शिवपुरी किले से चोरी हुई ऐतिहासिक तोप का राजस्थान से संबंध
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित ऐतिहासिक नरवर गढ़ किले से लगभग 400 साल पुरानी और 3.5 टन वजनी प्राचीन तोप चोरी होने के मामले ने पुलिस जांच में एक नया मोड़ लिया है। इस चोरी की कड़ियां अब राजस्थान के करौली जिले से जुड़ गई हैं। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पुलिस की टीमें सक्रिय हो गई हैं और मामले की गहराई से तहकीकात की जा रही है।
हिण्डौन में दबिश और आरोपियों की गिरफ्तारी
जांच के क्रम में पुलिस टीम हिण्डौन सदर थाना क्षेत्र के गांवड़ा मीणा गांव तक पहुंची। यहां से पुलिस ने टिम्मू राम मीणा और अमन मीणा नामक दो व्यक्तियों को हिरासत में लिया है। इन दोनों से पूछताछ करने के लिए पुलिस उन्हें अपने साथ मध्य प्रदेश के शिवपुरी ले गई है। तलाशी के दौरान पुलिस ने एक पिकअप वाहन भी जब्त किया है। फिलहाल, सुरक्षा बलों ने पूरे गांवड़ा मीणा इलाके को एक तरह से छावनी में बदल दिया है और जेसीबी मशीनों के माध्यम से चिन्हित संदिग्ध स्थानों पर खुदाई का कार्य जारी है ताकि तोप का पता लगाया जा सके।
क्या था पूरी घटना का घटनाक्रम
यह पूरा मामला 15 जुलाई की रात का है, जब नरवर किले के कचहरी महल से इस भारी-भरकम प्राचीन तोप को चोरी कर लिया गया था। हालांकि, इसकी जानकारी 17 जुलाई को तब सामने आई जब किले के चौकीदार रमेश कोली ने नरवर थाने में चोरी का औपचारिक मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस की साइबर सेल ने तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल लोकेशन के जरिए जांच की, जिसमें संकेत मिला कि संदिग्ध करौली के गांवड़ा मीणा इलाके में छिपे हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस ने आपसी समन्वय स्थापित करते हुए संयुक्त रूप से इस गोपनीय अभियान को शुरू किया।
- 15-16 जुलाई की रात को कचहरी महल से तोप चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया।
- 17 जुलाई को चौकीदार रमेश कोली द्वारा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।
- चोरी हुई तोप सिंधिया रियासत काल की बताई जा रही है, जिसका वजन 3 से 3.5 टन के बीच है।
- अंतरराष्ट्रीय एंटीक बाजार में इस प्राचीन कलाकृति की कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
- तोप पर सिंधिया रियासत का राजचिह्न उकेरा हुआ है।
- धातु पर देवनागरी और फारसी भाषा में दुर्लभ ऐतिहासिक अभिलेख और जानकारी दर्ज है।
अंतरराष्ट्रीय तस्करी के एंगल पर जांच
जांच एजेंसियां इसे महज एक साधारण चोरी नहीं मान रही हैं। इस मामले के अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्करी गिरोह से जुड़े होने की प्रबल आशंका है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या कोई बड़ा नेटवर्क इस चोरी के पीछे सक्रिय है जो ऐतिहासिक धरोहरों को अवैध रूप से बाजार में बेचने की फिराक में था। संवेदनशील मामलों को ध्यान में रखते हुए पुलिस हर पहलू पर बारीकी से काम कर रही है।
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