मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से पारिवारिक कलह और बच्चों पर उसके गंभीर असर की एक बेहद हैरान कर देने वाली वारदात सामने आई है। यहां एक पिता ने अपनी पत्नी से हुए आपसी विवाद और रंजिश के चलते अपने ही चार साल के मासूम बेटे का स्कूल से अपहरण कर लिया। इस सनसनीखेज वारदात के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया। तीन दिनों तक चले एक बेहद चुनौतीपूर्ण और सघन तलाशी अभियान के बाद आखिरकार पुलिस को सफलता मिली और उन्होंने बच्चे को सुरक्षित बचा लिया। पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए आरोपी पिता की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।
बेटे के अपहरण के लिए पिता ने रची थी गहरी साजिश
मुरैना के पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीणा ने इस गंभीर मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि आरोपी पिता, जिसकी पहचान नीलेश राजपूत के रूप में हुई है, ने इस पूरी वारदात को अंजाम देने के लिए बेहद शातिर तरीके से योजना तैयार की थी। इस बड़ी साजिश में उसके साथ दो अन्य सहयोगी भी शामिल थे, जो पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए फिलहाल फरार चल रहे हैं।
जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि नीलेश राजपूत और उसके दो अन्य साथी इस वारदात को अंजाम देने से पहले मुरैना के ही एक स्थानीय लॉज में पूरे 12 दिनों तक रुके हुए थे। इस लंबी अवधि के दौरान उन्होंने न केवल अपहरण की साजिश का ताना-बाना बुना, बल्कि उस स्कूल के आसपास के इलाके की कई बार टोह ली जहां बच्चा पढ़ता था। वे लगातार स्कूल की छुट्टी के समय और वहां की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे थे ताकि बिना किसी बाधा के बच्चे को उठाया जा सके।
14 जुलाई को दिया वारदात को अंजाम और ऐसे भागे राजस्थान
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी नीलेश राजपूत और उसकी पत्नी के बीच काफी समय से गहरा विवाद चल रहा था, जिसके कारण दोनों अलग रह रहे थे। महिला अपने चार साल के बेटे कार्तिकेय के साथ मुरैना में स्थित अपनी मां के घर यानी बच्चे के ननिहाल में रह रही थी। एसपी ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि उसकी पत्नी उसे अपने ही बेटे से मिलने नहीं देती थी और इसी बात से नाराज होकर उसने बच्चे के अपहरण की योजना बनाई।
तय योजना के मुताबिक, 14 जुलाई को जब स्कूल की छुट्टी होने वाली थी, तब नीलेश राजपूत स्कूल के बाहर आकर चुपचाप अपने बेटे कार्तिकेय के बाहर निकलने का इंतजार करने लगा। जैसे ही बच्चा स्कूल से बाहर आया, आरोपी ने उसे जबरन अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद वह अपने एक साथी के साथ वहां पहले से तैयार खड़े एक स्कूटर पर बैठकर तेजी से फरार हो गया। पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपियों ने बाद में चंबल नदी के पुल के पास उस स्कूटर को लावारिस हालत में छोड़ दिया। वहां से वे एक अन्य गाड़ी में सवार होकर सीधे पड़ोसी राज्य राजस्थान की सीमा में दाखिल हो गए और वहां छिप गए।
72 घंटे का महाअभियान और सीसीटीवी फुटेज से खुला राज
मासूम बच्चे के गायब होने की सूचना मिलते ही पुलिस की विभिन्न टीमें सक्रिय हो गईं। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जांचकर्ताओं ने घटनास्थल के आसपास लगे कई CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। एक फुटेज में आरोपी पिता साफ तौर पर बच्चे को अपने साथ ले जाता हुआ दिखाई दिया। जब इस फुटेज की बारीकी से जांच की गई तो पता चला कि वारदात में इस्तेमाल किया गया स्कूटर उसी लॉज के मालिक का था जहां आरोपी ठहरे हुए थे। लॉज के मालिक ने भी फुटेज देखकर नीलेश राजपूत की पहचान की, जिससे पुलिस का शक पूरी तरह यकीन में बदल गया।
शुरुआती दौर में बच्चे की मां ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया था कि CCTV फुटेज में दिख रहा शख्स उसका पति नीलेश है। हालांकि, बाद में उसने पुलिस की जांच में पूरा सहयोग दिया। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल फोन की लोकेशन और लगातार मिल रहे सुरागों के आधार पर आरोपियों का पीछा जारी रखा। लगातार 72 घंटों तक चले इस जटिल ऑपरेशन के बाद पुलिस की टीम राजस्थान के पाली जिले तक जा पहुंची। वहां छापेमारी कर पुलिस ने आरोपी नीलेश राजपूत को दबोच लिया और मासूम कार्तिकेय को पूरी तरह सुरक्षित बरामद कर लिया।
'बच्चे को पाली से पूरी तरह सुरक्षित बचा लिया गया है। पिछले 72 घंटों में तकनीकी सबूतों और लगातार की गई जांच से हमें आरोपी का पता लगाने में बड़ी मदद मिली।'
फरार आरोपियों की तलाश जारी, क्षेत्र में तनाव का माहौल
मुरैना पुलिस ने बताया कि इस पूरी किडनैपिंग की वारदात में शामिल नीलेश के दो अन्य साथी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है और पुलिस को उम्मीद है कि उन्हें भी जल्द ही कानून के शिकंजे में ले लिया जाएगा।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में पारिवारिक या आपसी विवादों के कारण बच्चों और महिलाओं को इस तरह की प्रताड़ना का शिकार होना पड़ रहा है। हाल ही में राज्य के बड़वानी जिले से भी एक ऐसा ही मिलता-जुलता मामला सामने आया था, जहां पुलिस ने एक युवती को मोटरसाइकिल पर जबरन ले जा रहे आरोपियों के चंगुल से छुड़ाया था। मुरैना की इस घटना ने एक बार फिर समाज में पारिवारिक रिश्तों के बीच उपजे तनाव और उसके बच्चों पर पड़ने वाले मानसिक व शारीरिक दुष्प्रभावों को उजागर किया है।
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