साइबर अपराध की दुनिया का नया मास्टरमाइंड
देश भर में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच सूरत साइबर क्राइम सेल को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने कानपुर से एक ऐसे युवक को गिरफ्तार किया है, जिसकी उम्र जानकर हर कोई दंग रह गया है। 18 साल 6 महीने की उम्र और केवल 11वीं कक्षा तक की पढ़ाई करने वाला यह युवक पूरे देश में सक्रिय साइबर अपराधियों के लिए तकनीकी रीढ़ की हड्डी बना हुआ था। इस आरोपी ने अलग-अलग बैंकों और सरकारी सेवाओं के नाम पर 121 फर्जी एप्लीकेशन तैयार किए थे, जिनके जरिए देश भर में करोड़ों रुपयों की ठगी की गई। इसे देश का अब तक का सबसे बड़ा फेक बैंकिंग ऐप घोटाला माना जा रहा है।
शिकायत के बाद खुला पूरा खेल
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित ने नेशनल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर फोन करके धोखाधड़ी की सूचना दी। पीड़ित को व्हाट्सएप पर पीएनबी वन (PNB One.apk) नाम की एक फाइल भेजी गई थी, जो हुबहू पंजाब नेशनल बैंक के असली एप्लीकेशन जैसी दिख रही थी। धोखे में आकर पीड़ित ने उस फाइल को अपने फोन में इंस्टॉल कर लिया। फाइल इंस्टॉल होते ही उसका स्मार्टफोन पूरी तरह से हैकर्स के कब्जे में चला गया। साइबर अपराधियों ने पीड़ित के फोन से बैंक संबंधित सारी गोपनीय जानकारी चुरा ली और उसके प्राइम को-ऑपरेटिव बैंक अकाउंट से यूनियन बैंक खाते में करीब 3.50 लाख रुपये का अवैध ट्रांजैक्शन कर दिया।
पुलिस की 10 दिनों की सघन जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए सूरत साइबर क्राइम सेल ने मामला दर्ज किया और तकनीकी जांच शुरू की। पुलिस ने साइबर एक्सपर्ट्स और आईटी सलाहकारों की एक टीम बनाई जिसने करीब 10 दिनों तक उस हानिकारक पीएनबी वन ऐप का गहन विश्लेषण किया। डिजिटल सुरागों का पीछा करते हुए पुलिस अंततः उत्तर प्रदेश के कानपुर तक पहुंच गई। वहां के एक होटल से पुलिस ने रोहित वीरेंद्र सिंह शाक्य नाम के इस आरोपी को धर दबोचा। आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद टीम उसे सूरत ले आई, जहां उससे पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए।
16 साल की उम्र से शुरू किया था खेल
पुलिस पूछताछ में पता चला कि रोहित शाक्य मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के नगला पटवारियन गांव का रहने वाला है। हैरत की बात यह है कि वह महज 16 साल की उम्र से ही साइबर अपराधियों के लिए फर्जी एप्लीकेशन बनाने का काम कर रहा था। उसकी मुख्य भूमिका झारखंड के जामताड़ा और देश के अन्य हिस्सों में सक्रिय साइबर गैंग के लिए उनकी जरूरतों के हिसाब से बैंकिंग, सरकारी विभागों और निजी कंपनियों के नाम पर नकली ऐप तैयार करने की थी।
सब्सक्रिप्शन मॉडल पर आधारित व्यापार
रोहित शाक्य ने इस अवैध काम को एक प्रोफेशनल बिजनेस मॉडल का रूप दे रखा था। वह साइबर गैंग्स को मंथली सब्सक्रिप्शन के आधार पर ये एप्लीकेशन उपलब्ध कराता था। एक ऐप तैयार करने के लिए वह शुरुआत में 10 हजार से 15 हजार रुपये चार्ज करता था और बाद में हर महीने रिन्यूअल के नाम पर भी पैसे वसूलता था। उसने हर हमले के लिए दो तरह के ऐप बनाए थे, पहला पीड़ित के मोबाइल में इंस्टॉल करने के लिए और दूसरा गैंग के सदस्यों के लिए एडमिन एप्लीकेशन, जिसके जरिए वे पीड़ित के फोन का पूरा एक्सेस हासिल कर लेते थे।
121 एप्लीकेशन और देशभर में फैला जाल
पुलिस के डिजिटल एनालिसिस से पता चला है कि आरोपी ने अब तक कुल 121 अलग-अलग नकली एप्लीकेशन तैयार किए थे। इन ऐप्स का इस्तेमाल करके न केवल बैंकों, बल्कि सरकारी योजनाओं और कंपनियों के नाम पर लोगों को ठगा गया। इन एप्लीकेशनों में भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), आईसीआईसीआई बैंक, यूनियन बैंक, यूको बैंक, इंडसइंड बैंक, एचएसबीसी, बंधन बैंक, फेडरल बैंक जैसी बड़ी संस्थाओं के नाम शामिल थे। इसके अलावा आरटीओ चालान, आधार कार्ड, पीएम किसान योजना, डीमार्ट, बिग बास्केट, हॉस्पिटल, कस्टमर केयर और अमेरिकन एक्सप्रेस जैसे नाम भी जालसाजी के लिए इस्तेमाल किए गए।
ठगी के भयावह आंकड़े
इस घोटाले की जांच के दौरान जो आंकड़े सामने आए हैं, वे किसी को भी हैरान कर सकते हैं। कुल 121 एप्लीकेशन देश भर के 21,672 मोबाइल फोन में इंस्टॉल किए गए थे। इनमें से 2,928 मोबाइल पूरी तरह से हैक हो चुके थे। इन हैक्ड फोन्स के जरिए अब तक कुल 54,094 बैंक ट्रांजैक्शन किए गए हैं, जिनके माध्यम से कुल 64,38,48,837.60 रुपये यानी करीब 64.50 करोड़ रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया गया। पुलिस जांच के मुताबिक, सबसे ज्यादा नुकसान आरटीओ चालान के नाम पर बनाए गए फेक एप्लीकेशन से हुआ, जबकि एसबीआई और पीएनबी के नाम पर बने फर्जी ऐप का उपयोग दूसरे स्थान पर रहा।
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