अमेरिकी सांसद लिंड्से ग्राहम का 71 साल की उम्र में निधन, भारत को लेकर दिए बयानों से चर्चा में थे

अमेरिका के प्रमुख रिपब्लिकन सीनेटर लिंड्से ग्राहम का अचानक निधन हो गया है। वे रूसी तेल खरीद के मामले में भारत पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की मांग करने के कारण काफी चर्चा में रहे थे।

दुनिया को अलविदा कह गए लिंड्से ग्राहम

अमेरिकी राजनीति की एक बड़ी हस्ती और रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ सांसद लिंड्से ग्राहम का 71 साल की उम्र में आकस्मिक निधन हो गया है। उनके निधन की खबर ने अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर पैदा कर दी है। ग्राहम लंबे समय से अमेरिकी सीनेट में सक्रिय थे और उन्हें विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में एक प्रभावशाली चेहरा माना जाता था। हालांकि उनकी मौत के सटीक कारणों का अभी खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन उनके कार्यालय से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 11 जुलाई की शाम अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके परिवार ने इस दुखद घड़ी में समर्थकों से प्रार्थना की अपील की है।

सीनेट में लंबा सफर और राजनीतिक रसूख

दक्षिण कैरोलिना का प्रतिनिधित्व करने वाले लिंड्से ग्राहम का राजनीतिक करियर काफी लंबा और प्रभावशाली रहा। वे 2003 से लगातार अमेरिकी सीनेट के सदस्य बने हुए थे। सीनेट में आने से पहले, उन्होंने 1995 में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में कदम रखा था और वहां लगातार चार कार्यकाल तक सेवा दी थी। वे रिपब्लिकन पार्टी के भीतर न्यायिक मामलों और विदेश नीति पर एक मजबूत पकड़ रखने वाले नेता के रूप में जाने जाते थे।

डोनाल्ड ट्रंप के साथ बदलते रिश्ते

ग्राहम का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। एक समय था जब वे डोनाल्ड ट्रंप के सबसे मुखर आलोचकों में गिने जाते थे, लेकिन समय के साथ उनके संबंध पूरी तरह बदल गए और वे ट्रंप के सबसे करीबी समर्थकों में से एक बन गए। उनके निधन पर डोनाल्ड ट्रंप ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर अपने संदेश में कहा कि लिंड्से ग्राहम उनके लिए सबसे बेहतरीन लोगों और सीनेटरों में से थे। उन्होंने उन्हें एक सच्चा अमेरिकी देशभक्त बताते हुए कहा कि उनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी।

भारत के प्रति रुख और विवादित बयान

लिंड्से ग्राहम का नाम भारत में भी काफी चर्चाओं में रहा, लेकिन इसका मुख्य कारण उनके द्वारा भारत के खिलाफ दिए गए कड़े बयान थे। हाल के महीनों में उन्होंने भारत के रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया था। उन्होंने डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल के साथ मिलकर सैंक्शनिंग रशिया एक्ट पेश किया था, जिसका उद्देश्य रूस से ऊर्जा संसाधन खरीदने वाले देशों पर कड़ा शिकंजा कसना था। इस प्रस्तावित कानून में भारत जैसे देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की वकालत की गई थी। ग्राहम का मानना था कि जब तक भारत रूसी तेल की खरीद बंद नहीं करता, तब तक भारत और अमेरिका के संबंध पूरी मजबूती के साथ आगे नहीं बढ़ सकते। उन्होंने भारत पर आरोप लगाया था कि रूसी तेल की खरीदारी से रूस को युद्ध जारी रखने के लिए आर्थिक मदद मिल रही है।

पाकिस्तान को भी नहीं बख्शा

यह कहना गलत नहीं होगा कि ग्राहम का रुख सिर्फ भारत के खिलाफ ही नहीं था। वे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने कई बार पाकिस्तान पर भी जमकर निशाना साधा था। इसी साल एक रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया था कि उन्हें पाकिस्तान पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है। उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री से तीखे सवाल पूछे थे कि जब पाकिस्तान पर ईरानी सैन्य विमानों को पनाह देने जैसे आरोप लगे हों, तो उसे निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में कैसे देखा जा सकता है। ग्राहम का यह दोमुंहा राजनीतिक अंदाज उन्हें हमेशा खबरों में बनाए रखता था, चाहे वह समर्थन हो या विरोध।

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