मामला हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंचा
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित देवरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के नए भवन का विवाद अब न्यायिक प्रक्रिया में पहुंच गया है। स्कूल का भवन पूरी तरह से बनकर तैयार है, लेकिन इसके बावजूद बच्चों को यहां पढ़ाई करने की सुविधा नहीं मिल रही है। इस मामले को लेकर स्थानीय निवासी कुंज लाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश सरकार को निर्देश दिए हैं कि वे एक हफ्ते के भीतर इस मामले में अपना जवाब दाखिल करें। अदालत ने मुख्य रूप से यह सवाल उठाया है कि जब भवन बनकर तैयार खड़ा है, तो फिर उसे छात्रों के लिए क्यों नहीं खोला जा रहा है और क्यों उन्हें मजबूरन दूसरे भवन में पढ़ाई करनी पड़ रही है। इस महत्वपूर्ण मामले की आगामी सुनवाई 22 जुलाई को निर्धारित की गई है।
उद्घाटन के दौरान हुआ था विरोध
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुश दास सूद, नंद लाल ठाकुर और उदयनंद शर्मा ने कोर्ट के समक्ष पूरा घटनाक्रम रखा। अधिवक्ता उदयनंद शर्मा ने विस्तार से बताया कि घटना के दिन शिक्षा मंत्री स्वयं स्कूल के नए भवन का उद्घाटन करने के लिए वहां पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर भी मौजूद थे। सब कुछ योजना के अनुसार चल रहा था और उद्घाटन की पूरी तैयारी थी। यहां तक कि स्कूल प्रबंधन ने उद्घाटन के लिए आमंत्रण कार्ड और पोस्टर भी छपवाए थे। हालांकि, जब कार्यक्रम के दौरान अतिथि भोजन के लिए गए, तो अचानक उद्घाटन पट्टिका को हटा दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद मंत्री और पूर्व मंत्री वहां से वापस चले गए। इसके बाद से ही स्कूल विभाग इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है और कोई ठोस जानकारी नहीं दी जा रही है।
प्रियंका गांधी के हाथों उद्घाटन की इच्छा
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की मुख्य वजह राजनीतिक बताई जा रही है। सुक्खू सरकार चाहती है कि इस नए स्कूल भवन का उद्घाटन प्रियंका गांधी के हाथों से हो। इसका कारण यह है कि वर्ष 2023 में जब हिमाचल प्रदेश में भीषण प्राकृतिक आपदा आई थी, उस दौरान प्रियंका गांधी ने देवरी का दौरा किया था और स्कूल के क्षतिग्रस्त भवन को देखने के बाद नए भवन के निर्माण का वादा किया था। सरकार ने उनके इस वादे को सम्मान देते हुए प्राथमिकता के आधार पर भवन का निर्माण कार्य पूरा करवाया। अब स्थिति यह है कि जब शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर खुद उद्घाटन के लिए पहुंच गए थे, तब भी उन्हें ऐन मौके पर रोक दिया गया। सरकार की इस जिद के कारण बच्चों को नए भवन में शिक्षा के लाभ से वंचित रखा जा रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी रोष है।
सरकार के खिलाफ वकील का रुख
दिलचस्प बात यह है कि इस कानूनी लड़ाई में सरकार के खिलाफ खड़े होने वाले वकीलों में से एक, उदयनंद शर्मा, स्वयं कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुए हैं। वे देवरी क्षेत्र के ही मूल निवासी हैं। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने पार्टी की विचारधारा से ऊपर उठकर स्थानीय लोगों की समस्या को प्राथमिकता दी है और छात्रों के भविष्य के लिए सरकार के खिलाफ अदालत में पैरवी करने का निर्णय लिया है। उन्होंने अन्य अधिवक्ताओं के साथ मिलकर इस मामले को मजबूती से रखा है।
विपक्ष का निशाना और भवन की लागत
इस मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी सुक्खू सरकार को घेरा है। उन्होंने शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की स्थिति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि मंत्री में थोड़ी भी नैतिकता शेष है, तो उन्हें इस अपमानजनक घटना के बाद अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। गौरतलब है कि इस आधुनिक स्कूल भवन का निर्माण कुल पौने पांच करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। लोगों का कहना है कि जब सरकार ने इतने बड़े बजट से भवन का निर्माण कर लिया है, तो राजनीति के कारण इसे ताले में बंद रखना पूरी तरह से गलत है। अब सबकी निगाहें 22 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सरकार को कोर्ट के सवालों का सामना करना होगा।
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