पशुपालन में यूरिया की भूमिका और गलत धारणाएं
आमतौर पर अधिकांश किसान और पशुपालक यूरिया को केवल एक रासायनिक खाद के रूप में देखते हैं, जिसका उपयोग खेतों में फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए किया जाता है। यही कारण है कि यूरिया को पशुओं के लिए हानिकारक या विषैला मान लिया जाता है। हालांकि, पशु पोषण के विशेषज्ञों का नजरिया इससे बिल्कुल अलग है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यूरिया का चुनाव और उसके उपयोग की विधि वैज्ञानिक हो, तो यह गाय और भैंस जैसे जुगाली करने वाले पशुओं के लिए पोषण का एक बहुत ही सस्ता और असरदार जरिया बन सकता है। इससे न केवल चारे का प्रबंधन बेहतर होता है, बल्कि दूध उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़त देखी जा सकती है।
प्रोटीन का सस्ता और प्रभावी स्रोत
बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के पशु पोषण विभाग में सह-प्राध्यापक डॉ. धर्मेंद्र कुमार के अनुसार, यूरिया अपने आप में प्रोटीन नहीं है, बल्कि यह नॉन-प्रोटीन नाइट्रोजन का एक मुख्य स्रोत है। पशुओं के पेट का पहला हिस्सा जिसे रूमेन कहा जाता है, उसमें करोड़ों की संख्या में सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं। जब पशु यूरिया का सेवन करते हैं, तो ये सूक्ष्मजीव उस नाइट्रोजन को ग्रहण करके माइक्रोबियल प्रोटीन में बदल देते हैं। यह प्रक्रिया पशु के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि यह शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करती है। एक अध्ययन के अनुसार, मात्र 100 ग्राम यूरिया से पशु के शरीर में लगभग 290 ग्राम प्रोटीन के बराबर पोषण की भरपाई की जा सकती है।
बिहार में चारे की समस्या और समाधान
बिहार में पशुपालन करने वाले अधिकांश किसान मुख्य रूप से पुआल, सूखा भूसा और दाने पर निर्भर रहते हैं। समस्या यह है कि इन चारे के स्रोतों से पशु को पेट भरने के लिए ऊर्जा तो मिलती है, लेकिन उनमें प्रोटीन की मात्रा बहुत कम होती है। लंबे समय तक प्रोटीन की कमी के कारण पशु न केवल बीमार पड़ने लगते हैं, बल्कि उनके दूध देने की क्षमता में भी भारी गिरावट आ जाती है। यदि पशुपालक भूसे को यूरिया से उपचारित करके पशु को दें, तो उस चारे की पाचन क्षमता बढ़ जाती है और पशु को जरूरी प्रोटीन भी मिलने लगता है।
पाचन तंत्र में यूरिया की कार्यप्रणाली
गाय और भैंस जैसे पशुओं का पाचन तंत्र अन्य जानवरों से अलग होता है। जब उपचारित भूसा पशु के रूमेन में जाता है, तो यूरिया अमोनिया के रूप में विघटित होता है। यह अमोनिया सूक्ष्मजीवों के लिए भोजन का काम करता है, जो आगे चलकर प्रोटीन के रूप में पशु के पाचन तंत्र का हिस्सा बन जाता है। इस पूरी प्रक्रिया का परिणाम यह होता है कि पशु कम दाना खाकर भी अधिक ऊर्जा और पोषण प्राप्त कर लेता है, जिससे उसके स्वास्थ्य और शारीरिक विकास में सुधार आता है।
यूरिया के प्रकार और सही चुनाव
बाजार में यूरिया मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में उपलब्ध होता है। विशेषज्ञों ने किसानों को इन श्रेणियों के बारे में स्पष्ट समझ रखने की सलाह दी है:
- लेबोरेटरी ग्रेड यूरिया: यह उच्च शुद्धता वाला होता है और मुख्य रूप से प्रयोगशालों में इस्तेमाल होता है।
- फीड ग्रेड यूरिया: यह पशुओं के लिए सबसे सुरक्षित और उपयुक्त विकल्प माना जाता है। इसकी कीमत लगभग 40 रुपये प्रति किलोग्राम होती है।
- फर्टिलाइजर ग्रेड यूरिया: यह खेतों में इस्तेमाल होने वाला यूरिया है। यदि इसका उपयोग सावधानी से किया जाए, तो इसे भी भूसा उपचार के लिए काम में लिया जा सकता है, लेकिन विशेषज्ञों की पहली पसंद फीड ग्रेड ही है।
- स्लो-रिलीज यूरिया: यह एक अन्य अच्छा विकल्प है जिसकी कीमत लगभग 120 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास रहती है।
दूध उत्पादन में बढ़ोतरी और दाने की बचत
विशेषज्ञों का दावा है कि जिन पशुओं को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिल रहा था, यदि उन्हें यूरिया उपचारित भूसा खिलाया जाए, तो उनके दूध उत्पादन में प्रतिदिन 1 से 2 किलोग्राम तक का इजाफा हो सकता है। यह न केवल उत्पादन बढ़ाता है, बल्कि खर्च में भी कटौती करता है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई पशु पहले 5 किलोग्राम दाना खाता था, तो उपचारित भूसा मिलने के बाद दाने की जरूरत घटकर 4 किलोग्राम तक रह जाती है। इस प्रकार किसान को प्रतिदिन 1 किलोग्राम दाने की बचत होती है।
भूसे को उपचारित करने की वैज्ञानिक विधि
यूरिया को कभी भी सीधे पशु को नहीं खिलाना चाहिए, क्योंकि यह हानिकारक हो सकता है। इसे खिलाने का सही तरीका भूसे का उपचार है। इस प्रक्रिया का पालन नीचे दिए गए चरणों में करें:
- 100 किलोग्राम सूखे भूसे का चयन करें।
- 4 किलोग्राम यूरिया को 40 लीटर पानी में पूरी तरह घोल लें।
- तैयार घोल को भूसे के ढेर पर समान रूप से छिड़कें।
- भूसे को अच्छी तरह मिलाकर किसी प्लास्टिक या मजबूत बोरे में एयर-टाइट पैक कर दें।
- इस मिश्रण को 21 दिनों तक इसी स्थिति में रहने दें।
- 21 दिनों के बाद ही इसे पशु को खिलाने के लिए निकालें।
गुड़ और मिनरल मिक्सचर की महत्ता
उपचारित भूसे के साथ कुछ और चीजों का संतुलन बनाना भी आवश्यक है। पशु को प्रतिदिन 250 से 300 ग्राम गुड़ देना चाहिए, जो ऊर्जा का बड़ा स्रोत है। गुड़ देने से रूमेन के सूक्ष्मजीवों को यूरिया पचाने की शक्ति मिलती है। इसके अलावा, शरीर में खनिजों की कमी को पूरा करने के लिए नियमित रूप से मिनरल मिक्सचर का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।
दूध में यूरिया का डर और सच्चाई
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या यूरिया खिलाने से दूध में यूरिया की मात्रा बढ़ जाती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो दूध में 12 से 14 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर यूरिया प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है, जो पशु की सामान्य जैविक प्रक्रिया का हिस्सा है। यह हानिकारक नहीं होता। यदि दूध में बाहरी रूप से यूरिया मिलाया जाए, तो वह मिलावट है, लेकिन पशु को वैज्ञानिक विधि से उपचारित चारा खिलाने पर दूध पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।
महत्वपूर्ण सावधानियां
पशुपालकों को यह हमेशा याद रखना चाहिए कि यूरिया की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए। पहली बार यदि आप इसका उपयोग कर रहे हैं, तो अपने नजदीकी पशु चिकित्सक या विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें। सुरक्षित तरीके से अपनाया गया यह पोषण प्रबंधन आपके पशुपालन व्यवसाय को अधिक लाभदायक बना सकता है।
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