रूस-यूक्रेन युद्ध की विभीषिका में यमुनानगर का लाल शहीद
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण युद्ध की आंच अब भारतीय परिवारों को झुलसाने लगी है। हाल ही में इस युद्ध क्षेत्र के समीप एक भारतीय जहाज पर हुए विनाशकारी मिसाइल हमले ने हरियाणा के यमुनानगर जिले के पंजेटो गांव के एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन ली हैं। इस दर्दनाक हमले में कुल चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई है, जिनमें यमुनानगर का इकलौता बेटा गुरप्रीत सिंह भी शामिल था। गुरप्रीत की मौत की खबर मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है और पीड़ित परिवार गहरे सदमे में है।
डेढ़ महीने पहले ही संजोए थे सुनहरे भविष्य के सपने
गुरप्रीत सिंह के पिता कीर्तन सिंह ने नम आंखों से बताया कि उनका बेटा केवल डेढ़ महीने पहले ही मर्चेंट नेवी में अपनी नई नौकरी पर गया था। पूरे परिवार को उम्मीद थी कि गुरप्रीत विदेश जाकर अच्छी कमाई करेगा, जिससे उनके घर की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और उनके दिन फिरेंगे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। नौकरी शुरू करने के मात्र डेढ़ महीने के भीतर ही इस दर्दनाक हादसे ने उनके सारे सपने चकनाचूर कर दिए। मर्चेंट नेवी में शामिल होने के बाद यह उनकी पहली बड़ी यात्रा थी, जो उनकी आखिरी यात्रा साबित हुई।
डेढ़ साल पहले हुई थी शादी, पीछे छूट गया छह महीने का मासूम
गुरप्रीत सिंह का पारिवारिक जीवन अभी शुरू ही हुआ था। उनकी शादी को महज डेढ़ साल का समय बीता था। घर में अभी शादी की शहनाइयों की गूंज पूरी तरह थमी भी नहीं थी कि मौत की इस खबर ने कोहराम मचा दिया। गुरप्रीत अपने पीछे अपनी पत्नी, एक बुजुर्ग मां और पिता के अलावा केवल छह महीने का एक मासूम बेटा छोड़ गए हैं। इस नन्हे बच्चे को तो अभी अपने पिता का चेहरा भी ठीक से याद नहीं होगा कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। गुरप्रीत की पत्नी और मां का रो-रोकर बुरा हाल है और वे बार-बार बेसुध हो रही हैं।
तीन साल पहले पिता के दिव्यांग होने से बढ़ा था जिम्मेदारी का बोझ
पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो करीब तीन साल पहले एक दर्दनाक सड़क हादसे में गुरप्रीत के पिता कीर्तन सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे और वे दिव्यांग हो गए थे। पिता के दिव्यांग होने के बाद से ही घर की पूरी आर्थिक जिम्मेदारी गुरप्रीत के कंधों पर आ गई थी। वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा और घर का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। पूरे परिवार का भरण-पोषण उसी की मर्चेंट नेवी की नौकरी पर निर्भर था। इस हादसे के बाद अब परिवार के सामने जीवन-यापन का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
२० जुलाई को हुआ था जानलेवा मिसाइल हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह भीषण मिसाइल हमला बीते 20 जुलाई को हुआ था, जब भारतीय जहाज युद्ध प्रभावित क्षेत्र के पास से गुजर रहा था। इस हमले ने न केवल गुरप्रीत बल्कि उनके साथ काम कर रहे तीन अन्य भारतीयों की भी जान ले ली। इस भयानक त्रासदी के बाद से पंजेटो गांव का हर नागरिक स्तब्ध है और पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि रोजी-रोटी कमाने के लिए सात समंदर पार गया गांव का एक होनहार युवक इस तरह तिरंगे में लिपटकर वापस लौटेगा।
पीड़ित परिवार ने केंद्र सरकार से लगाई न्याय की गुहार
इस दुखद घड़ी में गुरप्रीत सिंह के पिता कीर्तन सिंह और अन्य ग्रामीणों ने भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। पीड़ित परिवार ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
- गुरप्रीत सिंह का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत वापस लाया जाए ताकि परिवार पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर सके।
- युद्ध की विभीषिका में जान गंवाने वाले इस युवक के परिवार को उचित और पर्याप्त आर्थिक मुआवजा दिया जाए ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
- घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य की मौत के बाद, परिवार के किसी एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
अब पूरे यमुनानगर जिले और पंजेटो गांव की निगाहें केंद्र सरकार की ओर टिकी हुई हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार इस पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द न्याय और संबल प्रदान करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
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