साउथ चाइना सी में बढ़ा तनाव
साउथ चाइना सी में चीन और फिलीपींस के बीच चल रहा समुद्री विवाद एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर आ गया है। शुक्रवार को दोनों देशों के जहाज विवादित स्कारबोरो शोल के पास आमने-सामने आ गए। चीनी कोस्ट गार्ड ने फिलीपींस के सरकारी जहाजों को निशाना बनाते हुए उन पर वाटर कैनन से जोरदार प्रहार किया। गौरतलब है कि इस घटना के दौरान अमेरिकी मीडिया नेटवर्क CNN की टीम भी उसी फिलीपीनी जहाज पर मौजूद थी जिस पर हमला हुआ। पिछले सात दिनों के भीतर यह तीसरी बार है जब दोनों देशों के बीच समुद्र में सीधी भिड़ंत हुई है। इस निरंतर बढ़ते टकराव ने इस पूरे क्षेत्र में किसी बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका को और अधिक बढ़ा दिया है।
15 चीनी जहाजों ने घेरा
फिलीपींस के आधिकारिक बयान के अनुसार, उनका सरकारी जहाज स्कारबोरो शोल के समीप के इलाके में स्थानीय मछुआरों की मदद के लिए ईंधन और अन्य जरूरी सामग्री पहुँचाने के मिशन पर था। जैसे ही जहाज उस विवादित समुद्री क्षेत्र के पास पहुंचा, चीन के कोस्ट गार्ड और वहां मौजूद तथाकथित ‘मैरीटाइम मिलिशिया’ के करीब 15 जहाजों ने उसे पूरी तरह घेर लिया। चीनी अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से चेतावनी जारी करते हुए फिलीपीनी जहाज को तत्काल क्षेत्र से बाहर निकलने का आदेश दिया। इसके बाद चीनी जहाजों ने बार-बार वाटर कैनन का उपयोग किया। फिलीपींस का आरोप है कि एक चीनी जहाज उसके पोत के इतना करीब आ गया था कि दोनों के बीच की दूरी महज 7 मीटर रह गई थी, जिससे भीषण टक्कर होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया। इस पूरे मिशन में फिलीपींस के 10 जहाज और एक सरकारी विमान शामिल थे।
एक हफ्ते में तीसरी बड़ी घटना
दोनों देशों के बीच हालात तेजी से खराब हो रहे हैं। इसी सप्ताह सोमवार को सेकेंड थॉमस शोल के पास दोनों पक्षों के सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प देखने को मिली थी। फिलीपींस ने चीन पर आरोप लगाया है कि चीनी कर्मियों ने जानबूझकर उनकी नाव को टक्कर मारी और डंडों से हमला किया, जिसमें फिलीपींस के 2 सैनिक घायल भी हो गए। इस घटना के बाद गुरुवार को भी चीन ने फिलीपींस के जहाजों को रोकने के प्रयास में वाटर कैनन का ही सहारा लिया था।
क्यों महत्वपूर्ण है स्कारबोरो शोल
स्कारबोरो शोल दिखने में भले ही एक छोटा और निर्जन रीफ नजर आता हो, लेकिन भू-राजनीतिक और सामरिक दृष्टिकोण से इसका अत्यधिक महत्व है। साउथ चाइना सी में स्थित यह क्षेत्र दुनिया के समुद्री व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा संभालता है। चीन, फिलीपींस और ताइवान तीनों ही इस इलाके पर अपने मालिकाना हक का दावा करते रहे हैं। हालांकि वर्ष 2016 में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत ने चीन के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया था, लेकिन बीजिंग आज भी उस अंतरराष्ट्रीय फैसले को मानने से इनकार करता है।
अमेरिका का रुख
इस ताजा समुद्री घटनाक्रम पर अमेरिका ने भी गहरी चिंता जाहिर की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका अपने सहयोगी देश फिलीपींस के साथ मजबूती से खड़ा है। दोनों देशों के बीच एक रक्षा संधि प्रभावी है, जिसके प्रावधानों के तहत किसी भी बड़े सैन्य हमले की स्थिति में अमेरिका, फिलीपींस को सुरक्षा सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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