खूनी संघर्ष में तब्दील हुआ मामूली विवाद
मैनपुरी जिले के किशनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले छोटे हर्राजपुर गांव में रविवार की रात एक खूनी वारदात सामने आई है। लंबे समय से चल रहा जमीन की मेड़ का विवाद अचानक हिंसक हो गया, जिसके बाद गांव गोलियों की आवाज और चीख-पुकार से गूंज उठा। इस संघर्ष के दौरान न केवल ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गईं, बल्कि धारदार हथियारों यानी फरसों से भी घातक हमले किए गए। इस भयावह घटना में चार लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे, जिनमें से एक घायल ने सैफई मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान अपना दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से ही पूरे गांव में तनाव और दहशत का वातावरण बना हुआ है।
गोलियों की आवाज से दहशत में डूबा गांव
छोटे हर्राजपुर गांव में रविवार देर रात जब अचानक गोलियां चलनी शुरू हुईं, तो ग्रामीण बुरी तरह घबरा गए। लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों के अंदर छिप गए। गलियों और चबूतरे पर चारों ओर खून बिखरा नजर आया। घायलों के परिजनों ने आनन-फानन में अपने वाहनों का इंतजाम किया और गंभीर रूप से घायल अपने अपनों को लेकर सैफई मेडिकल कॉलेज की ओर दौड़ पड़े। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन और उच्च अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पुलिस बल मौके के लिए रवाना हुआ।
सरकारी बचत और मेड़ को लेकर था विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद राजेंद्र सिंह चौहान और भारत सिंह भदौरिया के परिवारों के बीच खेत की मेड़ को लेकर चल रहा था। राजस्व विभाग की टीम ने इससे पहले दोनों पक्षों के खेतों की पैमाइश भी की थी, लेकिन कोई भी पक्ष उस नाप से संतुष्ट नहीं था। दरअसल, दोनों परिवारों ने गांव के किसी व्यक्ति से जमीन खरीदी थी, जिसमें सरकारी बचत की जमीन भी शामिल थी। दोनों ही पक्ष उस सरकारी बचत वाली जमीन पर अपना अधिकार जता रहे थे और उसे आधा-आधा बांटना चाहते थे, लेकिन उस जमीन का कब्जा एक पक्ष के पास था। रविवार को जब खेत की जुताई की जा रही थी, तो राजस्व विभाग द्वारा बनाई गई मेड़ टूट गई, जिसके बाद यह पुराना विवाद एक बड़े हिंसक संघर्ष में बदल गया।
आमने-सामने आए दोनों पक्ष
मृतक के परिजनों का आरोप है कि मोहित और दीपक चौहान हथियारों और फरसों के साथ उनके घर पहुंच गए और अंधाधुंध हमला कर दिया। वहीं दूसरी ओर से भी पलटवार किया गया और दोनों पक्ष आपस में बुरी तरह भिड़ गए। इस खूनी हमले में राजेंद्र सिंह चौहान के पक्ष के लोग और भारत सिंह भदोरिया के परिवार के सदस्य घायल हुए। इस हिंसक झड़प में कुलदीप पुत्र शिशुपाल, दीपांशु पुत्र सोनपाल, हिमांशु पुत्र अशोक सिंह और अरविंद पुत्र सूरज पाल गंभीर रूप से घायल हुए थे। इनमें से दीपांशु ने सैफई में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, दूसरे पक्ष से मोहित चौहान भी घायल हुआ है, जिसे इलाज के लिए मैनपुरी जिला अस्पताल भेजा गया है।
पुलिस और फॉरेंसिक टीम की जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी इंद्रमणि त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद साहा, एसपी सिटी अरुण कुमार सिंह और सीओ रामकृष्ण द्विवेदी घटनास्थल पर पहुंचे। कुर्रा, एलाऊ और बेवर सहित कई थानों की पुलिस बल को वहां तैनात किया गया। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से खून के नमूने, कारतूस और बुलेट के अवशेष एकत्र किए हैं, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।
गांव में पुलिस का पहरा
वारदात के बाद गांव को पुलिस छावनी में बदल दिया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है। पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने एक घायल आरोपी को हिरासत में भी लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि, इस घटना के बाद पीड़ित परिवार ने किशनी पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया है।
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