मानसून का आगमन हो चुका है और देश के कई हिस्सों में लगातार बारिश का सिलसिला जारी है। बारिश के इस मौसम में सड़कें गीली और काफी फिसलन भरी हो जाती हैं। ऐसे में सड़कों पर वाहन चलाना काफी जोखिम भरा हो सकता है और जरा सी भी लापरवाही बड़े हादसे का रूप ले सकती है। अक्सर देखा जाता है कि बारिश के दिनों में बेहद अनुभवी ड्राइवरों की गाड़ियां भी अनियंत्रित होकर सड़क पर फिसल जाती हैं। इस मौसम में सड़क पर सुरक्षित बने रहने के लिए आपके वाहन के टायरों का सही स्थिति में होना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। इसीलिए बारिश का मौसम पूरी तरह सक्रिय होने से पहले गाड़ी के टायरों की अच्छी तरह से जांच-परख कर लेना बहुत आवश्यक है।
जमशेदपुर के वरिष्ठ टायर टेक्नीशियन जे. भूषण इस संबंध में कुछ बेहद जरूरी और काम के सुरक्षा टिप्स साझा कर रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप किसी भी अनहोनी से बच सकते हैं।
मानसून में टायरों की देखभाल के लिए इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- टायर की ग्रिप और ट्रेड: टायर की सतह पर बने खांचों की गहराई की नियमित जांच करें ताकि सड़क पर पकड़ मजबूत रहे।
- सही एयर प्रेशर: टायर में हवा का दबाव हमेशा वाहन निर्माता कंपनी के मानकों के अनुसार ही रखें।
- अलाइनमेंट और बैलेंसिंग: गाड़ी के एक तरफ खिंचने की समस्या से बचने के लिए समय पर व्हील अलाइनमेंट कराएं।
- क्षति की पहचान: साइड वॉल पर किसी भी कट, दरार या उभार को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें।
- गति पर नियंत्रण: सड़कों पर पानी जमा होने की स्थिति में गाड़ी की रफ्तार धीमी रखें ताकि हाइड्रोप्लानिंग से बचा जा सके।
टायरों की ग्रिप और ट्रेड की अवश्य करें जांच
जे. भूषण के अनुसार, किसी भी वाहन चालक को सबसे पहले अपने टायरों की ग्रिप और ट्रेड की स्थिति की गहराई से जांच करनी चाहिए। ट्रेड का सीधा मतलब टायर की बाहरी सतह पर बने हुए उन गहरे खांचों से होता है जो सड़क पर पकड़ बनाने का काम करते हैं। बारिश के दौरान सड़क पर फैले पानी को टायर के नीचे से बाहर निकालने का मुख्य काम यही खांचे करते हैं। जब गाड़ी चलती है, तो ये खांचे पानी को रास्ते से हटाकर टायर का सीधा संपर्क सड़क की सतह से बनाए रखते हैं। यदि टायर के ये खांचे अत्यधिक इस्तेमाल के कारण घिस चुके हैं, तो टायर की सड़क पर ग्रिप या पकड़ बहुत कमजोर हो जाती है। ऐसी स्थिति में गीली सड़क पर चलते समय वाहन के अनियंत्रित होकर फिसलने की आशंका बहुत अधिक बढ़ जाती है। इसलिए, यदि आपके वाहन के टायर अधिक घिस गए हैं, तो सुरक्षा के लिहाज से उन्हें समय रहते बदल देना ही सबसे समझदारी भरा निर्णय होगा।
एयर प्रेशर यानी हवा के दबाव का रखें विशेष ध्यान
टायरों में हवा के दबाव यानी एयर प्रेशर को लेकर भी लोग अक्सर लापरवाही बरतते हैं। वरिष्ठ टेक्नीशियन जे. भूषण का कहना है कि टायर में हमेशा सही मात्रा में हवा का होना बेहद आवश्यक है। बहुत से वाहन मालिक अक्सर जरूरत से ज्यादा या फिर जरूरत से बहुत कम हवा भरवा लेते हैं, जो दोनों ही स्थितियों में काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है। यदि टायर में हवा का दबाव तय मानक से कम होगा, तो टायर के किनारे जल्दी घिसने लगेंगे और गाड़ी का माइलेज भी प्रभावित होगा। दूसरी तरफ, यदि टायर में जरूरत से ज्यादा हवा भरी होगी, तो टायर का बीच का हिस्सा सड़क से पूरी तरह संपर्क नहीं बना पाएगा और सड़क पर गाड़ी की पकड़ बेहद कम हो जाएगी। यह स्थिति बारिश में दुर्घटना के खतरे को कई गुना बढ़ा देती है। इसलिए हमेशा अपने वाहन निर्माता कंपनी द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार ही टायरों में हवा का दबाव बनाए रखें और समय-समय पर इसकी नियमित जांच कराते रहें।
व्हील अलाइनमेंट और बैलेंसिंग को न करें नजरअंदाज
बारिश के इस चुनौतीपूर्ण मौसम में गाड़ी के व्हील अलाइनमेंट और व्हील बैलेंसिंग की सटीक जांच कराना भी बेहद जरूरी हो जाता है। यदि आपके वाहन का अलाइनमेंट सही नहीं है, तो गाड़ी चलाते समय वह किसी एक दिशा या एक तरफ खिंचने लगती है। इससे न केवल गाड़ी को सीधे रास्ते पर रखना मुश्किल होता है, बल्कि टायर भी असमान रूप से घिसने लगते हैं। गीली और फिसलन भरी सड़कों पर ऐसी अनियंत्रित गाड़ी को संभालना और भी ज्यादा कठिन और जोखिम भरा हो जाता है। इस प्रकार की किसी भी समस्या से बचने के लिए मानसून के दौरान सफर पर निकलने से पहले किसी विश्वसनीय और अच्छे सर्विस सेंटर पर जाकर गाड़ी के व्हील अलाइनमेंट की जांच अवश्य करा लेनी चाहिए।
कट, दरार और साइड वॉल के उभारों के प्रति रहें सतर्क
कई बार वाहन चालक टायर के साइड वॉल यानी बगल के हिस्सों पर आए छोटे-मोटे कट, बारीक दरारों या फिर किसी प्रकार के उभार को सामान्य मानकर अनदेखा कर देते हैं। जे. भूषण चेतावनी देते हुए कहते हैं कि ऐसी किसी भी खराबी को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। भले ही यह समस्या देखने में बहुत मामूली या छोटी लगे, लेकिन जब गाड़ी तेज रफ्तार में होती है या फिर खराब और गड्ढों वाली सड़कों से गुजरती है, तो यही छोटी सी दिखने वाली कमी बहुत बड़े हादसे का कारण बन सकती है। कमजोर हो चुके ऐसे टायरों के अचानक फटने का खतरा हमेशा बना रहता है। इसलिए यदि टायर में किसी भी तरह की दरार या उभार नजर आए, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ मैकेनिक से इसकी जांच कराएं और जरूरत पड़ने पर टायर बदलें।
हाइड्रोप्लानिंग से बचें, बारिश में गाड़ी की रफ्तार रखें नियंत्रित
बारिश के दौरान सुरक्षित सफर का एक मुख्य नियम यह भी है कि वाहन की गति हमेशा सीमा में होनी चाहिए। जे. भूषण बताते हैं कि जब सड़कों पर पानी जमा होता है और गाड़ी तेज गति से उस पर चलती है, तो टायर और सड़क के बीच पानी की एक पतली परत जमा हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप टायर का सड़क से सीधा संपर्क पूरी तरह टूट जाता है और गाड़ी पानी पर तैरने जैसी स्थिति में आ जाती है। विज्ञान की भाषा में इस खतरनाक स्थिति को हाइड्रोप्लानिंग कहा जाता है। हाइड्रोप्लानिंग के दौरान गाड़ी का स्टीयरिंग और ब्रेक पर से नियंत्रण अचानक पूरी तरह खत्म हो सकता है। इसलिए दुर्घटनाओं से बचने के लिए बारिश में हमेशा धीमी और पूरी तरह से नियंत्रित गति में ही वाहन चलाना चाहिए। इसके साथ ही, सड़क पर आगे चल रहे अन्य वाहनों से भी पर्याप्त और सुरक्षित दूरी बनाकर रखनी चाहिए ताकि आपातकालीन स्थिति में ब्रेक लगाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
केवल गाड़ी की सर्विसिंग कराना ही पर्याप्त नहीं
अक्सर लोग सोचते हैं कि मानसून से पहले गाड़ी की सामान्य सर्विसिंग करा लेना ही सुरक्षा के लिए काफी है, लेकिन जे. भूषण इस धारणा को गलत बताते हैं। उनका कहना है कि सुरक्षित सफर सुनिश्चित करने के लिए केवल गाड़ी की इंजन सर्विसिंग कराना ही पर्याप्त नहीं है। सुरक्षित ड्राइविंग के लिए टायरों की नियमित जांच, सही रखरखाव और समय पर उनकी देखभाल करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बारिश के मौसम में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए समय रहते टायरों की हर पहलू से जांच कराएं। यदि टायरों में किसी भी प्रकार की मरम्मत की आवश्यकता हो या उन्हें बदलने की जरूरत महसूस हो, तो इसमें बिल्कुल भी देरी न करें। ऐसा करके ही आप मानसून के इस सुहाने मौसम में अपनी यात्रा को सुरक्षित और सुखद बना सकते हैं।
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