इंडोनेशियाई राष्ट्रपति को पीएम मोदी की खास भेंट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने इंडोनेशिया दौरे के दौरान भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं को दुनिया के मंच पर प्रदर्शित किया। इस यात्रा की सबसे बड़ी चर्चा का विषय इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो को भेंट की गई उत्तराखंड की पारंपरिक ऐपण कला से बनी भगवान शिव की आकृति रही। यह उपहार केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि भारत की सदियों पुरानी ग्रामीण लोक कला का एक उत्कृष्ट नमूना है, जिसने वैश्विक स्तर पर भारतीय कारीगरी का परचम लहराया है।
क्या है उत्तराखंड की प्रसिद्ध ऐपण कला
ऐपण कला उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की एक अत्यंत प्राचीन और समृद्ध लोक कला है। इस कला के बारे में हमारे देश में आम लोगों के बीच जानकारी का दायरा सीमित हो सकता है, लेकिन प्रधानमंत्री के इस कदम ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। ऐपण को मुख्य रूप से उत्तराखंड की महिलाएं शुभ अवसरों और त्योहारों के समय अपने घरों की दीवारों और फर्श पर उकेरती हैं। इसे बनाने की प्रक्रिया बेहद अनूठी है। सबसे पहले गेरू (टेराकोटा लाल रंग) का आधार तैयार किया जाता है, जिसके ऊपर चावल के आटे से बने लेप, जिसे बिस्वार कहा जाता है, उससे बेहद बारीक सफेद पैटर्न बनाए जाते हैं। सबसे खास बात यह है कि इन आकृतियों को बनाने के लिए किसी सांचे या मशीन का उपयोग नहीं होता, बल्कि यह महिलाएं अपने हाथों की सटीकता से पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार बनाती हैं।
भगवान शिव की कलाकृति और उसका महत्व
राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो को दी गई यह विशिष्ट कलाकृति भगवान शिव को समर्पित है। इसमें ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रतीक माने जाने वाले पवित्र ज्यामितीय आकार बनाए गए हैं, जो भारत के आध्यात्मिक और कलात्मक गहरे जुड़ाव को दर्शाते हैं। यह उपहार भारत और इंडोनेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत को भी रेखांकित करता है, जो दोनों देशों के बीच की गहरी दोस्ती और मजबूत रिश्तों का एक सार्थक प्रतीक है।
असम की दुर्लभ मनोहरी गोल्ड टी
प्रधानमंत्री मोदी ने उपहारों की श्रृंखला में भारत की बेहतरीन चाय विरासत को भी शामिल किया। उन्होंने असम की दुर्लभ मनोहरी गोल्ड टी भेंट की, जो दुनिया की सबसे विशिष्ट और आर्टिसनल चायों में से एक मानी जाती है। यह चाय P126 चाय क्लोन की कोमल कलियों से तैयार की जाती है। जून महीने के दौरान होने वाले सेकंड फ्लश सीजन में इसे हाथों से तोड़ा जाता है और रोल किया जाता है। इसके उत्पादन की प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक है, जिसमें इसे धूप में सुखाया जाता है। इस चाय की खासियत यह है कि यह रोजाना केवल 25 ग्राम की मात्रा में ही उत्पादित की जाती है। इसका सुनहरा रंग, हल्का स्वाद और फूलों व माल्टी झलकों वाला जायका इसे दुनिया भर में खास बनाता है। इसमें प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और चाय पॉलीफेनोल प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो भारत की चाय निर्माण की श्रेष्ठता को साबित करते हैं।
कश्मीरी पेपर-मैशे बाउल की अद्भुत नक्काशी
भारतीय हस्तकला की एक और बेहतरीन मिसाल के तौर पर पीएम मोदी ने इंडोनेशियाई राष्ट्रपति को पारंपरिक कश्मीरी पेपर-मैशे बाउल भेंट किया। कागज की लुगदी से तैयार इस कटोरे पर की गई बारीक नक्काशी कश्मीर की मशहूर कला का जीवंत उदाहरण है। इसे हाथ से आकार देने के बाद पारंपरिक तकनीक से फूलों, पक्षियों और सजावटी पैटर्नों से सजाया गया है। इसके बाद इस पर सोने की महीन कारीगरी की गई है और अंत में चमकदार वार्निश की परत चढ़ाई गई है, जो इसे मजबूती और खूबसूरती दोनों प्रदान करती है। यह बाउल घाटी की कलात्मक विरासत, शांति और प्रकृति के साथ तालमेल का एक उत्कृष्ट प्रतीक है।
रिपॉसे शैली की चांदी की सजावटी प्लेट
दौरे के दौरान चांदी की कारीगरी का अद्भुत नमूना भी पेश किया गया। पीएम मोदी द्वारा दी गई पारंपरिक रिपॉसे शैली की चांदी की प्लेट भारत की समृद्ध धातु कला का प्रतीक है। इसे पूरी तरह से हाथ से तैयार किया गया है, जिसमें रिपॉसे और चेजिंग तकनीकों का उपयोग किया गया है। प्लेट के मध्य में कमल का फूल है, जो पवित्रता और ज्ञान का प्रतीक है, जबकि उसके चारों ओर हाथियों, पेड़ों और फूलों की सुंदर नक्काशी की गई है। हाथी बुद्धिमत्ता और शक्ति के साथ-साथ दोनों देशों के बीच वन्यजीव संरक्षण के साझा मूल्यों को भी दर्शाते हैं।
ओडिशा का प्रतिष्ठित इकत
उपहारों की फेहरिस्त में ओडिशा का इकत या बंधा सिल्क भी शामिल था। यह हाथ से बुने रेशम की एक गौरवशाली परंपरा है। इसकी टाई-एंड-डाय तकनीक विश्व प्रसिद्ध है। संबलपुर, नुआपाटना और बरगढ़ जैसे बुनाई केंद्रों में तैयार होने वाला यह कपड़ा अपनी बेहतरीन बनावट और खास घुमावदार डिजाइनों के लिए जाना जाता है। इसके चटख रंग और अनोखे पैटर्न ओडिशा की लोक कथाओं और कलात्मक उत्कृष्टता को एक शानदार कैनवास की तरह दुनिया के सामने पेश करते हैं।
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