किन्नौर में टूटा संपर्क
हिमाचल प्रदेश में इन दिनों मानसून की मार ने जनजीवन को अस्त व्यस्त कर दिया है। राज्य के किन्नौर जिले में जारी मूसलाधार बारिश और लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण सांगला क्षेत्र का मुख्य वैली ब्रिज पूरी तरह से ढह गया है। इस पुल के गिर जाने से सांगला घाटी का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग टूट गया है। बताया जा रहा है कि पुल के ध्वस्त होने के कारण अब कई गांवों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है और दैनिक जरूरतों के सामान की आपूर्ति बाधित होने की आशंका जताई जा रही है।
ताश के पत्तों की तरह ढहा पुल
किन्नौर के कल्पा उप-मंडल में स्थित यह वैली ब्रिज इलाके के लोगों के लिए किसी जीवन रेखा से कम नहीं था। पुल गिरने से पहले ही संकेत मिलने शुरू हो गए थे। भारी बारिश के चलते पुल के नीचे की पूरी जमीन धंस गई थी, जिसके कारण ढांचा हवा में लटक गया था। स्थानीय प्रशासन और वहां मौजूद लोग काफी देर तक स्थिति को देखते रहे, लेकिन दबाव इतना अधिक था कि देखते ही देखते यह पूरा पुल ताश के पत्तों की तरह ढहकर जमीन पर आ गिरा। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह क्षेत्र के लिए बहुत बड़ा नुकसान है क्योंकि यह घाटी को मुख्य मार्गों से जोड़ने वाला एकमात्र जरिया था। अब आवाजाही पूरी तरह ठप हो चुकी है।
शिमला में भी टला बड़ा हादसा
केवल किन्नौर ही नहीं, बल्कि राजधानी शिमला में भी बारिश के कारण हालात चिंताजनक बने हुए हैं। शिमला के संजौली इलाके में शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 बजे एक घर पर अचानक भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें आ गिरीं। यह घटना विशाल मार्ट के पीछे स्थित यशपाल के घर पर हुई। जिस वक्त यह मलबा मकान पर गिरा, उस समय घर के अंदर परिवार के दो युवक मौजूद थे। गनीमत यह रही कि दोनों ने समय रहते घर से भागकर अपनी जान बचा ली, जिससे एक बड़ा जानलेवा हादसा होने से बच गया।
प्रशासन की सुस्ती पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद प्रभावित परिवार ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि मलबा गिरने की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दे दी गई थी, लेकिन देर शाम तक राहत और बचाव का कोई भी दल मौके पर नहीं पहुंचा। मलबे को हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई अभी तक शुरू नहीं की गई है। पीड़ित परिवार ने आशंका जताई है कि आसपास अभी भी भूस्खलन का खतरा बना हुआ है, जिससे उनके घर के अलावा आसपास रहने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा भी दांव पर लगी है। परिवार ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द मलबा हटवाया जाए और पहाड़ी को सुरक्षित किया जाए ताकि भविष्य में किसी बड़े संकट को टाला जा सके।
मानसून की तैयारियों पर उठ रहे प्रश्न
राज्य में मानसून की सक्रियता के साथ ही भूस्खलन, चट्टानें गिरने और सड़कें धंसने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। सांगला ब्रिज के टूटने और संजौली में मलबे के गिरने की घटनाओं ने प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोल दी है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि राज्य के संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव की टीमों को पहले से ही तैनात किया जाए ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। आने वाले दिनों में यदि बारिश का यह दौर जारी रहता है, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
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