बांग्लादेश: राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने दिया इस्तीफा, शेख हसीना से बातचीत के बाद बढ़ा था विवाद

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से दो साल पहले ही पद छोड़ दिया है। स्वास्थ्य कारणों के अलावा, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से संपर्क बनाए रखने को उनके इस्तीफे की मुख्य वजह माना जा रहा है।

राष्ट्रपति पद से मोहम्मद शहाबुद्दीन की विदाई

बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। शुक्रवार को देश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। गौर करने वाली बात यह है कि उनका पांच साल का आधिकारिक कार्यकाल अभी बाकी था और वे अपना कार्यकाल पूरा होने से लगभग दो साल पहले ही सत्ता से बाहर हो गए हैं। आधिकारिक तौर पर उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद को अपना त्यागपत्र सौंपा है। हालांकि, सियासी गलियारों में चर्चा है कि सरकार उनके कार्यकाल को लेकर काफी समय से असहज थी।

शेख हसीना से संपर्क बना इस्तीफे का कारण

शहाबुद्दीन के अचानक इस्तीफे के पीछे की सबसे बड़ी वजह पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ उनके कथित संबंध बताए जा रहे हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो वर्तमान सरकार इस बात से बेहद नाराज थी कि राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने हाल ही में शेख हसीना से फिर से संपर्क साधने का प्रयास किया था। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब शेख हसीना ने खुद घोषणा की थी कि वे दिसंबर के महीने में बांग्लादेश लौटेंगी और वॉर क्राइम्स ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद आत्मसमर्पण करेंगी। शहाबुद्दीन लंबे समय तक शेख हसीना के सहयोगी रहे हैं और वे अवामी लीग के टिकट पर चुनाव लड़कर ही इस पद तक पहुंचे थे। वर्ष 2023 में वे निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गए थे। जब 2024 में हुए बड़े विद्रोह के बाद शेख हसीना को भारत भागना पड़ा था, तब भी शहाबुद्दीन अवामी लीग सरकार का आखिरी चेहरा थे जो संवैधानिक पद पर बने हुए थे।

संसद के स्पीकर निभाएंगे कार्यवाहक भूमिका

राष्ट्रपति का पद खाली होने के बाद अब बांग्लादेश के संविधान के अनुसार कार्यवाही शुरू कर दी गई है। संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद अब कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में देश का कामकाज संभालेंगे। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक कि देश में नए राष्ट्रपति का चुनाव नहीं हो जाता। बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 54 में यह स्पष्ट प्रावधान है कि यदि राष्ट्रपति का पद किसी भी कारण से रिक्त हो जाए या राष्ट्रपति अपने दायित्वों का निर्वहन करने में सक्षम न हों, तो स्पीकर ही कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर जिम्मेदारी का निर्वहन करते हैं।

शेख हसीना को सुनाई गई है सजा-ए-मौत

उल्लेखनीय है कि शेख हसीना से जुड़े कानूनी मामले भी काफी गंभीर हैं। पिछले साल नवंबर महीने में बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने अपना फैसला सुनाया था। ट्रिब्यूनल ने वर्ष 2024 के छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और दमन में भूमिका के लिए शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। इसी माहौल के बीच राष्ट्रपति का इस्तीफा बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति में एक नया मोड़ लेकर आया है।

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