ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी क्यों? PG रेजिडेंट को 84 हजार तो गांव में सेवा देने पर मिलते हैं सिर्फ 59 हजार रुपये, JDA ने उठाया मुद्दा

मध्य प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को लेकर JDA ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मुलाकात की और मानदेय में विसंगतियों को इसका मुख्य कारण बताया है।

भोपाल: मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है। इस गंभीर समस्या और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बेहद अहम बैठक की है। इस बैठक में डॉक्टरों की ग्रामीण इलाकों में पोस्टिंग के दौरान मिलने वाले मानदेय में सुधार और PG रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में क्यों नहीं जाना चाहते डॉक्टर?

JDA ने सरकार के सामने स्पष्ट किया है कि विशेषज्ञ डॉक्टर ग्रामीण इलाकों में सेवा देने से कतराते क्यों हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेज में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे जूनियर डॉक्टरों के प्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य आयुक्त धनराजू एस से मुलाकात की। डॉक्टरों ने अधिकारियों को बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बॉन्ड के तहत काम करने वाले डॉक्टरों को सीनियर रेजिडेंसी की तुलना में हर महीने 25,000 रुपये कम मिलते हैं। यही बड़ा अंतर है जिसके कारण डॉक्टर गांवों का रुख करने से बचते हैं।

स्टाइपेंड का पूरा गणित

एसोसिएशन ने बैठक के दौरान अलग-अलग स्तर पर मिलने वाले स्टाइपेंड का पूरा ब्यौरा पेश किया और इसमें समानता लाने की मांग की। डॉक्टरों को मिलने वाले स्टाइपेंड के आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • PG रेजिडेंट डॉक्टरों को वर्तमान समय में लगभग 84,000 रुपये मिलते हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में बॉन्ड पर सेवा देने वाले डॉक्टरों को केवल 59,000 रुपये दिए जाते हैं।
  • सीनियर रेजिडेंसी के दौरान डॉक्टरों को करीब 88,000 रुपये का स्टाइपेंड मिलता है।

JDA का कहना है कि इन सभी श्रेणियों में मिलने वाले स्टाइपेंड को तर्कसंगत और बराबर किया जाना चाहिए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में जाने के लिए डॉक्टरों को वित्तीय नुकसान न उठाना पड़े।

मांगों को लेकर बाइक रैली और विरोध प्रदर्शन

अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से उठाने के लिए डॉक्टरों ने एक विशाल बाइक रैली का भी आयोजन किया। इस रैली में लगभग 400 मेडिकल स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि वर्तमान में मिलने वाले 14,337 रुपये के स्टाइपेंड को बढ़ाकर सीधे 30,000 रुपये किया जाए।

डॉक्टरों का स्पष्ट मानना है कि कम मानदेय और वेतन विसंगतियों की वजह से ही विशेषज्ञ ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए तैयार नहीं होते हैं। इस कमी का सीधा असर ग्रामीण इलाकों के गरीब मरीजों और वहां की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए डॉक्टरों को सम्मानजनक मानदेय दिया जाना बेहद जरूरी है।

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