ऐतिहासिक एमओयू से मिली आजादी
छत्तीसगढ़ राज्य के लाखों पेंशनरों के लिए एक सुखद और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पेंशनरों के महंगाई भत्ते यानी DA में वृद्धि के लिए मध्य प्रदेश सरकार की पूर्व अनुमति लेने की बाध्यता को पूरी तरह खत्म कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर दोनों राज्यों के बीच इस संबंध में एक ऐतिहासिक एमओयू (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस निर्णय के साथ ही प्रदेश के 1.50 लाख से अधिक पेंशनरों की 25 साल पुरानी मांग पूरी हो गई है।
क्या थी कानूनी अड़चन
इस समस्या की जड़ वर्ष 2000 में निहित थी। जब मध्य प्रदेश का विभाजन कर छत्तीसगढ़ राज्य का गठन किया गया था, तब मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के अंतर्गत एक विशेष नियम बनाया गया था। इस नियम के अनुसार, अविभाजित मध्य प्रदेश के कार्यकाल के दौरान सेवानिवृत्त हुए उन कर्मचारियों को, जो अब छत्तीसगढ़ का हिस्सा थे, उनके महंगाई भत्ते में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी के लिए मध्य प्रदेश सरकार की लिखित सहमति लेना अनिवार्य था। पिछले ढाई दशक से पेंशनर और उनके परिवार इस प्रशासनिक बाधा को समाप्त करने की लगातार मांग कर रहे थे, क्योंकि इसके कारण डीए वृद्धि में अक्सर लंबी देरी होती थी।
सामंजस्य से निकला समाधान
छत्तीसगढ़ के वित्तमंत्री ओपी चौधरी ने इस निर्णय की आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि यह सरकार की एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस विषय पर मध्य प्रदेश सरकार के साथ बहुत ही सकारात्मक और बेहतर सामंजस्य स्थापित किया है। इसी तालमेल का परिणाम है कि वर्षों से चली आ रही यह जटिल समस्या अब सुलझ गई है। वित्त विभाग के अधिकारियों ने दोनों राज्यों के बीच आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कीं, जिसके फलस्वरूप दोनों राज्यों के बीच एमओयू साइन हो सका।
पेंशनरों को अब होगा सीधा लाभ
इस ऐतिहासिक समझौते के बाद, अब छत्तीसगढ़ सरकार पूरी तरह से स्वतंत्र होकर पेंशनरों के महंगाई भत्ते को बढ़ाने का निर्णय ले सकेगी। पहले जहां फाइलों को मंजूरी के लिए भोपाल भेजना पड़ता था और स्वीकृति मिलने के लिए महीनों का इंतजार करना होता था, अब वह स्थिति पूरी तरह समाप्त हो गई है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब छत्तीसगढ़ सरकार जब भी राज्य के वर्तमान कार्यरत कर्मचारियों का डीए बढ़ाएगी, उसी समय स्वतः ही पेंशनरों के लिए भी यह वृद्धि लागू हो जाएगी।
इस प्रशासनिक सुधार से राज्य के उन 1.50 लाख से ज्यादा पेंशनरों को सीधा और तुरंत लाभ मिलेगा जो लंबे समय से अपने आर्थिक हक का इंतजार कर रहे थे। अब उन्हें डीए वृद्धि के लिए किसी बाहरी राज्य की अनुमति का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, जिससे उनकी पेंशन से जुड़ी प्रक्रियाएं और अधिक सरल व पारदर्शी हो गई हैं। मुख्यमंत्री की इस पहल को पेंशनभोगी समाज के लिए एक बड़ा प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है।
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