भोपाल कफ सिरप मामला: मुख्य आरोपी राहुल कुशवाहा के पिता को कोर्ट से झटका, बैंक खाता अनफ्रीज करने की याचिका खारिज

भोपाल के बहुचर्चित नकली कफ सिरप कांड में विशेष अदालत ने मुख्य आरोपी राहुल कुशवाहा के पिता की बैंक खाता अनफ्रीज करने की अर्जी खारिज कर दी है। जांच में सामने आया है कि इन खातों का इस्तेमाल अवैध धंधे की रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया जा रहा था।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुए बहुचर्चित नकली और नशीले कफ सिरप कांड में पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस काले कारोबार के नए-नए खुलासे हो रहे हैं। इस मामले के मुख्य साजिशकर्ता और मास्टरमाइंड सलमान उर्फ राहुल कुशवाहा के परिवार पर भी अब कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। भोपाल की एक विशेष अदालत ने आरोपी राहुल कुशवाहा के पिता उत्तम सिंह कुशवाहा को बड़ी राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने उत्तम सिंह कुशवाहा के फ्रीज किए जा चुके बैंक खाते को दोबारा चालू यानी अनफ्रीज करने की याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

बैंक खातों के जरिए छिपाया जा रहा था नशीली दवाओं का पैसा

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने STF द्वारा जुटाई गई केस डायरी और विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश की गई थी। इन दस्तावेजों और सबूतों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद अदालत इस नतीजे पर पहुंची कि इस बड़े रैकेट में नशीले कफ सिरप की तस्करी और बिक्री से कमाए गए काले धन को ठिकाने लगाने के लिए कई संदिग्ध बैंक खातों का सहारा लिया गया था। पुलिस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, इन संदिग्ध बैंक खातों में मुख्य आरोपी राहुल के पिता उत्तम सिंह कुशवाहा का खाता भी शामिल पाया गया है। इसी मजबूत आधार को देखते हुए कोर्ट ने उत्तम सिंह कुशवाहा को राहत देने से मना कर दिया और उनकी याचिका खारिज कर दी।

एक ही मोबाइल नंबर से खुले राज और लाखों का लेनदेन

STF की जांच में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस पूरे गोरखधंधे के पैसों के लेनदेन का प्रबंधन मास्टरमाइंड राहुल कुशवाहा खुद ही संभाल रहा था। जांच टीम को पता चला कि मुख्य आरोपी राहुल कुशवाहा, उसकी फर्म निखिल फार्मा और अग्रवाल मेडिकोज के बैंक खातों में एक ही मोबाइल नंबर दर्ज था। सिर्फ इतना ही नहीं, एक अन्य बैंक खाते में भी राहुल का ही मोबाइल नंबर पंजीकृत पाया गया। इस अहम सबूत से यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि इन तमाम बैंक खातों का वास्तविक संचालन और नियंत्रण किसी और के पास नहीं, बल्कि सीधे तौर पर राहुल कुशवाहा के ही हाथ में था।

जांच के दौरान वित्तीय गड़बड़ियों के कई बड़े आंकड़े भी सामने आए हैं। STF के अनुसार, पिछले साल 9 दिसंबर 2025 से लेकर 5 जून 2026 के बीच राहुल कुशवाहा की फर्जी फर्मों, जिनमें निखिल फार्मा और अग्रवाल मेडिकोज शामिल हैं, के बैंक खातों में करीब 73 लाख रुपये का संदिग्ध लेनदेन किया गया था। यह भारी-भरकम राशि नशीली दवाओं के अवैध व्यापार से जुड़ी होने का अंदेशा है। इसी अवधि के दौरान STF ने कार्रवाई करते हुए कोडीन फॉस्फेट युक्त नशीले कफ सिरप की 74,104 बोतलें भी बरामद की थीं, जो इस अवैध रैकेट के नेटवर्क की भयावहता को दर्शाती हैं।

केरल से पकड़ा गया था रैकेट का मुख्य सरगना

इस पूरे मामले की शुरुआत पिछले महीने हुई थी जब STF ने भोपाल में बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध और नकली कफ सिरप के एक बहुत बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। STF की टीमों ने एक बड़ी और सुनियोजित कार्रवाई करते हुए भोपाल के गांधीनगर थाना क्षेत्र और मुबारकपुर इलाके में चल रही दो अवैध फैक्ट्रियों पर एक साथ छापा मारा था। इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने फैक्ट्रियों से करीब 75,000 से अधिक नकली कफ सिरप की बोतलें जब्त की थीं। जांच में खुलासा हुआ कि इन नशीली बोतलों को डमी यानी फर्जी फर्में बनाकर अवैध तरीके से बाजार में बेचा जा रहा था। इस नकली खेप को मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के महाकौशल क्षेत्र और राज्य के अन्य विभिन्न जिलों में खपाने के लिए भेजा जा रहा था।

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से ही इस रैकेट का मास्टरमाइंड सलमान उर्फ राहुल कुशवाहा पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा था। वह गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। आखिरकार, STF की तकनीकी टीम और स्थानीय इनपुट के आधार पर उसे केरल की राजधानी त्रिवेंद्रम से गिरफ्तार करने में बड़ी कामयाबी मिली। पुलिस जांच के मुताबिक, राहुल कुशवाहा ही इस पूरे सिंडिकेट का मुख्य सूत्रधार था, जो अवैध तरीके से नकली कफ सिरप के निर्माण, उसकी पैकेजिंग, सप्लाई चेन और वितरण के पूरे तंत्र को संचालित कर रहा था। फिलहाल आरोपी पुलिस की हिरासत में है और उसके पूरे वित्तीय लेनदेन की गहराई से जांच की जा रही है।

https://hindi.news18.com/news/madhya-pradesh/bhopal-bhopal-cough-syrup-case-mastermind-used-father-bank-account-local18-10671079.html