कोचिंग सेंटर हादसे में CBI की ओर से फाइनल रिपोर्ट
दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित RAU's IAS कोचिंग सेंटर में घटी दुखद घटना, जिसमें तीन सिविल सेवा अभ्यर्थियों की जान चली गई थी, के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने अपनी सप्लीमेंट्री फाइनल रिपोर्ट अदालत में पेश कर दी है। इस मामले में जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में नगर निगम यानी MCD के वरिष्ठ अधिकारियों को बड़ी राहत दी है। CBI का स्पष्ट कहना है कि विस्तृत जांच के दौरान उन्हें ऐसा कोई ठोस या विश्वसनीय प्रमाण हाथ नहीं लगा है, जिससे यह साबित हो सके कि निगम के किसी भी वरिष्ठ अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग किया या जानबूझकर कोई आपराधिक लापरवाही बरती। इन्हीं आधारों को पुख्ता करते हुए एजेंसी ने इन अधिकारियों के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है और उन्हें अभियोजन की कार्यवाही से बाहर रखने का आग्रह किया है।
27 जुलाई 2024 की वह काली रात
यह दर्दनाक घटना 27 जुलाई 2024 को घटित हुई थी, जिसने देश भर में हलचल पैदा कर दी थी। भीषण बारिश के कारण कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में अचानक पानी भर गया, जिसकी वजह से वहां अध्ययन कर रहे तीन UPSC अभ्यर्थी बाहर नहीं निकल सके और उनकी मौत हो गई। मृतकों में उत्तर प्रदेश की 25 वर्षीय श्रेया यादव, तेलंगाना की 25 वर्षीय तान्या सोनी और केरल के 24 वर्षीय नेविन डेल्विन शामिल थे। इस हादसे ने पूरे देश के कोचिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली, उनके बेसमेंट के अवैध इस्तेमाल और सरकारी तंत्र की सुस्ती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
अदालत और प्रदर्शनकारी छात्रों का रुख
हादसे के बाद दिल्ली समेत देशभर के छात्रों में भारी आक्रोश देखने को मिला था। छात्रों का तर्क था कि यदि प्रशासन ने समय रहते सुरक्षा नियमों का पालन कराया होता और बेसमेंट के अवैध संचालन पर कार्रवाई की होती, तो इन युवाओं की जान बच सकती थी। छात्रों के बढ़ते दबाव और गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने मामले में हस्तक्षेप किया और जांच दिल्ली पुलिस से लेकर CBI को सौंप दी। अदालत का स्पष्ट निर्देश था कि जांच एजेंसी यह पता लगाए कि क्या इस त्रासदी के पीछे किसी सरकारी अधिकारी की मिलीभगत, भ्रष्टाचार या उनके कर्तव्य निर्वहन में कोई गंभीर चूक थी।
जांच का दायरा और साक्ष्यों का विश्लेषण
CBI ने अपनी जांच की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में संबंधित व्यक्तियों और गवाहों के बयान दर्ज किए। एजेंसी ने इस पूरे मामले से जुड़ी MCD की फाइलों, कोचिंग सेंटर के निर्माण संबंधी दस्तावेजों, निरीक्षण रिपोर्टों और बारिश के दिन जलभराव से जुड़े तकनीकी पहलुओं का गहनता से अध्ययन किया। जांच का मुख्य केंद्र यह पता लगाना था कि क्या MCD के किसी अधिकारी ने नियमों के खुले उल्लंघन के बावजूद मिलीभगत की या जानबूझकर आंखें मूंदे रखीं। हालांकि, जांच एजेंसी ने अदालत को स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत मौजूद नहीं है जो किसी वरिष्ठ अधिकारी की आपराधिक जिम्मेदारी को तय करने के लिए पर्याप्त हो।
कानूनी स्थिति और क्लोजर रिपोर्ट का निहितार्थ
CBI की क्लोजर रिपोर्ट का अर्थ यह कतई नहीं है कि घटना को सिरे से खारिज किया गया है। इसका सीधा कानूनी मतलब यह है कि मौजूदा सबूतों के आधार पर किसी वरिष्ठ अधिकारी पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिल सके हैं। कानून के जानकारों के अनुसार, किसी आपराधिक मामले में केवल संदेह के आधार पर अधिकारियों को आरोपी नहीं बनाया जा सकता, इसके लिए प्रत्यक्ष और ठोस दस्तावेजी प्रमाण अनिवार्य होते हैं। भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक लापरवाही का मामला चलाने के लिए जो साक्ष्य आवश्यक हैं, वे इस मामले में सामने नहीं आए हैं।
शहर में सुरक्षा मानकों पर बहस
इस दुखद घटना ने दिल्ली भर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को एक नई बहस के केंद्र में ला दिया था। घटना के फौरन बाद प्रशासन ने राजधानी के कई कोचिंग सेंटरों के बेसमेंट सील कर दिए थे। साथ ही, फायर सेफ्टी नियमों, भवन निर्माण उपनियमों और आपदा प्रबंधन मानकों की सख्ती से समीक्षा की गई। कई कोचिंग संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और स्थानीय प्रशासन ने अवैध निर्माण के खिलाफ एक बड़ा अभियान भी छेड़ा ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना को दोहराने से रोका जा सके।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
CBI का अंतिम निष्कर्ष यही है कि उपलब्ध दस्तावेजों और गवाहों के बयानों से यह नहीं निकलता कि वरिष्ठ MCD अधिकारियों ने किसी आपराधिक मंशा या कर्तव्य के प्रति जानबूझकर लापरवाही की थी। अब इस पूरी रिपोर्ट के आधार पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार संबंधित अदालत का है। अदालत के पास यह अधिकार है कि वह CBI की इस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करे, इसे खारिज कर दे, या फिर मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की जांच के लिए निर्देश जारी करे। अब सब कुछ न्यायालय के रुख पर निर्भर करता है कि वे इस मामले में क्या फैसला सुनाते हैं।
https://www.indiatv.in/delhi/delhi-cbi-closure-report-in-old-rajendra-nagar-raus-ias-tragedy-student-death-case-no-evidence-of-criminal-negligence-found-about-senior-mcd-officials-2026-07-13-1230860