मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर से एक बेहद ही हैरान करने वाला और अनोखा मामला सामने आया है, जिसकी चर्चा पूरे सोशल मीडिया पर जोरों से हो रही है। देश के सबसे स्वच्छ शहर में स्वच्छता अभियान तो हमेशा ही खबरों में रहता है, लेकिन इस बार यहां नगर निगम का एक खास सर्च ऑपरेशन लोगों के बीच कौतूहल का विषय बन गया है। राजेंद्र नगर इलाके में रहने वाले एक परिवार की छोटी सी लापरवाही के बाद नगर निगम के करीब 20 कर्मचारियों को दिन-रात एक करना पड़ा। दरअसल, इस पूरे खोजी अभियान का मुख्य उद्देश्य किसी अपराधी को पकड़ना या किसी हथियार को जब्त करना नहीं था, बल्कि कचरे के ढेर में गुम हुए करीब 2 किलो वजनी एक कीमती चांदी के लोटे को ढूंढ निकालना था। इस अनोखे खोजी अभियान को सोशल मीडिया पर अब 'ऑपरेशन लोटा' का नाम दिया जा रहा है।
भूलवश कचरा गाड़ी में चला गया कीमती लोटा
राजेंद्र नगर क्षेत्र के निवासी एक परिवार से यह बड़ी चूक तब हुई जब वे अपने घर की साफ-सफाई कर रहे थे। सफाई के दौरान अनजाने में उनका लगभग 2 किलो वजनी चांदी का कीमती लोटा घरेलू सूखे-गीले कचरे के साथ नगर निगम के कचरा संग्रहण वाहन में चला गया। कुछ समय बीतने के बाद जब परिवार को अपनी इस भारी भूल का अहसास हुआ, तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने बिना कोई वक्त गंवाए तुरंत इंदौर नगर निगम के अधिकारियों से संपर्क साधा और पूरी घटना की जानकारी देते हुए मदद की गुहार लगाई।
जीपीएस ट्रैकिंग और ट्रेंचिंग ग्राउंड का सफर
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इंदौर नगर निगम प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया। अधिकारियों ने बिना किसी देरी के कचरा गाड़ी में लगे जीपीएस सिस्टम की मदद से उसका पूरा रूट ट्रैक किया। इससे यह साफ हो गया कि संबंधित कचरा गाड़ी किस समय किस रास्ते से गुजरी थी और उसने कचरा कहां खाली किया था। इसके बाद देवगुराड़िया स्थित उस ट्रेंचिंग ग्राउंड की पहचान की गई जहां उस गाड़ी का कचरा गिराया गया था। निगम ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया, जिसमें करीब 20 सफाई कर्मचारी और अधिकारी शामिल थे। इसके साथ ही कचरे के बड़े ढेरों को पलटने के लिए जेसीबी मशीनों को भी काम पर लगाया गया।
24 घंटे की मशक्कत और मिली सफलता
ट्रेंचिंग ग्राउंड पर सैकड़ों टन कचरे के विशाल पहाड़ों के बीच उस छोटे से चांदी के लोटे को ढूंढना भूसे के ढेर में सुई खोजने जैसा कठिन काम था। लेकिन नगर निगम की टीम ने हार नहीं मानी। लगातार 24 घंटे तक जेसीबी मशीनों की सहायता से और कर्मचारियों के अथक प्रयासों से टन दर टन कचरे की छंटाई की गई। अंततः, घंटों की कड़ी मेहनत रंग लाई और कचरे के ढेर के नीचे दबा वह बहुमूल्य चांदी का लोटा पूरी तरह से सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
लोटा मिलते ही पीड़ित परिवार के सदस्यों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने राहत की गहरी सांस ली। आवश्यक कागजी कार्रवाई और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने सम्मानपूर्वक वह लोटा उसके असली मालिक को वापस सौंप दिया।
सोशल मीडिया पर सराहना और अतीत के किस्से
इस घटना की सुखद समाप्ति के बाद पूरे शहर में इंदौर नगर निगम की मुस्तैदी और संवेदनशीलता की जमकर सराहना की जा रही है। लोग इस सफल अभियान को 'ऑपरेशन लोटा' कह रहे हैं। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में यह कोई पहला ऐसा अनोखा मामला नहीं है; इससे पहले भी राज्य में करीब 5 महीने से लापता लड्डू गोपाल की मूर्ति को खोजने के लिए इसी तरह का एक अनूठा अभियान चलाया गया था, जो काफी चर्चा में रहा था। इंदौर का यह ताजा मामला दिखाता है कि तकनीक और कर्तव्यनिष्ठा के मेल से किसी भी बड़ी मुश्किल को आसान बनाया जा सकता है।
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