आषाढ़ अमावस्या: राशि के अनुसार दान करने से प्रसन्न होंगे पितृ, मिलेगा सात पीढ़ियों का सुख और समृद्धि का आशीर्वाद

आषाढ़ अमावस्या पर दान-पुण्य का विशेष महत्व है। उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, अपनी राशि के अनुरूप उपाय करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार पर विशेष कृपा बनी रहती है।

आषाढ़ अमावस्या का धार्मिक महत्व

हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ़ का महीना दान, पुण्य और भक्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस महीने में आने वाली अमावस्या की तिथि का भी अपना विशेष आध्यात्मिक महत्व है। हालांकि सालभर में कुल 12 अमावस्या आती हैं, लेकिन आषाढ़ मास की अमावस्या को पितरों की शांति और कृपा प्राप्ति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ पूर्वजों का तर्पण और पिंडदान करना अत्यंत फलदायी होता है। उज्जैन के जाने-माने आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, यदि इस विशेष दिन पर जातक अपनी राशि के आधार पर दान-पुण्य के कार्य करते हैं, तो इससे पितृ अत्यंत प्रसन्न होते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद सात पीढ़ियों तक बना रहता है।

आषाढ़ अमावस्या की सही तिथि और समय

वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ कृष्ण अमावस्या तिथि का प्रारंभ 13 जुलाई को सोमवार के दिन शाम 6 बजकर 49 मिनट के आसपास होगा। यह तिथि अगले दिन 14 जुलाई मंगलवार को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट तक प्रभावी रहेगी। उदयातिथि के नियमों को ध्यान में रखते हुए, आषाढ़ अमावस्या का पर्व 14 जुलाई को ही मनाया जाना उचित है। इसी दिन पवित्र स्नान, दान, तर्पण और श्राद्ध जैसे धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे।

राशि के अनुसार करें दान के उपाय

आचार्य आनंद भारद्वाज ने विभिन्न राशियों के लिए दान के विशेष उपाय बताए हैं, जिनसे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है:

  • मेष: इस राशि के लोगों को अपने पितरों की शांति के लिए जल, गुड़ और गेहूं का दान करना चाहिए।
  • वृषभ: पितरों को प्रसन्न करने के लिए जरूरतमंद व्यक्तियों को धन और अन्न का दान करना अत्यंत शुभ फलदायी होगा।
  • मिथुन: इस राशि के जातकों को गन्ने के रस और शीतल जल का दान करने की सलाह दी जाती है।
  • कर्क: पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए सफेद खाद्य वस्तुओं और अपनी क्षमतानुसार धन का दान करें।
  • सिंह: इस राशि के जातक गुड़, चना और शुद्ध शहद का दान कर पितरों की प्रसन्नता प्राप्त कर सकते हैं।
  • कन्या: घी में बने हुए हरे भोज्य पदार्थों का दान करना इस राशि के लिए उत्तम है, इससे पितृ देव प्रसन्न होते हैं।
  • तुला: इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना और निर्धनों को सफेद वस्तुओं का दान करना लाभकारी माना गया है।
  • वृश्चिक: पितरों के आशीर्वाद के लिए गुड़ और लाल वस्त्रों का दान करना वृश्चिक राशि के जातकों के लिए श्रेष्ठ रहेगा।
  • धनु: इस राशि के लोग मिठाई, केला और पीले रंग के वस्त्रों का दान करके पितरों को खुश कर सकते हैं।
  • मकर: मकर राशि के जातकों के लिए काली उड़द और तिल का दान करना विशेष शुभ परिणाम लेकर आता है।
  • कुंभ: इस दिन पितरों के निमित्त धन के साथ-साथ जूते-चप्पलों का दान करना भी बहुत पुण्यकारी माना गया है।
  • मीन: मीन राशि के जातकों को शीतल जल और पीले रंग की खाद्य सामग्री का दान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होगा।

आषाढ़ अमावस्या के दिन किए गए इन कार्यों का उद्देश्य केवल धर्म-कर्म ही नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करना और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लेना भी है। इन उपायों को अपनाकर कोई भी जातक अपने पितरों का आशीष प्राप्त कर सकता है।

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