पहलवानों के अखाड़े में मुगदर और गदा का क्यों है खास महत्व, जानिए कैसे इन पारंपरिक औजारों से तैयार होता है फौलादी शरीर

कुश्ती के अखाड़े में आज भी आधुनिक मशीनों के बजाय पारंपरिक औजारों का बोलबाला है। समस्तीपुर के जिला केसरी विशेश्वर ठाकुर ने विस्तार से बताया कि मुगदर, गदा और डमपल कैसे पहलवानों की ताकत और सहनशक्ति को नई ऊंचाई देते हैं।

अखाड़े में पारंपरिक औजारों की अहमियत

कुश्ती का खेल केवल दांव-पेंच और तकनीकी कौशल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे पहलवानों की वर्षों की कठिन मेहनत और उनकी डाइट का भी बड़ा हाथ होता है। अखाड़े में पसीना बहाने वाले पहलवान अपनी शारीरिक क्षमता को बढ़ाने के लिए आज भी उन पारंपरिक औजारों पर भरोसा करते हैं, जिनका इस्तेमाल उनके पूर्वज किया करते थे। समस्तीपुर के जिला केसरी विशेश्वर ठाकुर ने बताया कि आधुनिक फिटनेस मशीनों के दौर में भी मुगदर, गदा और डमपल जैसे औजारों की महत्ता कम नहीं हुई है। ये उपकरण न केवल शरीर को फौलादी बनाते हैं, बल्कि खिलाड़ी को प्राकृतिक रूप से ताकतवर और संतुलित भी रखते हैं।

मुगदर, गदा और डमपल का अलग-अलग कार्य

विशेश्वर ठाकुर के अनुसार, अखाड़े में इस्तेमाल होने वाला हर औजार अपने आप में विशिष्ट है और शरीर के अलग-अलग अंगों पर काम करता है। इन उपकरणों के मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:

  • मुगदर: इसे घुमाने से कंधों, बाजुओं और सीने की मांसपेशियों में जबरदस्त खिंचाव आता है, जिससे वे अधिक शक्तिशाली बनती हैं।
  • गदा: गदा का मुख्य उपयोग शरीर का स्टैमिना यानी सहनशक्ति को बढ़ाने के लिए किया जाता है। साथ ही, यह पकड़ को मजबूत बनाने और पूरे शरीर में बेहतर संतुलन विकसित करने में सहायक है।
  • डमपल: विभिन्न भार वाले पारंपरिक डमपल मसल्स को विकसित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। यह सीने को चौड़ा और सुडौल बनाने के साथ-साथ शरीर की कुल ताकत को भी बढ़ाता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अखाड़े में कई श्रेणियों के डमपल और अन्य वजनदार औजार मौजूद होते हैं। हर पहलवान अपनी शारीरिक आवश्यकता और ट्रेनिंग के स्तर के हिसाब से इनका चयन करता है।

आधुनिक जिम पर भारी पड़ते हैं पारंपरिक तरीके

विशेश्वर ठाकुर का मानना है कि आधुनिक जिम की मशीनें अपनी जगह हैं, लेकिन पारंपरिक औजारों से मिलने वाली ताकत अधिक टिकाऊ और स्वाभाविक होती है। उनका कहना है कि इन उपकरणों के साथ अभ्यास करने से शरीर में न केवल लचीलापन आता है, बल्कि सहनशक्ति भी लंबे समय तक बनी रहती है। केवल औजार उठा लेना काफी नहीं है, बल्कि इन पर महारत हासिल करने के लिए सही तकनीक और निरंतरता बेहद आवश्यक है। आज भी कई बड़े पहलवान अपनी नियमित दिनचर्या में आधुनिक जिम के साथ-साथ गदा और मुगदर को प्रमुखता देते हैं, ताकि उनका शरीर कुश्ती की कठिन चुनौतियों के लिए तैयार रहे।

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