ज्ञानवापी, मथुरा और संभल विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने विशेष लोक अदालत के जरिए सुलह की पहल की

सुप्रीम कोर्ट ने देश के प्रमुख धार्मिक विवादों को अदालती कार्यवाही के बजाय बातचीत से सुलझाने के लिए विशेष लोक अदालत का सहारा लेने का निर्णय लिया है। 21 से 23 अगस्त तक होने वाली इस प्रक्रिया में ज्ञानवापी, मथुरा और संभल के मामलों पर हिंदू और मुस्लिम पक्षों को बुलाया गया है।

सुलह के लिए नई पहल

सुप्रीम कोर्ट ने देश के सबसे जटिल और संवेदनशील धार्मिक विवादों को हल करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। न्यायालय ने वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद मामला, मथुरा के श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद और संभल के हरि मंदिर-मस्जिद विवाद को सुलझाने के लिए एक विशेष लोक अदालत का रास्ता चुना है। सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित होने वाले इस समाधान समारोह का मुख्य उद्देश्य वर्षों से चल रही कानूनी खींचतान को खत्म कर आपसी सहमति से शांतिपूर्ण रास्ता निकालना है। इस विशेष पहल के लिए कोर्ट ने संबंधित हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों को नोटिस भेजकर आमंत्रित किया है। यह प्रक्रिया 21, 22 और 23 अगस्त के बीच संपन्न की जाएगी।

लोक अदालत से पहले बातचीत की कोशिशें

इस बड़ी पहल से पहले भी सुलह की कोशिशें जमीनी स्तर पर जारी हैं। निचली अदालतों में मध्यस्थता की प्रक्रिया 21 अप्रैल से ही चल रही है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, ज्ञानवापी मामले में 14 जुलाई को सुलह से पूर्व की सुनवाई तय की गई है। वहीं, मथुरा के विवाद में मध्यस्थता की कोशिशें 5 जुलाई को विफल रही थीं, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को विशेष लोक अदालत के दायरे में लाने का फैसला किया। शीर्ष अदालत चाहती है कि इन विवादों का निपटारा कानून की लंबी प्रक्रिया के बजाय सौहार्दपूर्ण बातचीत से हो सके।

ज्ञानवापी मस्जिद मामला

वाराणसी का ज्ञानवापी विवाद इस दावे पर टिका है कि मुगल शासन काल के दौरान पुराने काशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त कर इस मस्जिद का निर्माण किया गया था। इस मामले में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें हिंदू पक्ष मस्जिद परिसर के अंदर पूजा के अधिकार की मांग कर रहा है। यहाँ कानूनी पेंच पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 को लेकर भी है, जो 15 अगस्त 1947 को मौजूद किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक स्वरूप को बनाए रखने का निर्देश देता है। दूसरी तरफ, अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति का कहना है कि यह पूरा मामला अधिनियम का उल्लंघन है और ये याचिकाएं विचार करने योग्य नहीं हैं। फिलहाल अदालतों में सर्वे रिपोर्ट और पूजा अधिकारों को लेकर सुनवाई चल रही है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह

मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा यह विवाद भगवान कृष्ण के जन्मस्थान के दावे को लेकर है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मुगल शासक औरंगजेब के फरमान पर मंदिर को तोड़कर वहां मस्जिद बनाई गई थी। हिंदू पक्ष के पास कथित रूप से ऐसे साक्ष्य हैं जो वहां मंदिर के अस्तित्व की पुष्टि करते हैं। इस जमीन को वापस पाने और मस्जिद हटाने की मांग वाली याचिकाओं का शाही ईदगाह मस्जिद समिति कड़ा विरोध कर रही है। समिति ने भी अपनी दलीलों में पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 का हवाला दिया है और इन मुकदमों को खारिज करने की मांग की है।

संभल जामा मस्जिद का विवाद

संभल का मामला तब चर्चा में आया जब एक सिविल कोर्ट ने शाही जामा मस्जिद के सर्वे का आदेश जारी किया। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि यह जगह मूल रूप से हरिहर मंदिर की है। पिछले साल नवंबर में इस सर्वे के आदेश के बाद इलाके में भारी हिंसा भड़क गई थी, जिसमें जानमाल का काफी नुकसान हुआ था। सुप्रीम कोर्ट अभी भी इन तीनों मामलों पर समग्र कानूनी दृष्टिकोण से विचार कर रहा है, जिसमें पूजा स्थल कानून की व्याख्या सबसे महत्वपूर्ण है। अदालत यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इन संवेदनशील मुद्दों का समाधान संवैधानिक और सामाजिक सौहार्द के दायरे में हो सके।

https://www.indiatv.in/india/national/supreme-court-referred-gyanvapi-mathura-sambhal-disputes-to-special-lok-adalat-2026-07-13-1230836