संघर्षपूर्ण जीवन और बुढ़ापे की चिंता
फरीदाबाद जिले के बल्लभगढ़ स्थित ऊंचा गांव के रहने वाले 61 वर्षीय किसान कुंवर दास इस समय बेहद कठिन दौर से गुजर रहे हैं। जीवन के जिस पड़ाव पर व्यक्ति को विश्राम और मानसिक शांति की आवश्यकता होती है, वहां कुंवर दास के कंधे पर जिम्मेदारियों का बोझ अब भी बरकरार है। उनकी दिनचर्या आज भी सुबह साइकिल उठाकर मीलों दूर अपने खेतों तक जाने और वहां दिनभर कड़ी मेहनत करने से शुरू होती है। मौसम चाहे जैसा भी हो, चिलचिलाती धूप हो या मूसलाधार बारिश, उन्हें परिवार का पेट पालने के लिए अपने खेतों में पसीना बहाना ही पड़ता है। खेती से होने वाली सीमित कमाई इतनी कम है कि उससे किसी तरह घर का चूल्हा जल पाता है, लेकिन बुढ़ापे में बढ़ती शारीरिक कमजोरियों और आर्थिक तंगी ने उनकी चिंताओं को और अधिक बढ़ा दिया है।
फैमिली आईडी में गलत आय का पेंच
कुंवर दास के अनुसार, उन्होंने सरकारी बुढ़ापा पेंशन पाने के लिए हर संभव कोशिश की है, लेकिन तकनीकी बाधाएं उनके रास्ते की बड़ी दीवार बन गई हैं। उनका कहना है कि उनके पास पेंशन के लिए आवश्यक सभी कानूनी दस्तावेज उपलब्ध हैं, बावजूद इसके उन्हें लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस समस्या की मुख्य जड़ फैमिली आईडी में दर्ज गलत जानकारी है, जिसमें उनकी वार्षिक आय को आवश्यकता से अधिक दिखाया गया है। कुंवर दास का स्पष्ट कहना है कि उन्हें स्वयं भी इस बात की जानकारी नहीं है कि रिकॉर्ड में उनकी आय को कितना ज्यादा दर्शाया गया है, लेकिन इसी त्रुटि के कारण उन्हें पेंशन की पात्रता से वंचित रखा जा रहा है। उन्हें किसी अन्य रोजगार का सहारा नहीं है और उनकी एकमात्र आजीविका खेती ही है, जो अब मौसम की मार और गिरती पैदावार के कारण घाटे का सौदा साबित हो रही है।
रिश्वतखोरी का काला खेल
इस संघर्ष के बीच एक और हैरान करने वाली बात सामने आई है। कुंवर दास ने बताया कि उन्हें पेंशन शुरू करवाने के बदले रिश्वत देने के लिए भी मजबूर किया जा रहा है। गांव के ही कुछ लोगों ने उनसे संपर्क किया और पेंशन की फाइल को आगे बढ़ाने के लिए उनसे पहली तीन किस्तों की मांग की है। यह प्रस्ताव सुनकर वे न केवल स्तब्ध थे, बल्कि उन्हें बेहद दुख भी हुआ कि एक बुजुर्ग की मजबूरी का फायदा उठाने के लिए लोग इस स्तर तक गिर सकते हैं। कुंवर दास ने पूरी दृढ़ता के साथ इन भ्रष्ट तत्वों को कोई भी पैसा देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे मेहनत की कमाई किसी भी बिचौलिए की जेब में नहीं डालेंगे।
आगे की राह और सरकारी दफ्तर
अभी तक कुंवर दास इस मुद्दे को लेकर सीधे पेंशन कार्यालय नहीं गए थे, लेकिन अब उन्होंने मन बना लिया है कि वे अधिकारियों के सामने अपनी बात पूरी मजबूती से रखेंगे। उनका कहना है कि यदि उनके पास सभी वैध कागजात मौजूद हैं, तो फिर उन्हें पेंशन से वंचित क्यों रखा जा रहा है? उनकी बस इतनी ही मांग है कि सरकार और संबंधित विभाग उनकी पारिवारिक स्थिति का संज्ञान ले और उनकी पेंशन को जल्द से जल्द शुरू किया जाए ताकि उन्हें अपने जीवन के अंतिम वर्षों में आर्थिक सुरक्षा मिल सके। उनका मानना है कि यदि पेंशन सुचारू रूप से मिलने लगे, तो उन्हें रोजमर्रा के खर्चों की चिंता से काफी हद तक मुक्ति मिल जाएगी और वे सम्मानजनक तरीके से अपना जीवन व्यतीत कर सकेंगे।
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