आजमगढ़ ने खोया अपना कद्दावर नेता
उत्तर प्रदेश की राजनीति से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट से 5 बार विधायक रहे आलमबदी आजमी का बुधवार रात निधन हो गया। वे काफी समय से अस्वस्थ थे, जिसके चलते उन्हें लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन की सूचना मिलते ही समर्थकों और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने इसे आजमगढ़ के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।
जीवन का सफर और राजनीति में आगमन
आलमबदी आजमी का जन्म 1936 में हुआ था। वे मूल रूप से आजमगढ़ के बिलरियागंज स्थित बिंदवल, जयराजपुर के रहने वाले थे, लेकिन बाद में वे शहर के माताबगंज स्थित अपने आवास पर रहने लगे थे। उन्होंने अपनी पढ़ाई मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पूरी की और गोरखपुर में कुछ समय तक नौकरी भी की। हालांकि, उनका मन समाजसेवा में ज्यादा था। वे महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस के विचारों से बेहद प्रभावित थे और इन्हीं आदर्शों से प्रेरित होकर उन्होंने राजनीति के क्षेत्र में कदम रखा।
विधानसभा में पांच बार प्रतिनिधित्व
आलमबदी आजमी ने चुनावी राजनीति में साल 1996 में अपनी पहली बड़ी जीत दर्ज की थी। समाजवादी पार्टी के टिकट पर उन्होंने निजामाबाद विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और पहली बार विधायक चुने गए। उनकी कार्यशैली और जनता से जुड़ाव इतना मजबूत था कि वे कुल 5 बार जनता द्वारा चुनकर विधानसभा पहुंचे। अपने पांच कार्यकालों के दौरान उन्होंने निजामाबाद क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई।
सादगी और सेवा का प्रतीक
वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि सादगी की मिसाल थे। उनकी जीवनशैली इतनी सरल थी कि वे बिना किसी तामझाम के लोगों के बीच रहते थे। उनका पहनावा सामान्य कुर्ता-पायजामा और चप्पल तक सीमित था। वे हमेशा एक साधारण कीपैड वाला मोबाइल इस्तेमाल करते थे और कान में सुनने वाली एक छोटी मशीन लगाते थे। उनके घर में कोई नौकर नहीं था, मेहमानों की सेवा उनके परिवार के सदस्य खुद करते थे। वे अक्सर टीन शेड के नीचे बैठकर जनसुनवाई करते थे और बिना दूध की चाय मेहमानों को परोसते थे। सादगी ही उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी ताकत थी।
मंत्री पद को किया था इनकार
साल 2012 में जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी, तो उन्हें मंत्री पद देने का प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन आलमबदी आजमी ने बड़ी विनम्रता से इसे ठुकरा दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि वे मंत्री बनकर नहीं, बल्कि एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में अपने क्षेत्र की जनता के बीच रहकर उनकी सेवा करना चाहते हैं। उनकी यह सादगी भरी ईमानदारी ही उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती थी। वे अपनी साफ-सुथरी और बेदाग राजनीति के लिए पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय रहे। विकास कार्यों में पारदर्शिता और जनता के प्रति समर्पित भाव ही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी।
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