सुल्तानगंज की महत्ता और कांवड़ यात्रा
सावन का महीना आते ही देशभर में शिव भक्तों का उत्साह देखने लायक होता है। इस दौरान भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में आयोजित होने वाला श्रावणी मेला अपनी एक अलग पहचान रखता है। विश्व प्रसिद्ध इस मेले में शामिल होने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। कांवड़िये सुल्तानगंज से ही पवित्र गंगाजल भरते हैं और फिर वहां से बाबा बैद्यनाथ धाम की कठिन यात्रा पर निकलते हैं। हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँचकर अपनी आस्था का परिचय देते हैं।
क्यों खास है सुल्तानगंज का जल?
कांवड़िये सुल्तानगंज से ही जल क्यों लेना पसंद करते हैं, इस संबंध में अजगैबीनाथ मठ के मठाधीश प्रेमानंद महाराज ने महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। उनके अनुसार, इसके पीछे कई गहरी धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। सबसे मुख्य कारण सुल्तानगंज की भौगोलिक स्थिति है। यहाँ से लेकर कहलगांव तक गंगा नदी उत्तर दिशा की ओर बहती है, जिसे उत्तरवाहिनी गंगा कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उत्तर दिशा को भगवान शिव की हृदयस्थली माना जाता है।
भगवान शिव और उत्तर दिशा का संबंध
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, जब कोई भक्त भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित करता है, तो वह सबसे पहले उनके उत्तर दिशा वाले भाग में जल चढ़ाता है। चूंकि भगवान शिव का निवास उत्तर दिशा में माना जाता है, इसलिए इस दिशा में बहने वाली गंगा का जल शिवजी को अत्यधिक प्रिय होता है। पूरे भारत में मुख्य रूप से दो ही ऐसे स्थान हैं जहाँ गंगा उत्तर दिशा की ओर बहती है, जिनमें पहला सुल्तानगंज है और दूसरा काशी विश्वनाथ का क्षेत्र है। यही कारण है कि कांवड़िए यहीं से जल लेकर बाबा धाम की ओर प्रस्थान करना शुभ मानते हैं।
पौराणिक मान्यता और यात्रा का क्रम
एक अन्य मान्यता यह भी है कि त्रेता युग में स्वयं भगवान श्रीराम ने यहीं से गंगाजल ग्रहण किया था और उसे लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम गए थे। इसी परंपरा का अनुसरण करते हुए आज भी श्रद्धालु सुल्तानगंज से जल भरकर करीब 105 किलोमीटर की लंबी पैदल यात्रा तय करते हैं। कुछ श्रद्धालु इस दूरी को वाहनों के माध्यम से भी पूरा करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैली आस्था
सुल्तानगंज से जल भरकर बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या केवल भारत तक सीमित नहीं है। यहाँ बिहार और भारत के अन्य राज्यों के अलावा पड़ोसी देशों जैसे नेपाल और भूटान से भी बड़ी संख्या में शिव भक्त आते हैं। सालों से चली आ रही यह परंपरा आज भी अटूट है। नाचते-गाते हुए और बम-बम भोले के जयकारों के साथ कांवड़ियों का यह जत्था जब अपनी यात्रा पर निकलता है, तो पूरा क्षेत्र शिवमय हो जाता है। इस सावन भी सुल्तानगंज में कांवड़ियों की भारी भीड़ और विशेष रौनक देखी जाएगी।
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