ग्रामीण महिलाओं के लिए उम्मीद की नई किरण
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में भारतीय रेलवे की एक स्टेशन-एक उत्पाद पहल ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। यह सरकारी योजना न केवल स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध करा रही है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने का एक सशक्त माध्यम भी बन चुकी है। बालोद रेलवे स्टेशन पर संचालित जय मां चंडी स्व सहायता समूह का स्टॉल इसका एक जीवंत उदाहरण है, जिसे समूह की संचालिका दामिन नेताम संभाल रही हैं।
पारंपरिक छत्तीसगढ़ी स्वाद की धूम
इस स्टॉल की सबसे बड़ी विशेषता वहां मिलने वाले छत्तीसगढ़ के पारंपरिक स्नैक्स हैं, जो यात्रियों के बीच खासे लोकप्रिय हो रहे हैं। दामिन नेताम के अनुसार, उनके स्टॉल पर यात्रियों के लिए शुद्ध और घर में तैयार किए गए स्वादिष्ट व्यंजन आसानी से उपलब्ध हैं। यहां प्रमुख रूप से बेचे जाने वाले उत्पादों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- मुर्रा लड्डू और तिल लड्डू
- पारंपरिक अरसा और नड्डा
- मिक्चर और फ्राई मुर्रा
- देसी बड़ी और बिजौरी
- घरेलू तरीके से तैयार पापड़ और मसाले
चूंकि इन सभी उत्पादों को घर में पारंपरिक विधि से तैयार किया जाता है, इसलिए इनकी गुणवत्ता और स्वाद ग्राहकों को आकर्षित करता है, जिससे उनकी बिक्री में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
12 महिलाओं के साझा प्रयासों की सफलता
जय मां चंडी स्व सहायता समूह से कुल 12 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो पूरी मेहनत और लगन के साथ काम कर रही हैं। इन महिलाओं के सामूहिक प्रयासों का ही नतीजा है कि आज उनके उत्पाद केवल बालोद शहर तक ही सीमित नहीं हैं। इनके द्वारा तैयार किए गए सामानों की मांग रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में भी काफी बढ़ गई है। सभी सदस्य मिलकर उत्पादन से लेकर बिक्री तक की प्रक्रिया को संभालती हैं, जिससे उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो रही है।
पांच साल का संघर्ष और बदलाव का सफर
दामिन नेताम ने इस यात्रा के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि आज जो सफलता उन्हें मिल रही है, उसकी नींव पांच साल पहले रखी गई थी। शुरुआती दौर बेहद चुनौतीपूर्ण था, जब समूह की महिलाएं घर-घर जाकर बड़ी, मसाले और अचार बेचा करती थीं। समय के साथ उन्होंने गांवों में आयोजित होने वाले साप्ताहिक हाट बाजारों में अपने उत्पादों को ले जाना शुरू किया। जैसे-जैसे लोगों का भरोसा बढ़ा और उनके उत्पादों की गुणवत्ता को पहचान मिली, वैसे-वैसे ग्राहकों की संख्या भी बढ़ती गई। आज, रेलवे स्टेशन पर स्टॉल मिलने से उनके छोटे से व्यापार ने एक बड़े व्यवसाय का रूप ले लिया है।
आर्थिक मजबूती और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी
रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन आने वाले हजारों यात्रियों की आवाजाही का सीधा लाभ इस समूह को मिल रहा है। नियमित बिक्री के कारण समूह को लगातार अच्छा मुनाफा हो रहा है, जिससे इससे जुड़ी सभी महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। दामिन नेताम का कहना है कि कमाई बढ़ने के साथ-साथ महिलाओं का आत्मविश्वास भी कई गुना बढ़ गया है। अब वे न केवल अपने परिवार की आय में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं, बल्कि समाज में भी अपनी एक नई पहचान बना रही हैं।
प्रधानमंत्री के प्रयासों की सराहना
इस अवसर पर दामिन नेताम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि एक स्टेशन-एक उत्पाद जैसी पहल ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि इसी तरह स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों को सही मंच और बाजार मिलता रहा, तो ग्रामीण अंचल की हजारों और महिलाएं भी स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकेंगी। यह पहल न केवल महिलाओं को सशक्त बना रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ की पारंपरिक खाद्य संस्कृति को पूरे देश में लोकप्रिय बनाने का काम भी कर रही है।
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