगे, तो उन्होंने बड़ी बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कब तक अपनी कुर्सी पर रहेंगे, यह उनके खुद के अधिकार क्षेत्र का विषय बिल्कुल नहीं है।
मंत्री ने अपने संबोधन में आगे कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी मिली है, वह एनडीए गठबंधन के शीर्ष नेताओं के आशीर्वाद और विश्वास का परिणाम है। उनके अनुसार, आगे की कार्ययोजना और उनके राजनीतिक भविष्य का निर्धारण गठबंधन का नेतृत्व ही करेगा। जब उनसे आगामी महीनों में चुनाव लड़ने के विषय पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कोई ठोस जवाब देने के बजाय इसे जल्दबाजी बताया। उन्होंने दोहराया कि भविष्य से जुड़े तमाम निर्णय गठबंधन की सहमति और दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही लिए जाएंगे।
पंचायत चुनाव और परिसीमन की स्थिति
पंचायत चुनावों को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में दीपक प्रकाश ने कहा कि बिहार में आगामी पंचायत चुनाव दिसंबर महीने में प्रस्तावित किए गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया शुरू होने से पहले राज्य में परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सरकार का पूरा ध्यान इन सभी तकनीकी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करने पर है ताकि चुनाव सुचारू रूप से संपन्न कराए जा सकें।
सुप्रीम कोर्ट में फंसी है पेचीदगी
मंत्री दीपक प्रकाश का पद वर्तमान में एक गंभीर कानूनी विवाद में उलझा हुआ है। उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें उनकी मंत्री पद पर नियुक्ति की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि मंत्री महोदय न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के।
संविधान के अनुच्छेद 164(4) का हवाला देते हुए याचिका में सवाल उठाया गया है कि क्या बिना सदन का सदस्य बने किसी व्यक्ति को बार-बार मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। याचिका के अनुसार, दीपक प्रकाश ने पहली बार 20 नवंबर 2025 को मंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद कैबिनेट के इस्तीफे के उपरांत 7 मई 2026 को उन्होंने पुनः मंत्री पद की शपथ ग्रहण की। याचिकाकर्ता का आरोप है कि संविधान के तहत मिलने वाली छह महीने की छूट की अवधि दोबारा शुरू नहीं हो सकती, इसलिए उनका पद पर बने रहना असंवैधानिक है। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार सरकार, दीपक प्रकाश और चुनाव आयोग से अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है, जिस पर अंतिम निर्णय आना शेष है।
कौन हैं दीपक प्रकाश
दीपक प्रकाश की राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो वे आरएलएम प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं। उनके मंत्री बनने के पीछे की कहानी यह है कि उन्होंने सरकार में शामिल होने से पहले कोई भी चुनावी जीत हासिल नहीं की थी। बावजूद इसके, उन्हें बिहार कैबिनेट में जगह दी गई। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे बिना विधायक या एमएलसी बने संवैधानिक छूट का लाभ किस सीमा तक ले सकते हैं। हाल ही में संपन्न हुए एमएलसी चुनावों में भी उन्हें उम्मीदवारी का अवसर प्राप्त नहीं हुआ था, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य पर सवालिया निशान और गहरे हो गए हैं। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले और एनडीए नेतृत्व की अगली रणनीति पर टिकी हुई हैं।
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