समाज के सामने रखी मानवता की अनूठी मिसाल
आज के दौर में जब हर तरफ जमीन और संपत्ति को लेकर विवाद और स्वार्थ की खबरें सुनाई देती हैं, वहीं बिहार के भोजपुर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जो किसी को भी भावुक कर सकती है। सखुआं पंचायत के मुखिया राकेश सिंह ने अपनी बेटी के पांचवें जन्मदिन के मौके पर एक ऐसा निर्णय लिया, जिसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है। उन्होंने अपनी 18 कट्ठा निजी जमीन उन महादलित और गरीब परिवारों के नाम कर दी, जिनके पास सिर छिपाने के लिए अपना कोई ठिकाना नहीं है।
घर बनाने के उद्देश्य से दिया बड़ा दान
मुखिया राकेश सिंह का यह कदम केवल एक दान नहीं है, बल्कि उन परिवारों के लिए एक नई उम्मीद की किरण है जो लंबे समय से जमीन के अभाव में बेघर रहने को मजबूर थे। राकेश सिंह का मानना है कि किसी भी परिवार के लिए अपना घर होना सबसे बड़ी सुरक्षा और सहारा होता है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी जमीन किसी जरूरतमंद के काम आ सके और वहां गरीब परिवार सम्मान के साथ अपना आशियाना बना सकें, तो इससे बढ़कर उन्हें कोई आत्मिक संतोष नहीं मिल सकता। यह जमीन विशेष रूप से उन लोगों को दी गई है जिनके पास घर निर्माण के लिए जगह की भारी कमी थी।
दो दशक से जनसेवा में सक्रिय
राकेश सिंह का व्यक्तित्व केवल एक राजनीतिक प्रतिनिधि तक सीमित नहीं है, बल्कि वे लंबे समय से एक समर्पित जनसेवक के रूप में जाने जाते हैं। वे वर्ष 2001 से लगातार जरूरतमंद लोगों की आर्थिक और सामाजिक सहायता कर रहे हैं। उनकी सेवा भावना का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2016 से वे लगातार सखुआं पंचायत के मुखिया के पद पर कार्य कर रहे हैं और पंचायत के हर वर्ग का विश्वास उन्होंने जीता है। ग्रामीणों के अनुसार, मुखिया जी सदैव गरीबों, मजदूरों और बुजुर्गों के सुख-दुख में उनके साथ खड़े रहते हैं।
पंचायत में जनसेवक की छवि
मुखिया राकेश सिंह की कार्यशैली के कारण पंचायत में उनकी एक अलग पहचान बनी है। उनकी नियमित गतिविधियों में शामिल हैं:
- जरूरतमंदों को हर साल बड़ी संख्या में भोजन और राशन सामग्री उपलब्ध कराना।
- ठंड के मौसम में गरीबों के बीच कंबलों का वितरण करना।
- आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को चिकित्सा या अन्य जरूरतों के लिए तत्काल आर्थिक मदद देना।
- समाज के पिछड़े वर्गों की बुनियादी समस्याओं का व्यक्तिगत स्तर पर समाधान करना।
यही कारण है कि वे जनता के बीच एक जनसेवक के तौर पर पहचाने जाते हैं। वे केवल प्रशासनिक कार्य ही नहीं करते, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व को भी पूरी निष्ठा से निभाते हैं।
बेटियों को समर्पित जन्मदिन का उत्सव
मुखिया राकेश सिंह का मानना है कि बेटियां समाज की असली शक्ति और धरोहर होती हैं। अपनी बेटी के जन्मदिन को उन्होंने केवल केक काटने या दावत देने जैसे सामान्य उत्सव तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे एक ऐसे नेक कार्य में बदल दिया जो समाज के कमजोर वर्ग के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सके। उन्होंने समाज के समक्ष एक संदेश रखा है कि यदि समाज का समर्थ वर्ग थोड़ा सा भी अपना हिस्सा जरूरतमंदों के नाम करे, तो किसी भी परिवार को बेघर होने की त्रासदी नहीं झेलनी पड़ेगी।
ग्रामीणों में सराहना और प्रेरणा
सखुआं पंचायत के ग्रामीणों ने मुखिया के इस साहसिक और संवेदनशील निर्णय की दिल खोलकर सराहना की है। लोगों का कहना है कि यह कदम केवल कुछ परिवारों को जमीन दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज को संवेदनशीलता का पाठ पढ़ाता है। राकेश सिंह की यह पहल दिखाती है कि जीवन की सच्ची खुशी दूसरों की समस्याओं को दूर करने और उनके चेहरे पर मुस्कान लाने में है। भोजपुर की इस प्रेरणादायक कहानी ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि मन में सेवा का भाव हो और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो एक अकेला व्यक्ति भी कई परिवारों का भविष्य संवार सकता है और समाज को नई दिशा दे सकता है।
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