नीति आयोग की डेल्टा रैंकिंग में सीतामढ़ी का दबदबा, देश भर में हासिल किया तीसरा स्थान

केंद्र सरकार के नीति आयोग द्वारा जारी आकांक्षी जिलों की नवीनतम डेल्टा रैंकिंग में बिहार के सीतामढ़ी जिले ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। बुनियादी ढांचे और विकास संकेतकों में हुए सुधारों ने इस उपलब्धि को मुमकिन बनाया है।

सीतामढ़ी ने लहराया परचम

बिहार के सीतामढ़ी जिले ने विकास की दौड़ में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। केंद्र सरकार के नीति आयोग द्वारा जारी की गई आकांक्षी जिलों की मार्च 2026 की डेल्टा रैंकिंग में सीतामढ़ी ने पूरे देश में तीसरा स्थान हासिल कर अपनी अलग पहचान बनाई है। नीति आयोग के चैम्पियंस ऑफ डैशबोर्ड पर आधारित यह रैंकिंग जनवरी से मार्च 2026 की अवधि के लिए जारी की गई है। इस उपलब्धि ने न केवल जिले बल्कि पूरे बिहार राज्य को गौरवान्वित किया है।

बुनियादी ढांचे में हुआ बड़ा सुधार

सीतामढ़ी की इस सफलता के पीछे सबसे बड़ी वजह बुनियादी ढांचे यानी इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिकेटर के क्षेत्र में किया गया बेहतरीन कार्य है। जिले ने न केवल बुनियादी ढांचे में सुधार किया है, बल्कि पांच प्रमुख विकास संकेतकों के समग्र परिणामों में भी जबरदस्त प्रदर्शन दिखाया है। देश भर के कुल 112 आकांक्षी जिलों के बीच सीतामढ़ी का तीसरा स्थान पर आना प्रशासन की कड़ी मेहनत और बेहतर कार्ययोजना को दर्शाता है।

विकास कार्यों की समीक्षा और भावी योजना

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के बाद जिले में विकास की रफ्तार को और तेज करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता बढ़ गई है। शुक्रवार को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव और नोडल अधिकारी संजय अग्रवाल ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। समाहरणालय में आयोजित इस बैठक में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में जिलाधिकारी रिची पांडेय, उप विकास आयुक्त संदीप कुमार, जिला योजना अधिकारी संतोष कुमार सुमन और सहायक योजना अधिकारी अमित कुमार मौजूद रहे। इस दौरान आगामी विकास कार्यों और भावी योजनाओं की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा की गई।

सीमित संसाधनों में मिली बड़ी कामयाबी

संयुक्त सचिव संजय अग्रवाल ने जिलाधिकारी रिची पांडेय के नेतृत्व में जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सीतामढ़ी ने सीमित संसाधनों के बावजूद जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग और नए प्रयोगों के जरिए विकास संकेतकों में जो सुधार किया है, वह काबिले तारीफ है। यह उपलब्धि अन्य आकांक्षी जिलों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। अधिकारियों का मानना है कि यह पूरी टीम की सामूहिक मेहनत का परिणाम है।

भविष्य के लिए नई उम्मीदें

डीपीआरओ कमल सिंह ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में किए गए निरंतर प्रयासों का यह सुखद परिणाम है। प्रशासन का अब मुख्य लक्ष्य इन सुधारों को बरकरार रखना और बाकी बची कमियों को दूर करना है। एक विशेष कार्ययोजना के तहत काम किया जा रहा है ताकि आने वाले समय में सीतामढ़ी देश के सबसे विकसित जिलों की श्रेणी में मजबूती से खड़ा हो सके। प्रशासन के अनुसार, यह उपलब्धि विकास की एक शुरुआत है और आने वाले दिनों में और भी बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।

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