अमेरिका में भीषण हीटवेव का प्रकोप, 4.4 करोड़ लोग खतरे की जद में, तापमान 43 डिग्री पार करने की आशंका

अमेरिका के कई राज्यों में गर्मी का कहर जारी है, जिसके चलते 4.4 करोड़ से अधिक लोग हीटवेव की चेतावनी वाले इलाकों में रहने को मजबूर हैं। बढ़ती तपिश ने न केवल सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि जंगलों की आग बुझाने के राहत कार्यों में भी बाधा डाल दी है।

अमेरिका में भीषण गर्मी से हाहाकार

इस समय दुनिया का एक बड़ा हिस्सा भीषण मौसम की मार झेल रहा है। जहां एक ओर पूर्वी एशिया भारी बारिश और विनाशकारी तूफानों से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर यूरोप और अमेरिका भीषण गर्मी की चपेट में हैं। अमेरिका में गर्मी ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। देश के विभिन्न हिस्सों में हीटवेव का असर इतना अधिक है कि लगभग 4.4 करोड़ लोग मौसम विभाग द्वारा जारी की गई चेतावनी वाले क्षेत्रों में रह रहे हैं।

तापमान में बढ़ोतरी और पुराने रिकॉर्ड टूटने का अंदेशा

अमेरिकी नेशनल वेदर सर्विस यानी NWS ने लोगों को गंभीर चेतावनी दी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले वीकेंड के दौरान देश के कई राज्यों में पारा 43 डिग्री सेल्सियस यानी 110 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच सकता है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि गर्मी के पुराने रिकॉर्ड इस बार टूट सकते हैं। रॉकी माउंटेन क्षेत्र और उत्तरी मैदानी राज्यों में वर्तमान में सामान्य से काफी अधिक तापमान दर्ज किया जा रहा है। विशेष रूप से रविवार के दिन हालात बेहद गंभीर होने का अनुमान है।

मोंटाना और नॉर्थ डकोटा जैसे राज्यों में तापमान के 100 से 110 डिग्री फारेनहाइट के बीच रहने की आशंका है। इसके अलावा, साल्ट लेक सिटी में भी प्रचंड गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक तापमान लगातार 100 डिग्री फारेनहाइट से ऊपर बने रहने की उम्मीद है। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचें और खुद को हाइड्रेटेड रखने के लिए पर्याप्त पानी का सेवन करें।

जंगलों की आग पर नियंत्रण पाना चुनौती

भीषण गर्मी का नकारात्मक असर केवल शहरी आबादी तक ही सीमित नहीं है। कोलोराडो और यूटा में जंगलों में लगी आग ने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। अत्यधिक तापमान और शुष्क मौसम के कारण आग बुझाने के अभियान में भारी बाधा आ रही है। गर्मी और सूखी हवाओं के चलते आग के तेजी से फैलने का खतरा बना हुआ है, जिससे स्थानीय वन विभाग और दमकलकर्मियों के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है।

गर्म हवाओं का यह दौर अब दक्षिण-पूर्वी अमेरिका के हिस्सों में भी महसूस किया जा रहा है। मियामी जैसे शहरों में भी तापमान लगातार बढ़ रहा है। उल्लेखनीय है कि शनिवार को ही मियामी में फीफा महिला वर्ल्ड कप का इंग्लैंड और नॉर्वे के बीच क्वार्टर फाइनल मैच आयोजित होना था, जिसे लेकर भी गर्मी का असर चर्चा का विषय रहा।

वैश्विक स्तर पर गर्मी का कहर

यह लगातार दूसरा सप्ताह है जब अमेरिका के विभिन्न क्षेत्र इस भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं। इससे पहले पिछले सप्ताह न्यूयॉर्क और फिलाडेल्फिया जैसे प्रमुख शहरों में पारा लगभग 40 डिग्री सेल्सियस यानी 104 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच गया था।

दुनिया के अन्य हिस्सों की बात करें तो गर्मी ने वैश्विक स्तर पर तबाही मचा रखी है। पश्चिमी यूरोप ने हाल ही में अपने इतिहास का सबसे गर्म जून महीना दर्ज किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के आंकड़ों के अनुसार, इस भीषण हीटवेव के कारण यूरोप में अब तक 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। फ्रांस में स्थिति इतनी विकट हो गई थी कि भीषण गर्मी के चलते एफिल टावर समेत पेरिस के कई प्रमुख पर्यटक स्थलों को तय समय से पहले ही बंद करना पड़ा था।

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