राजनीतिक समीकरण में बड़ा बदलाव
महाराष्ट्र की सक्रिय राजनीति से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, जहां उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को एक और करारा झटका लगा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने शिवसेना (यूबीटी) के 6 बागी सांसदों को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में शामिल होने की औपचारिक मंजूरी दे दी है। लोकसभा सचिवालय द्वारा इस निर्णय पर मुहर लगाने के बाद अब इन सांसदों के शिंदे गुट में विलय का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है। इस घटनाक्रम के बाद लोकसभा में शिंदे गुट की संख्या बल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और अब निचले सदन में उनके कुल सांसदों की संख्या 13 तक पहुंच गई है। उद्धव ठाकरे गुट द्वारा लगातार इस विलय का विरोध किया जा रहा था, लेकिन स्पीकर के इस निर्णय ने ठाकरे की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
कौन हैं वे 6 सांसद
शिवसेना (यूबीटी) का दामन छोड़ने वाले इन 6 सांसदों ने बगावत का रास्ता चुनते हुए एकनाथ शिंदे की शिवसेना को अपना समर्थन दिया है। उद्धव ठाकरे खेमे ने इन सांसदों के शिंदे गुट में विलय को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसे दरकिनार कर दिया गया है। इन सांसदों के नाम इस प्रकार हैं:
- परभणी से सांसद संजय जाधव
- मुंबई उत्तर-पूर्व से सांसद संजय दीना पाटिल
- उस्मानाबाद/धाराशिव से सांसद ओमराज निंबालकर
- हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल अष्टीकर
- यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय उत्तमराव देशमुख
- शिर्डी से सांसद भाऊ साहेब वाकचौरे
एकनाथ शिंदे की प्रतिक्रिया
अपने गुट में सांसदों के शामिल होने को एकनाथ शिंदे ने 'ऑपरेशन टाइगर' की सफलता करार दिया है। इस पूरे मामले पर अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि जो भी लोग उनके साथ जुड़ रहे हैं, वे पूरी तरह भरोसे के कारण आ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे सांसद हों या अन्य लोग, जो पिछले 3-4 वर्षों में उनके साथ जुड़े हैं, उन सभी को शिवसेना, मुझ पर और हमारी पूरी टीम पर अटूट विश्वास है। शिंदे ने आगे कहा कि हम लोग पार्टियां तोड़ने या फूट डालने का काम नहीं करते, बल्कि हम जोड़ने वाले लोग हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य उनके चुनाव क्षेत्रों की जनता को न्याय दिलाना और जनसेवा की जिम्मेदारियों को पूरा करना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे इन सभी सांसदों को पूरा समर्थन देंगे।
ममता बनर्जी की पार्टी को भी लगा झटका
लोकसभा स्पीकर के इस फैसले का असर केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को भी इस दौरान बड़ा राजनीतिक धक्का लगा है। लोकसभा में तृणमूल छोड़कर NCPI में विलय करने वाले 20 सांसदों के लिए अलग से बैठने की व्यवस्था को भी स्पीकर ने मंजूरी दे दी है। NCPI को अब एक अलग समूह के रूप में मान्यता प्राप्त हो गई है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने सर्वदलीय बैठक के लिए सुदीप बंदोपाध्याय और काकोली घोष को NCPI नेता के रूप में आमंत्रित किया है, जिसे ममता बनर्जी के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।
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