बारिश में चुनौतियों का दौर
मानसून का समय अक्सर फसलों की अच्छी वृद्धि के लिए जाना जाता है, लेकिन जो किसान भाई उद्यानिकी और सब्जियों की खेती करते हैं, उनके लिए यह मौसम काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र, बालोद के विषय वस्तु विशेषज्ञ बलदेव अग्रवाल ने इस संबंध में किसानों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उनका कहना है कि बारिश में खेत हरा-भरा तो नजर आता है, लेकिन असल खतरा जमीन के नीचे जड़ों के स्तर पर होता है। लगातार बारिश और खेतों में जलभराव की स्थिति सब्जी और फलदार पौधों के लिए घातक हो सकती है।
जड़ों को पहुंचने वाला गुप्त नुकसान
विशेषज्ञ बलदेव अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि सब्जियां आमतौर पर कम ऊंचाई वाली फसलें होती हैं। जब लगातार बारिश होती है और खेत में जलजमाव की स्थिति बनती है, तो पौधों की जड़ें काफी समय तक पानी में डूबी रहती हैं। इससे न केवल पौधों का विकास थम जाता है, बल्कि कई बार पूरा पौधा ही सड़कर नष्ट हो जाता है। इसके अलावा, तेज बहाव की स्थिति में छोटे पौधे अपनी जगह से उखड़कर बह भी सकते हैं, जिससे किसानों को बड़े स्तर पर आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।
दिलचस्प बात यह है कि फलदार पौधों में नुकसान तुरंत दिखाई नहीं देता है। कई बार पौधा ऊपर से देखने में स्वस्थ और हरा-भरा लगता है, जबकि हकीकत में जमीन के अंदर रूट जोन में पानी भर चुका होता है। इससे पौधों की फीडिंग जड़ें धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं। यही जड़ें पौधों को आवश्यक पोषक तत्व और पानी पहुंचाने का काम करती हैं। इनके खराब होने से पौधा कमजोर पड़ जाता है और बाद में फल व फूल आने की क्षमता भी पूरी तरह प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में, कई बार फल लगने के बाद भी पौधा उन्हें संभाल नहीं पाता और गिर जाता है, जिससे पूरी मेहनत बर्बाद हो जाती है।
जल निकासी के लिए अपनाएं यह तरीका
कृषि विशेषज्ञ ने इस तरह के नुकसान से बचाव के लिए खेतों में जल निकासी की बेहतर व्यवस्था करने पर जोर दिया है। यदि किसी किसान के पास आधा से एक एकड़ तक का रकबा है और वहां सब्जियां या फलदार पौधे लगे हैं, तो खेत के किनारों पर उत्तर और पश्चिम दिशा में 1 मीटर गहरी और 50 सेंटीमीटर चौड़ी नालियां खोदना अनिवार्य होना चाहिए। ये नालियां अतिरिक्त जल को बाहर निकालने में मदद करती हैं, जिससे जड़ों में पानी नहीं रुकता और वे सड़ने से बच जाती हैं।
धान के खेतों के पास विशेष सावधानी
बलदेव अग्रवाल ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात की ओर ध्यान दिलाया है। उन्होंने बताया कि जिन किसानों के बागवानी वाले खेत धान की फसलों के पास स्थित होते हैं, वहां अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता होती है। धान के खेतों में पानी का जमाव लगातार बना रहता है, जिससे मिट्टी के अंदर रिसाव के माध्यम से पानी पास के बागवानी वाले खेतों तक पहुंच जाता है। इस कारण वहां भी जलभराव की समस्या पैदा हो जाती है। ऐसे मामलों में खेत के किनारे गहरी नालियां खोदने से धान के खेत का अतिरिक्त पानी बागवानी वाले क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर पाता और मुख्य फसल सुरक्षित रहती है। चीकू, काजू और आम जैसे फलदार पौधों में लंबे समय तक जलभराव होने से पोषक तत्वों की भारी कमी हो जाती है, जिसे केवल उचित जल निकासी से ही नियंत्रित किया जा सकता है।
आय की सुरक्षा के लिए नियमित निगरानी
कृषि विज्ञान केंद्र, बालोद ने सभी किसानों से यह अपील की है कि वे पूरे बारिश के मौसम के दौरान अपने खेतों का नियमित रूप से निरीक्षण करते रहें। जल निकासी की व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देना ही एक सफल खेती की पहचान है। समय रहते की गई यह छोटी सी तैयारी न केवल सब्जी और फलदार फसलों को बड़ी बर्बादी से बचा सकती है, बल्कि किसानों की साल भर की मेहनत और उनकी आय को भी सुरक्षित रखने में मदद करती है।
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