उत्तराखंड में मानसून फिर हुआ सक्रिय
उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से मानसून की सक्रियता में थोड़ी कमी दर्ज की गई थी, लेकिन अब मौसम विभाग ने एक बार फिर प्रदेश के निवासियों और यात्रियों को सावधान रहने की चेतावनी दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, 24 जुलाई से राज्य भर में मानसून का नया और तीव्र दौर शुरू होने वाला है। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बादलों की गड़गड़ाहट और तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश होने की प्रबल संभावना है। विभाग ने खास तौर पर देहरादून और नैनीताल जैसे संवेदनशील मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में भी मौसम का मिजाज काफी चुनौतीपूर्ण रहने की आशंका है।
मौसम विभाग की चेतावनी और प्रशासन की तैयारी
मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि 24 जुलाई से आने वाले कई दिनों तक उत्तराखंड में मानसून का प्रभाव काफी अधिक रहेगा। केवल चुनिंदा जिलों तक सीमित न रहकर, राज्य के लगभग सभी क्षेत्रों में मेघगर्जन और आकाशीय बिजली चमकने के साथ तीव्र बारिश की संभावना जताई गई है। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश में मानसून की गतिविधियां भले ही थोड़ी कमजोर रही हों, लेकिन मुक्तेश्वर, मसूरी और रुड़की जैसे स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाओं ने संकेत दे दिए थे कि मानसून फिर से रफ्तार पकड़ने को तैयार है। प्रशासन ने इस चेतावनी के मद्देनजर पूरे राज्य में अलर्ट जारी कर दिया है, ताकि किसी भी अनहोनी से निपटा जा सके और आम जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सके।
देहरादून, नैनीताल और पर्वतीय जिलों की स्थिति
मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार, 24 जुलाई को उत्तराखंड के देहरादून, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की प्रबल संभावना बनी हुई है। पर्वतीय क्षेत्रों में बादलों के तेज गर्जन के साथ आकाशीय बिजली गिरने और मूसलाधार बारिश होने से पहाड़ी रास्तों पर सफर करना जोखिम भरा हो सकता है। प्रशासन की ओर से विशेष रूप से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए परामर्श जारी किया गया है कि वे बेहद सावधानी बरतें, क्योंकि अचानक होने वाली बारिश से पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन और चट्टानें गिरने का खतरा पैदा हो गया है।
मैदानी इलाकों में मानसून का असर
उत्तराखंड के मैदानी जनपदों, विशेषकर हरिद्वार, रुड़की और उधम सिंह नगर (जिसमें काशीपुर और रुद्रपुर शामिल हैं) में भी मौसम के तीखे तेवर देखने को मिलेंगे। इन इलाकों में भी कहीं-कहीं आकाशीय बिजली चमकने और हल्की से मध्यम बारिश की बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है। तापमान के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले दिनों रुड़की में अधिकतम तापमान 34.5°C दर्ज किया गया था, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक था। हालांकि, आज होने वाली बारिश के बाद मैदानी इलाकों के तापमान में गिरावट आएगी, जिससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस से तो राहत मिलेगी, लेकिन निचले इलाकों में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
हिल स्टेशनों और पर्यटन स्थलों का हाल
पहाड़ी पर्यटन स्थलों जैसे मसूरी, नैनीताल, रानीखेत और मुक्तेश्वर में मौसम काफी सुहावना होने के साथ-साथ अब चुनौतीपूर्ण भी हो गया है। मुक्तेश्वर में न्यूनतम तापमान 15.5°C रिकॉर्ड किया गया, जो कि प्रदेश में सबसे कम रहा। वहीं, मुक्तेश्वर और उसके आसपास के क्षेत्रों में 44 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं दर्ज की गई हैं। मसूरी और नैनीताल में दिनभर बादल छाए रहने और घना कोहरा रहने का पूर्वानुमान है, जिसके साथ गरज-चमक वाली बारिश भी होगी। हिल स्टेशनों पर जाने वाले वाहन चालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे गाड़ी धीमी गति से चलाएं और सुरक्षा के लिए फॉग लाइट का अनिवार्य उपयोग करें।
आगामी दिनों का मौसम पूर्वानुमान (25 से 29 जुलाई)
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तराखंड को मानसून से फिलहाल राहत मिलने के कोई आसार नहीं हैं और पूरे हफ्ते राज्य में मानसून की सक्रियता बनी रहेगी:
- 25 जुलाई: देहरादून, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी और नैनीताल में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
- 26 जुलाई: उत्तरकाशी, देहरादून और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की आशंका है।
- 27 से 29 जुलाई: 27 जुलाई को बागेश्वर जिले में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चम्पावत और पिथौरागढ़ में मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।
इस प्रकार पूरे सप्ताह मानसून की स्थिति उत्तराखंड के अधिकांश जिलों में सक्रिय बनी रहेगी, जिससे तापमान में निरंतर गिरावट और बारिश का दौर जारी रहेगा।
संभावित खतरों से बचने के उपाय
मौसम विभाग ने भारी बारिश के चलते कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए हैं, जिनका पालन करना अत्यंत आवश्यक है। भारी बारिश से पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं होने और चट्टानें गिरने का खतरा बना रहता है। दूसरी ओर, मैदानी इलाकों में जलभराव और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। साथ ही, तेज हवाओं के चलने से पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति के बाधित होने की पूरी संभावना है। निवासियों और पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वे जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें, कमजोर मकानों से बचें और बिजली कड़कते समय खुले मैदानों या पेड़ों के नीचे आश्रय लेने से परहेज करें। यात्रा पर जाने से पहले अपने गंतव्य के मौसम के अलर्ट को जांचना अब बेहद जरूरी हो गया है।
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